Skip to playerSkip to main content
Crude Oil Price Hike: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रख्यात अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। इस वीडियो में जानिए कि कैसे अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते बढ़ता तेल संकट आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है और क्यों बढ़ रहा है महंगाई का महाखतरा!

Amid the ongoing US-Iran geopolitical conflict in West Asia, prominent economist and former UN Economic Advisor Santosh Mehrotra has issued a stark warning regarding India's macroeconomic stability. He stated that crude oil price shocks could push Brent crude beyond $150 per barrel, significantly widening India's Current Account Deficit (CAD) and accelerating retail inflation. Highlighting the sharp depreciation of the Indian Rupee towards ₹100 against the US Dollar and supply chain disruptions via the Strait of Hormuz, Mehrotra criticized the recent fuel price hikes and emphasized the severe impact on household budgets, transport costs, and employment across critical sectors like MSMEs and restaurants.

#PetrolDieselPriceHike #OilPriceShock #SantoshMehrotra #Inflation #OneindiaHindi

~HT.410~PR.250~ED.110~GR.510~

Category

🗞
News
Transcript
00:00है तो हम पहले से ही जानते हैं कि अंतराश्ट्रिय तेल की कीमतों में हर दस डॉलर की बढ़ोतरी हमारे
00:11चालू खाता घाटे को GDP के लगभग 0.3 प्रतिशत तक बढ़ा देती है
00:17और साथ ही उपभोकता मूल्य सूचकांक पर वही दस डॉलर का प्रभाव लगभग उतना ही है
00:29इसी लिए मुझे इसमें बिल्कुल भी हैरानी नहीं हो रही है कि GDP के जो अनुमान लगाए गए थे
00:37उनमें पहले ही काफी कटौती कर दी गई है और साथ ही साथ CPI के अनुमानों में भी काफी वृध्ध
00:43कर दी गई है
00:44हालांकि ये सब कुछ अभी की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों पर ही आधारित है
00:50अभी तक इस बात की कोई पुष्टी नहीं है कि युद्ध खत्म होने वाला है
00:57ये केवल एक अस्थाई युद्ध विराम है और तेल, गैस, उर्वरक, हीलियम आधी की आपूर्ती में गिरावट आई है
01:10और इन सब का असर पहले ही आम लोगों के जीवन पर पाड़ी डी डी एच रहा है
01:16इसमें सरकार के हालिया कदमों का असर शामिल नहीं है जो आज यकल ही लिए गए हैं
01:23ये तो CPI, CPI पर सरकार का जो कदम होने वाला है
01:30वह मुद्रासफीती दर को पहले से प्रचलित दर से भी उंचे स्तर पर ले जाएगा
01:37तो हमें इंतजार करके देखना होगा
01:40तो हम अभी भी दो बातें अग्यात हैं युद्ध कब तक चलेगा और सरकार को अगे क्या कदम उठाने होंगे
01:49तो युद्ध जितना लंबा चलेगा सरकार को उतने ही ज्यादा कदम उठाने होंगे
01:53तो यह अनुमान लगाना बहुत कठिन है कि GDP या CPI यानि मुद्रा स्फीती दर में वास्तव में कितनी गिरावट
02:04आएगी
02:04अधिक महत्वपून बात ये है कि हम MSMI में नौकरियों के नुकसान पर पहले ही काफी असर देख रहे हैं
02:11क्योंकि कुछ विशिष्ट उद्योग ऐसे हैं जो पहले ही प्रभावित हो चुके हैं
02:17नतीजतन सीरेमिक उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है क्योंकि ये मुख्य रूप से LPG पर निर्भर है
02:27और हाल ही में उद्योगिक LPG की भारी किलत हुई है
02:32रेस्टरेंट उद्योग में नौकरियों की संख्या में काफी गिरावट आई है क्योंकि व्यावसाइक प्रतिष्ठानों के लिए LPG परियाप्त मात्रा में
02:45उपलब्ध नहीं हो पा रही है
02:46क्योंकि आपूर्ति में सामान्य रूप से व्यवधान आया है
02:52हलांकि सरकार ने LPG सिलेंडरों का उत्पादन बढ़ाया है लेकिन ये बिल्कुल भी परियाप्त नहीं है
02:59जो ये दर्शाता है कि और अधिक कदम पहले उठाए जा सकते थे या उठाए जाने चाहिए थे
03:06और सच कहें तो अगर हम महंगाई के असर को कम करना चाहते हैं तो हमें दो महीने पहले ही
