00:00भारत की सुरक्षा का सबसे बड़ा खत्रा बॉर्डर पर खड़े सैनिक नहीं बलकि सिरफ बाइस किलोमीटर की एक पत्ली सी
00:08जमीन की पत्ली है
00:09एक ऐसी जगहा जिसे अगर दुश्मन ने बलॉक कर दिया तो हमारे नौर्थीस के कही राज बाकी भारत से अलग
00:16हो सकते हैं
00:17इस जगाव कहते हैं चिकन जने या फिर सिलीगुरी कॉरिडोर लेकिन कहानी सिरफ सिलीगुरी कॉरिडोर की नहीं है
00:25कहानी जुड़ी है हमारे एक और पडोसी से बांगला देश और बांगला देश के दूसरे सबसे बड़े समुंदरी बंदरगा से
00:34मौंगला पोर्ट एक ऐसा पोर्ट जहां कभी भारत का काफी प्रभाव था
00:39जहां 2015 में भारत और बांगला देश के बीच एक बड़ा समझोता हुआ था
00:44लेकि अब तस्वीर बदल रही है क्योंकि ड्रैगन यानी चाइना अब मौंगला पोर्ट तक पहुँच चुका है
00:52रिपोर्ट के मताबिक चाइना को मौंगला पोर्ट के पास लगबग 110 एकर जमीन मिली है
00:57यहां एक एकनॉमिक जोन डिवेलप किया जा रहा है
01:00लेकि सवाल ये है क्या ये सिरफ बिजनस प्रोजेक्ट है या इसके पीछे कोई और बड़ी स्ट्राटेजी चुपी हुई है
01:08कई इंटेलजेंस रिपोर्ट दावा करती है कि ये सिरफ व्यप्यार की बात नहीं है
01:13बलकि ये भारत को स्ट्रटीजिकली घेरने की एक बड़ी कोशिश भी हो सकती है
01:18आज इस पूरी स्टोरी में हम समझेंगे कि मौंगला पोर्ट इतना इंपोर्टन क्यों है
01:22चाइना की एंट्री से भारत हो क्या चंता है और टीस्टा प्रोजेक्ट से लेकर सिलिगुरी कोरिडोर तक पूरा कनेक्शन क्या
01:30है
01:30तो चलिए शुरू करते हैं सबसे पहले समझते हैं मौंगला पोर्ट को
01:34बांगला देश का ये दूसरा सबसे बड़ा मैरिटाइम पोर्ट है बे अफ बिंगॉल के बिलकुल करिए
01:41और स्ट्रटीजिक लोकेशन के वज़े से ये बहुत इंपोर्टन माना जाता है
01:45यहां से इंडेन ओशन के ट्रेड रूट्स पर भी नज़र रखी जा सकती है
02:05तक समान पहुचाने के लिए ये एक सस्ता और आसान रास्ता था उस वक्त सब को लगा कि दोनों देशों
02:12के रिष्टे और मैं जबूत होंगे
02:13लेकिन जियो पॉलिटिक्स में तस्वीर कब बदल जाए ये कोई नहीं जानता
02:17और अब रीसेंज रिपोर्ट्स ने नई चिंता पैदा कर दी है
02:21बांगलदेश ने मौंगला पोर्ट के पास लगबग 110 एकर जमीन एक चाइनी स्टेट ओन कमपनी को दे दी है
02:28110 एकर कोई छोटा एरिया नहीं होता यहां एक नया एकनॉमिक जोन बनाया जाएगा
02:33चाइना का कहना है कि ये प्रोजेक्ट ट्रेड बढ़ाने के लिए है
02:36फैक्टरीज बनेंगी, कनेक्टिविटी बढ़ेगी और रीजिनल ड्वेलप्मेंट होगा
02:41लेकिन सिक्यूरिटी एक्सपर्ट इस बात को इतना सीधा नहीं मानते
02:45उनका कहना है चाइना का एक पुराना पैटर्न रहा है
02:48पहले इंवेस्मेंट, फिर इंफ्रेस्ट्रक्चर और उसके बाद स्ट्रटीजिक कंट्रोल
02:52इसी वज़े से कई लोग श्री लंका के हमबंतोता पोर्ट का एक्जाम्पल देते हैं
02:57जहां शुरुआत बिजनिस से हुई थी और बाद में चाइना के स्ट्रेटीजिक प्रेजन्स काफी बढ़ गई थी
03:03लेकिन सवाल ये है क्या ये सिर्फ एक एक एकनॉमिक जोन है या इसके पीछे कोई और प्लानिंग चल रही
03:10है
03:10सिक्योरिटी एक्सपर्ट का मानना है चाइना सिर्फ इन्वेस्मेंट तक कभी नहीं रुपता
