00:00हम इसकी तो बात कर लेते हैं कि बुद्ध जाकर के 12-14 साल ग्यान प्राप्ति के लिए, मुक्ति के
00:06लिए धरुदर भटकते रहे, इतने सारे गुरुवों से, शिक्षकों से मिले हैं, उसकी तो करते हैं, उसके जो बाद की
00:12बात है, बहुर ज़्यादा मारमिक है न, 70-80 साल जी
00:29सिंति के शहर, बाकी सब छोटे-छोटे छोटे चोटे घाओं, और गाओं-गाओं में भी न जाने कितनी दूरी, तो
00:35सोचो एक बार, कितनी राते हैं, कितने ही हफते, नंगे पैर और भूखे पेट ये वो है, जो अपनी और
00:41से दे सकते हैं, और जब उन्होंने इतना दिया
00:43तो भारत से फिर उनको बराबर का प्यार भी मिला
00:47पूरा उत्तर भारत बुद्ध कानिया आई हो गया
00:49बहुत सम्मान दिया भारत में बुद्ध
00:50ये बात भारत में है
00:52हम जो लोग चितना में उंचे होते हैं
00:54ग्यानी होते हैं
00:55जिनको हम पाते हैं कि वो हमारी भलाई के लिए कुछ कर रहे हैं
00:58हम उनको सराखो बैठाते हैं
01:00उसमें कई बार हम धोखा भी खाते हैं
01:02क्योंकि सम्मान हम कई बार ऐसों को भी देते हैं
01:04जो उसका अधिकारी नहीं होते हैं
01:05पर वो गलती करनी फिर भी ठीक है
01:06किसी ऐसे को इज़त दे दी जो उसका अधिकारी नहीं, कोई बात नहीं, लेकिन ऐसे को इज़त देने से कभी
01:12चूक मत जाना जो उसका अधिकारी है
Comments