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पूरा वीडियो : जब मृत्यु निकट हो || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2022)
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Transcript
00:00मृत्य को लेकर हमारे पास बहुत विचित्र तरह का ग्यान है
00:05और उसी ग्यान के कारण मौत हमारे लिए इतना बड़ा दुस्वप्न है
00:10मौत नहीं है
00:12ये खशन मात्र है जिसमें आपको उचित कर्म करना है
00:17विकल्प बस है अभी कि जो सही है वो कर लो
00:20मृत्य से एक शन पहले तक भी आपको सही काम करते ही रहना है
00:24और शरीर जब है ही नहीं कर्म का विकल्प जब उपलब्धी नहीं होगा
00:27तब कोई भात ही नहीं
00:29ना कोई जिग्यासा ना कोई समस्या
00:31तीन घंटे की परीक्षा है
00:33दो घंटे अठावन मिनट हो चुके है
00:35क्या करोगे सोचोगे
00:37कि अब कोई आ रहा है परचा छीन ले जाएगा
00:39क्या करोगे लिखते रहोगे
00:41और क्या करोगे जब तक छीनी नहीं ले
00:43तब तक लिखते रहो
00:44वो छीन रहा है तब भी लिखते रहो
00:47एक दिन तो आएगा ना जब मेरा भी अंतिन महुतसव होगा
00:51उसके बाद थोड़ी ये सब सजेगा
00:53पर जब तक नहीं है जब तक हैं तब तक जो कर सकते हैं करेंगे
00:57किस लिए करेंगे मरी जाना है तुम हटो तुम समझे नहीं आरी पात
01:00करने के लिए करेंगे सही है इसलिए करेंगे
01:04यहां से यह भी दिखाई दे रहा होगा कि मौत बुरी क्यों लगती है
01:07क्योंकि मौत के बाद भोगने को नहीं मिलता जब तक जी रहे हैं
01:11तब तक भोग रहे हैं मर गए तो खीर कौन खाएगा
01:14हमें भोगना अगर है ही नहीं
01:16तो मौत बुरी लगे क्यों
01:17हमें करना है बस भोगना है ही नहीं
01:20अब मौत बुरी क्यों लगे
01:22मृत्यु तो है ही है
01:23बचपन से मृत्यु है
01:26मृत्यु का ही जन्म होता है
01:28जिसको तुम जीवन कहते हो
01:30वो लगातार मरने के लावा क्या है
01:33और जो वास्तविक जीवन है
01:35उसको तो खोजना पड़ता है
01:37मौत बस है जो मुफ्त मिल जाती है
01:39जन्म लेने के साथ
01:41शरीर अभी है तो अभी जो कर सकते हो करो
01:44और इसी पल अगर विदाई है
01:46तो फिर सवाल पैदा ही नहीं होता
01:48अब पूछना के आप तो विदाई है
01:50और विदाई अगर आई नहीं है भी
01:53तो जो अधिकतम अभी कर सकते हो करो न
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