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Transcript
00:00इस्त्री घर की लाज और इज़त होती है न तो उसे सुख सोईधा से लैस रखा जाता है कोठीयों वाली
00:07इस्त्रीयों को तुमने धूप में कब भूमते देखा सणक पर हाँ घर के अंदर उनका कितना भी शोशन हो रहा
00:12हो घरवलू हिंसा ही हो रही हो यह संभव है पर हिंसा �
00:16और भी एयर कंडीशनर वाले कमरे में हो रही होगी बलाकार भी ओड़ोगा उनका घर के अंदर तो जिस गद्दे
00:22पर होड़ा होगा वो एक लाख रुपए का होगा वोरे मुखड़े पर आच नहीं आने वाली हां मल भले गंदा
00:28कर दिया जाए एक तरफ तो पुरुषवर्
00:34शोषण करता है दूसरी और उनको गहनों से लाद कर भी तो रखता है न यह आभुशणों की दुकाने इनमें
00:40क्या पुरुषव के गहने भिक रहे हैं बोलो चुना उस्तरी को करना है मिलेंगे तो दोनों एक साथ मिलेंगे गहने
00:48और शोषण और शोषण नहीं चाहिए तो
00:50गहने और पोठियां भी छूपनी पड़ेंगी
00:53जिन्हें पोठियों का लाज़स है
00:54वो शोशल करवाने के लिए भी तैयार रहें
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