03:15जहाँ चाइनीज कंपनीज जाती है वहाँ आगे चलकर स्ट्रेटीजिक इंटरिस भी देखने लगते हैं
03:21इसी लिए भारत की एजिंसी इस डिवेलपमेंट को काफी ध्यान से देख रही है
03:25अब समझते हैं कि मौंगला पोर्ट भारत के लिए इतना इंपॉर्टन क्यों है
03:29बेव बिंगॉल में जो भी शिप्स आती जाती है उन में से काफी मूवमेंट इसी एरिया के आसपास होती है
03:34अगर यहां चाइना की प्रेजन्स मजबूत होती है तो उसे पूरे रीजिन पर नज़र रखने का एक और मौका मिल
03:41सकता है
03:42और यही बात भारत की चिंता बढ़ा रही है
03:44अब आते हैं इस कहानी के सबसे इंपॉर्टन हिस्से पर
03:47सर्विलेंस या सीधी भाषा में निगरानी
03:50एक्सपोट सा कहना है कि अगर चाइनीज इंफरस्ट्रक्टर यहां और बढ़ता है
03:54तो फ्यूचर में अडवांस मौनिटरिंग सिस्टम भी लगाए जा सकते हैं
04:04अगर ऐसा होता है तो बेव बिंगॉल में हो रही कई आक्टिविटीस पर नजर रखी जा सकती है
04:10कौन सा शिप कब निकला, कौन सा कारगो कहां जा रहा है, कौन सी नेवल मूवमेंट हो रही है
04:15यह सब अब्जर्व करना आसान हो सकता है
04:18इसी वज़े से डिफेंस एक्सपोर्ट इस डिवललप्मेंट को सिर्फ बिजनिस प्रोजेक्ट नहीं मानते
04:23अब बात करते हैं एक और टेक्निकल चीज़ की
04:26नाम है ESM यानि Electronic Support Measures
04:30नाम थोड़ा मुश्किल लगता है लेकिन काम असान भाशा में समझी है
04:34ये एक Advanced Technology है जो Electronic Signals को Detect और Analyze कर सकती है
04:39जैसे Radio Communication, Radar Signals और दूसरे Electronic Transmissions
04:44अगर किसी Sensitive Area के पास ऐसे Systems लगाए जाएं
04:49तो Military Communication को Observe करना काफी आसान हो सकता है
04:53इसी वज़े से Experts इस Possibility को भी लेकर Concern जाता रहते हैं
04:58Reports में West Bengal की सुखना का भी जिकर किया गया है
05:03यहीं इंडिनामी के 33 Corps का Headquarters है
05:06यह Information North East की Security में बहुत Important रोल ने भाती है
05:10Experts का मानना है कि अगर Future में Advanced Surveillance Systems डिप्लॉई किये गए
05:14तो Military Communications को Monitor करने की कोशिश हो सकती है
05:18इसलिए Indian Security Agencies हर Development पर लगातार नजर बनाए हुए है
05:23लेकिन कहानी यहीं खतम नहीं होती
05:25अब आते हैं उस जगह पर जिसे भारती Security का सबसे sensitive point माना जाता है
05:31चिकन जने या सिलिगोरी कोरिडोर
05:34यह सिरफ 22 किलोमीटर चौड़ा एक कोरिडोर है
05:37लेकिन इसकी Importance बहुत बड़ी है
05:39यह बाकि भारत को 39 के राज्यों से जोड़ता है
05:42अगर कभी युद जैसी स्तिती में इस कोरिडोर को नुकसान पहुचाए तो
05:46नौर्थ 23 के राज्यों तक सप्लाय और कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है
05:50इसी वज़े से इस एरिया को स्टिटी जिकली बहुत sensitive माना जाता है
05:54और अब इसी के आस पास एक और प्रजेक्ट की चर्चा हो रही है
05:57तीस्ता रिवर प्रजेक्ट
06:00एक्सपोर्जेक्ट में चाइना की दिल्चस्पी लगातार बढ़ रही है
