00:00अपने जीवन से ही बात करता हूँ, 11 में मैंने मैस लिया, उसके बाद BCA करने पहुँच गया, मन नहीं
00:05लगा तो अरेनोटिकल इंजिरिंग करने पहुँच गया, वहाँ भी मन नहीं लगा तो BSC Computer Science कर लिया, MBA कर
00:09लिया, उसके बाद फिर जनलिजम किया, इस पस्टता भी भी �
00:12आप आई शायद, आप ही बता दीजिए इस पस्टता किसे कहते हैं, बाहर आठ दस क्षेत्र बदलने में अनिवारे रूप
00:21से कोई बुराई नहीं होती या इस बात का दियो तक भी नहीं होता कि इस पस्टता की कमी है,
00:28बात यह है कि आप जिस क्षेत्र में हैं, उसको आप �
00:32तो उसमें दो बाते पता होनी जरूरी है, वो क्षेत्र क्या है और मैं क्या हूँ, ज्यादा तर लोग जब
00:41जीवन के निर्णाय लेते हैं, तो जिस क्षेत्र में लेते हैं वो उसक्षेत्र को भी नहीं समझते, उसक्षेत्र की बस
00:48वो सतह से परिचेत होते हैं, यहाँ पर �
00:52आवसर कैसे हैं, स्कोप कितना है, पैसा कितना मिल जाएगा, करियर ग्रोथ कैसी होनी है, और उस शेतर को देखते
01:01वक्तों खुद को देखना तो पूरी इतरह भूल जाते हैं, तो फिर ये नासमझी में इस पश्टता के अभाव में
01:07लिया गया, निर्णे हो जाता है, ये निर
01:21देशे से होने चाहिए, कि कहने को कैरियर है, बाहर की चीज है, पर है तो जिन्दगी का हिस्सा ही
01:27न, तो कैरियर भी ऐसा होना चाहिए, जो जिन्दगी को भीतर से उठाए, उचाई दे, सरस बनाए, सुन्धर बनाए
Comments