00:00ये इतनी अजीब बात है एक विदेशी आता है जब हमारे परवतों पर तो वो विदेश में मासाहार करता होगा
00:06भारत आ करके कहता है नहीं
00:07मासाहार छोड़ दो मैं पशु कुरूरता के उत्पाद माने दूध पनीर और भी नहीं छूँँगा ये विदेशियों का हाल रहता
00:14है वो यहाँ विकास देखने नहीं आते उनका अपना विकास ठीक ठाक है वो यहाँ जिस चीज के लिए आते
00:19हैं और दूसरी वहीं रिजिके
00:35पर वो पहाड पर आकर हो जाता है शाकाहरी और देशी अपने घर में भले शाकाहरी होगा लेगिन पहाड पर
00:41चलकर हो जाता है बलातकारी जिस जगह से मुझे इतना प्रेम रहा है और जिस जगह से मुझे बहुत प्रेम
00:47मिला भी है जिस गंगा के तट पर मैंने इतना कु�
00:49सीखा है इन्होंने ऐसा कर दिया उसको कि उससे मेरा मनु चटने लग गया है
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