00:00पेड़ पधों भी तो जानोती है उनको खा रहे हूँ
00:02एक साब ने लिपके भेजा है
00:03मैंने तो पेड़ों को रोते हुए देखा है
00:05मेरी अंतरात्मा रोड़ पड़ती है जब मैं देखता हूँ
00:29इस अच्छा तुम एक किलो अन्नी खा लो ना कोई पॉधे कम रोएंगे
00:33दुनिया का सतर पतिशत अन उत्पादन सिर्फ इसलिए होता है ताकि उन जानवरों खिलाया जा सके जो आपका आहार बनेंगे
00:42अब उतनी जमीन कहां से लाई जाए उतना अन जाने के लिए तो वो जमीन कहां से आती है फिर
00:48जंगल काटके
00:49जब जंगल कटते हैं तो शेर, भेडिये, हाथी, गैंडे ये सब खत्म हो जाते हैं क्योंकि उनको रहने की जगे
00:54नहीं बची
00:54तो मासाहारी सिर्फ उस जानवर को नहीं खाता जिसको वो खा गया
00:59मासाहारी सैकडों और जानवरों को भी खा गया उसने उनको इंडाइरेक्ट मौत दे दी
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