00:00कृष्ण वो देह नहीं है, जो मोरपंक धारण करती है, जो मुरली धारण करती है, वो देह नहीं है कृष्ण
00:06कृष्ण वो बोध है, जो काला तीत है, जो जगत की उत्पत्ति के समय भी था, तब उसका नाम कुछ
00:13और रहा होगा, पर वो भी कृष्ण ही था
00:15अर्जुन के सामने जो कृष्ण खड़े हुए हैं वो कृष्ण का बस एक विशेश रूप है
00:20वो रूप तो चला जाएगा जैसे अर्जुन की देह मरनी है वैसे ही कृष्ण की वो विशेश देह भी मरेगी
00:25मरी थी ना? हाँ
00:27आप जिनको कृष्ण कहते हैं वो कृष्ण के अनन्त रूपों में एक रूप है जो अर्जुन के सामने था
00:33तो एक चेहरे को कृष्ण मत समझ लेना ये बात तु अर्जुन को नहीं समझा रहे हैं
00:38ये बात आप सब अर्जुनों को समझा रहे हैं
00:40कि तुम मुझे भी बत एक चहरा माने बैठे हो,
00:43अरे मैं चहरा नहीं हूँ बाबा,
00:46मैं चहरे से बहुत आगे का हूँ,
00:48मेरे नजाने कितने चहरे हो चुके हैं,
00:51हर बोधवान चेतना का चहरा,
00:55हर प्रबुध चहरा, मेरा ही चहरा है अरजुन,
00:58हर वो व्यक्ति कृष्ण है जो बोध में जी रहा है
01:01जब जब धर्म की हानी होती है
01:05और अधर्म का अभ्यूदय होता है
01:07अधर्म सर चड़ के बोलता है
01:09तब तब मैं उस धारा से अपने आपको प्रकट करता हूँ
01:14तो प्रकट होना क्या कृष्ण का फैसला है?
01:17नहीं नहीं क्रिष्ण का नहीं है
01:19क्रिष्ण तो है
01:20वो प्रकट होनगे या नहीं होनगे
01:22यह आपका फैसला आपका चुना होगा
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