00:00आचारे जी जिसे चारधाम यात्रा हो रही है और यूद्ध जो है उसने सिर्फ यात्रा को यात्रा ना समझ के
00:06सिर्फ फेस्बुक के लिए रील्स के लिए समझा गया है
00:17और केदारनाथ बत्रीनाथ वो सिर्फ ट्रैकिंग समझते हैं तो रिलाक्सेशन के लिए सिर्फ उस तरीके से सोच ले देखिए जो
00:25मैं उत्तर दूँगा वो यहां यह जितने हजारों लोग बैखे हुए हैं और जो पूरी नगरी है पूरा देश पूरा
00:33विश्व सभी को थो
00:36लोड़ा अखर सकता है वही तो कर रहा है न युवा जो उसे धर्म के नाम पर हमने सिखाया है
00:44हमने उसको बोल दिया कि धर्म मनोकामना पूरी करने का साधन होता है कि जाओगे और प्रार्थना करोगे और फलानी
00:54जगह पर जा करके मननत मांगोगे तो तुम्हारी कामनाएं
00:58पूरी हो जाएगी और हमने उसको बता दिया कि धर्म लगभग एक कबीलाई एक ट्राइबल चीज होती है जिसमें संख्याएं
01:07गिनी जाती हैं और देखा जाता है कि इधर कितने और उधर कितने हैं और इधर जितने उनको और बढ़ा
01:13लो क्योंकि उधर वाले जाए उस अ�
01:27मनोरंजन की भोग की परेटन की चीज समझ रहे हैं लोग निकल रहे हैं वो जिनका देख करके लग दिख
01:35जाता है कि इनका कोई रिष्टा नहीं होगा धर्म से वो धार्मिक बने भूम रहे हैं और इस बात को
01:40हमारा समाज प्रोटसाहित कर रहा है धर्म के नाम पर हम अंदि
01:56को या युवा को ही कैसे दोश दे दूं कि अब इन्होंने आ करके चाहे वो रिषिकेश हो चाहे बदरी
02:03के दार हो वहां जा करके अब यह गंदगी मचाते हैं और अशलीलता भी करते हैं फूर गाने चल रहे
02:09हैं राफ्टिंग अब हो रही होती तो वहां जाकर देखी कि क्य
02:11हो रहा होता है बड़ा भद्दा होता है दुख होता है तेकिन फिर जब समस्या की जड़ तक पहुशना चाहता
02:17हूं तो कहता हूं कि व्यक्ति को क्या दोश दूं यह जो हमने महाल ही चला रखा है यह महाल
02:23ही जब तक जड़ से नहीं बदलेगा तब तक घाओ के ऊपर मरहम �
02:26पट्टी करने से बात नहीं बनेगी युवा में आज आप धर्म का जो बड़ा विक्रत रूप देख रहे हो उसका
02:33सिम्यदार हमारा पूरा समाज है धर्म मनुष्य को बचाने वाली चीज है और धर्म का वास्तविक अर्थ जब तक सब
02:40के सामने नहीं आएगा जो आप दे�
02:52अर्थ और मर्म सामने लाने के लिए ही है
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