06:04और इसी वज़े से सिक्योरिटी सिर्कल्स में भी कई सवाल उठ रहे हैं
06:08अब तीस्ता प्रजेक्ट रिवर को भी समझ लेते हैं
06:11तीस्ता बांग्रदेश के लिए भी एक बहुत इंपोर्टन नदी है
06:14और इस प्रजेक्ट में इंट्राच्रक्टर डिवेलप्मेंट की योजना है
06:17लेकिन सिक्योरिटी एक्सपोस सा कहना है कि जब किसी सेंस्टेव एरिया के इतने करीब फॉरें प्रेजन्स पड़ती है
06:24तो हर डिवेलप्मेंट को ध्यान से देखना पड़ता है
06:26रिपोर्स में ये भी कहा गया है कि अगर चाइनीज इंजिनियर्स और टेक्निशिन्स इस प्रजेक्ट में बड़ी संख्या में काम
06:33करते हैं
06:34तो उनकी मौझूदगी स्ट्रटीजिक इंपोर्टेंस भी रख सकती है
06:37यही वज़ा है इंडिन स्क्यूर्टी एजिन्सी हर अक्टिविटी पर नजरे बनाए हुए है
06:56इसी लिए हर डिवेलप्मेंट से डिवेलप्मेंट नहीं होता कभी कभी उसका तीछे सिक्यूर्टी रीजिन्स जुड़े होते हैं
07:02अब एक और सवाग चाइना और बांग्रदेश इस पूरे मामले पर क्या कहता है
07:06ओफिशल स्टेट्मेंट में दोनों देशों ने कहा है कि यह साई प्रोजेक्ट सिरव एक्टिवेलप्मेंट के लिए है
07:11क्रेट बढ़ाने के लिए हैं इमप्लॉयमेंट क्रेट करने के लिए हैं
07:14और रीजनल करिविटी को मस्बूत बनाने के लिए हैं
07:17उनका कहना है कि यह इन परोजेक्स का किसी मिलिटरी आकर्विटी से कोई ले ना देना नहीं है
07:21और भारत को चिंता करने की जरूरत नहीं है
07:23लेकिन दूशी तरफ इंडिन सेक्योरिटी एक्सपर्ट हर डिवेलप्मेंट को अलग नजरीयक से देखते हैं
07:29उनका कहना है कि आज की दुनिया में इंफ्रस्ट्रक्चर और जियो पॉलिटेक्स एक दूसरे से अलग नहीं होते
07:34रोड, स्पोर्ट, रेलवे, एक्नॉमिक जोन ये सब सिर्फ ड्वेलप्मेंट प्रोजेक्स नहीं
07:38कई बार स्ट्रटीजिक आसेज भी बन जाते हैं
07:59साथ ही इंडिन नेवी और इंडिन आमी भी अपनी प्रिपेडनेस को लगातार मजबूत बना रहे हैं
08:04बॉटर मॉनिटरिंग, मारिटाइम, सर्विलेंस और एक्ट्रॉनिक केबिलिटीज पर भी लगातार काम हो रहा है
08:10अब अगर पूरे मामले को एक लाइन में समझे तो यह सिर्फ एक पूर्ट की कहानी नहीं है
08:14यह पूरे साथ एशिया में बदलते जियो पोलिटिकल बैलनस की कहानी है
08:18जहां हर नया प्रोजेक्ट, हर नया पार्टर्शिप और हर नया इन्वेस्मेंट से वे एकॉनमी से नहीं सेक्योरिटी से भी जुड़ा
08:24हुआ है
08:26इसलिए मौंगला पोर्ट और तीस्ता प्रोजेक्ट दोनों पर भारत की खास मज़र बनी हुई है
08:30अब सबसे बड़ा सवाल आने वाले सालों में क्या ये प्रोजेक्ट सिर्फ एकनॉमिक डिवेलिपमेंस तक सीमित रहेंगे या इनका स्ट्रटीजिक
08:37इंपैक्ट और बद्रेगा
08:38इसका जवाब आने वाले वक्त ही देगा लेकिन एक बाते है साथ एश्या की जियो पॉलिटिक स्थेरी से बढ़ रही
08:45है
08:45हर एक कदम भारत के लिए बहुत माहिने रखने वाले हैं
08:48आपको क्या लगता है क्या भारत को इस बदलते जियो पॉलिटिकल लैंड्सकेप के लिए और तयारी करनी चाहिए या मौजूदा
08:54स्ट्राटेजी काफी है
08:55कॉमेंट करके हमें ज़रूर बताइए
08:58देखते रहिए वान इंडिया हिंग
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