00:00सुबह सुबह बागीचे में सिधार्थ गौतम बुद्धोने से पहले प्रमण किया करते थे
00:05और तभी वो क्या पाते हैं कि एक पक्षी शिकारी के बान से आहत हो करके उनके सामने आ करके
00:12गिरता है
00:12तो उसको उठा लेते हैं
00:13जब वो उठा लेते हैं तो जो शिकारी है आखे टक
00:16उनके पास आता है कहता है मैंने मारा है मेरी संपत्ती है वापस करो
00:20तो कहते हैं नहीं नहीं दूँगा वापस नहीं दूँगा
00:54जब किसी को अनुमती नहीं होगी, किसी पशु को काट देने की, हिंसा पहुचाने की, कैद कर लेने की, अपना
01:02भूजन बना लेने की, उसी दिन के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं.
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