00:00बहुत लोग आए पाते हैं नहीं साहह हमारे तो घर की गाए हैं हम डेरी से झेलेते हैं घर की
00:04हम हमाने घर हम धैने बंदी क़ड़ी रहती है तुम्हें एक दिन भी कई बान्द के खड़ा करतें कुमारी क्या
00:28वेजिटेरियन बोल रहे हो, इतनी common sense की बात है, पर हमें नहीं दिखाई देता है, कोई आप बिल्कुल ले
00:32लो छोटा बच्चा, वो ये तारे सवाल करेगा, वो पूछेगा, लेकिन हमारी संस्कृत और हमारी शिक्षा, उसके सवालों का गला
00:40घोट देते हैं, उसको पूछन
00:52की नहीं देता की जल्म हो रहा है,
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