00:00जो यहां के बच्चों के लिए तो आपने कई मेसिज दे दिये
00:02एक मेसिज जो मीडिया के तुरू आप यंग्स्टर्स को देने चाहते हो तो क्या होगा
00:06पहले क्या होता था कि हम शिकायत करते थे
00:09कि हमें दुनिया और समाज ने और परंपरा ने दबा रखा है
00:14आज से आप 50 साल पीछे जाएंगे न तो बड़ी बात मानी जाते थी कि युवा विद्रोह करे
00:21और बाहरी दिशा में वो विद्रोह कई बार आवश्यक भी होता था
00:26दमनकारी विवस्थाएं होती थी जो व्यक्ति पर युवा पर चड़ी बैठे होती थी तो अच्छा था
00:32अवश्यक था कि युवा विद्रोह करे जो अभी लेकिन पीड़ी निकल कर आ रही है
00:36इनका काम दुहरा है बाहर जो ठीक नहीं है उसको तो ठुकराना ही है इन्हें उसको भी ठुकराना है जो
00:46भीतर ठीक नहीं है
00:47क्योंकि हुआ यह है कि बाहरी बातों को ठुकराने के नाम पर चलन चल निकला है अपनी ही बात को
00:57सही मान कर स्वीगार कर लेने का
00:59तो जो बाहरी शोशक है उसको तो हम ठुगरा देते हैं।
01:03और जो हमारे ही भीतर हमारा शोशक बैठा है, हम उसके गुलाम हो जाते हैं।
01:07तो आज का जो युवा है में कह रहा हूँ, उस पर धौरी जिम्मецारी है।
01:11बाहर जो ठीक नहीं है, जो गलत है, जो जूठा है, जो फरेब है, उसको तो ठुकराओ ही, और अपने
01:18ही भीतर, जो उल्टी-पुल्टी माननेताईं बैठ गई है, अग्यान बैठा हुआ है, अपने भीतर भी जो हमारा दुश्मन बैठा
01:26हुआ है, उसको भी ठुकराओ, ये �
01:27करना है कि मैंने दुनिया के खिलाफ तो विद्रों कर दिया और अपने ही भीतर अपने दुश्मन को लेकर घूम
01:32रही हूं बाहर के दुश्मन को भी ठुकराना है और अपने ही भीतर जो अपना दुश्मन बैठा है उसको भी
01:38ठुकराना है
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