00:00अध्यात्मिक्ता और ईश्वर इन दोनों को आप कैसे दिखते हैं कैसे परिभाशित करते हैं
00:06अध्यात्मिक्ता स्वयम को जानने का नाम है अध्यात्म अध्यात्म आस्तिक वो है जो सुईकार करे के अहंकार के बिना भी
00:20जिया जा सकता है
00:22हाँ, अस्ति, येस, वो आस्तिकता है
00:26और अध्यात्म आस्तिकता का विज्ञान है
00:31आपका मानसिक माडल ये होता है कि मैं ये शरीर हूँ
00:34मैं इस प्रत्वी पर चल रहा हूँ
00:36तो जैसे हर चीज ये मग है, इसको किसी ने बनाया है
00:39तो ऐसे मुझको और इस प्रत्वी को भी किसी ने बनाया होगा
00:41तो वहां से आप एक सृष्ट करता इश्वर को ले आ लेते हो
00:46अध्याक्म में इश्वर का अर्थ होता है तुम्हारे भीतर की सच्चाई
00:51कोई सृष्ट करता नहीं
00:53बाहर की बात करना ना समझी है और उससे हजार तरीके के द्वंद और हिंसाएं पैदा होते हैं
00:59यहुदियों का इश्वर अलग है
01:02मुसल्मानों की धारणाएं अलग है
01:04इसाईयों की अलग है
01:05देख लो इरान में क्या हो रहा है
01:07उससे पहले देख लो कि गाजा में क्या हो रहा था
01:12क्योंकि वहां आपने जैसे हर चीज को बाहर रख करके
01:15उसको बाहरी रंग अर्थ रूप दे दिये हैं
01:18अपनी सुइधा अपनी मानता के अनुसार
01:21वैसे यह आप इश्वर को भी बाहर बठा देते हो
01:23यह इश्वर का भी अपमान है कि आप उसे बाहर के किसी लोक में बैठा दो
01:28इश्वर की सच्चाई और सम्मान इसी में है
01:31कि आप उसे अपने भीतर स्थापित करो
01:34और जब वो भीतर आ जाता है
01:36चुकि वो भीतर है वो मैं हो गया है
01:38तो फिर उसको बोलते हैं आत्मा
01:42वेदान्त में जो सरवोच सत्ता है
01:45उसका नाम आत्मा है
01:47और उसी आत्मा को ब्रहम भी कहा जाता है
01:50आत्मा कहो या ब्रहम कहो या सत्त्य कहो वो एक ही है
01:55और अगर आप भगवान या इश्वर कहना चाहते हो
01:58तो बस ये कह दो कि भगवान इश्वर ये व्यक्ति के हृदय में विराजते हैं
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