00:00जरी जी आपके तरह निडर और स्वश्ट पाल के साथ कैसे अपनी बात रखी जाए?
00:30कैसा हूँ? सहाज हूँ. आप आती हैं, आप कुछ पूही लेती हैं, जवाब दे देता हूँ. इसमें निडरता थोड़ी लगती
00:36है, अब सूरज है, थोड़ी देर में वहाँ परवत के पीछे डूप जाएगा, तो उसको अपने भीतर कुछ निडरता जागरत
00:44करनी पड़े�
00:47सहाज उगा, सहाज बढ़ा और सहाज ढ़ला, उसमें इतना क्या है कि आत्मविश्वास और इक्छा शक्ति और निर्भयता, कुछ नहीं.
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