03:12कदम उठा लेने चाहिए थे
03:15तो सरकार अब जो कदम उठा रही है वह दुर्भाग्यवर्ष बहुत कम और बहुत देर से है
03:25इस पर मेरी तीसरी टिपणी ये है कि सरकार द्वारा डीजल की कीमतें बढ़ाना बहुत समझदारी भरा नहीं है क्योंकि
03:35डीजल परिवहन लागत का एक मुख्य हिस्सा है
03:38इसका मतलब है कि यह असर डालेगा सरकार असल में महंगाई दर को बढ़ा रही है क्योंकि इससे हर चीज़
03:47की परिवहन लागत बढ़ जाएगी
03:50पेटरोल का सीधा सा मतलब है कि ऐसी घरेलू या व्यावसाइक गाड़ियां जो अपने आईसी इंजनों में पेटरोल का इस्तिमाल
04:01करती हैं भले ही उनकी मांग कम हो गई हो
04:04अब मान लीजिए कि अगर डीजल की कीमतें काफी बढ़ जाती हैं और आप उसकी मांग कम करना चाहते हैं
04:12तो देखिए असल में डीजल की मांग बेलोचदार होती है क्योंकि ट्रकों को तो हर हाल में सामान ढोना ही
04:17पड़ता है
04:17तो इसका बोज सीधे तोर पर ट्रक वालों को जेलना पड़िड़ हेगा लेकिन अंततह इसे उपभोकता पर ही डाल दिया
04:26जाएगा
04:26तो ये नहीं मैं पिछले दो महीनों से कह रहा हूं कि मुझे उमीद है कि सरकार डीजल की कीमतें
04:34नहीं बढ़ाएगी
04:35मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं क्योंकि पिछले 10 वर्षों से सरकार के पास काफी गुंजाईश रही है
04:40देखिए अंतरराष्ट्रिय तेल की कीमतें व्यवस्थित रूप से 50-60 डॉलर प्रतिबैरल के आसपास रही है
04:50जो कि एक तरह से अंतरराष्ट्री का आधा है
04:55विदेशों से आयात किये जाने वाले तेल की प्रतिबैरल जो लागत है
05:01जो पिछले दशक में आम था यानि 2005 से 2014 की बात
05:10तो सरकार को लगभग 25 से 30 से 30 लाख करोड का अप्रत्याशित लाब हुआ है
05:19जिसका इस्तिमाल जाहिर तोर पर कुछ हद तक उन अनावश्यक कारियों में किया गया है
05:25जिन्हें टाला जा सकता था और बहुत सारी मुफ्त की रेवडियों में
05:28बेशक ये बुन्यादी धांचे में निवेश में भी गया है
05:33असल बात ये है कि राजकोशिय घाटा जीडीपी अनुपात चार से पांच प्रतिशत के दाएरे में बना हुआ है
05:42सरकार पर राजकोशिय दबाव लगातार बना हुआ है
05:47और मुझे ये कहते हुए खेद है कि खराब आर्थिक नीतियों के परिणाम सरूप ये वित्तिय दबाव पैदा हुआ है
05:56और बेशक हम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकरशित करना जारी रखने में भी सक्षम नहीं रहे है
06:02विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बाहर जा रहा है
06:05तो हमारे सामने एक पॉली क्राइसिस एक मल्टी क्राइसिस की स्थिती है
06:12जिसकी वज़े से डॉलर के मुकाबले रुपया गिर रहा है
06:15जब रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता है तो लाजमी है कि ऐसी स्थिती बनेगी
06:20जहां RBI डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत को बचाने के लिए हस्क शेप करेगा
06:26लेकिन ये काफी लंबे समय तक चलता रहा और अब RBI ने ऐसा करना बंद कर दिया है
06:33तो पिछले तीन महीनों में जो हुआ है वह यह है कि रुपया 90 रुपय से कम से बढ़कर लगभग
06:4195 से उपर
06:42यानि लगभग 96 रुपय प्रति डॉलर हो गया है अब इसका अपना महंगाई पर असर पड़ेगा
06:48तो अगर सरकार वास्तव में यदि डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्री के बोज को इसी तरह उठाना
07:01जारी रखा जाए
07:02तो कम से कम महंगाई के जो घरेलू पहलू है या जो घरेलू स्रोत है उन्हें काफी हद तक कम
07:08किया जा सकता है जबकि महंगाई के जो अंतरराश्ट्रीय स्रोत है उनका भार सरकार द्वारा स्वयम वहन किया जा सकता
07:15है
07:18तो मूल रूप से मैं यही अपनी बात को संख्षेप में कहूं तो अब तक जो कुछ भी हुआ है
07:23वह बहुत कम है और बहुत देर से हुआ है राजनीतिक कारणों से क्योंकि चुनाव चल रहे थे
07:28और ठीमरी यह बहुत है तैक नम hmज व्युआ को भी है लग्र मिल्ग चलोप्स नीज कर� एस
07:37यह खूं ड़ conservative बेंचा में अपलग लिए ईदो में अन्सार कारण ढूं़ा टो प्युआ है the tarde
07:39जा हूंट है थ baru हूँआ घ्य 거�ा एंट
Comments

Recommended