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पूरा वीडियो : मुक्ति: डरावनी या हार्दिक? || आचार्य प्रशांत, आत्मबोध पर (2019)
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Transcript
00:00तुम्हारी पत्नी को कोई बता दे कि पत्देव को निर्वान मिला है भी अभी पहले तुमको दोचार मारेगी फिर पुलिस
00:08की तरफ भागेगी बोलेगी कौन है वो जिसने मेरे पते को निर्वान देलाया कौन है मेरा दुश्मन मुक्ते का मतलब
00:17यही होता है कि राजा अपन
00:27पत्नी छोड़कर चल दिया माँ अपना पुत्र छोड़कर चल दी तो ये तो सब दरावना ही है मुह बहुत डरता
00:41है
00:43अहम उस बीमार मरीज की तरह है जो बहुत चिला और छट पटा रहा है तुमने मुक्ति के बारे में
00:51जो किसे बना रखे हैं जानते हो वो किसे क्या कहते हैं
00:57मरीज चिलाता था चट पटाता था शोर मचाता था
01:00उसको चिकिट सक के पास लाया गया
01:02और चिकिट सक ने उसको उसके दुख से उसकी इंतरना से
01:08उसके शोर से उसकी चट पटाहट से मुक्त करने के लिए उसको जहर दे दिया
01:13वास्तों में मुक्त क्या है
01:15कि मरीज बीमार था, बहुत चला रहा था, बहुत छटपटा रहा था, चिकित सक ने प्रेम पूर्वक उसका इलाज किया,
01:26उसको दवा दी, अवशदी दी, और धीरे धीरे, प्रेम के स्पर्श से और दबा के प्रभाव से, वो मरीज ठीक
01:40हो गया, और जब ठीक हो गया, तो सा
01:42सारी चीख पुकार सारी वेदना बंद हो गई ऐसे मिलती है मुक्ति मुक्ति का मतलब होता है मरीज को स्वास्थे
01:53मिल गया
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