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Prateek Yadav Funeral: अखिलेश यादव ने छोटे भाई को क्यों नहीं दी मुखाग्नि? सामने आई असली वजह! लखनऊ के बैकुंठ धाम में प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार के दौरान एक ऐसा सवाल उठा जिसने सबको हैरान कर दिया।
#PrateekYadav #AkhileshYadav #AparnaYadav #YadavFamily #LastRites #ArvindSinghBisht

~HT.504~PR.514~

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Transcript
00:04लखनव के बैकुंट धाम में 14 माई को सिर्फ एक अंतिम संसकार नहीं हो रहा था
00:09बल्कि एक ऐसा भावुक दृश्य सामने था जिसने हर किसी को अंदर तक जग छोड़ दिया
00:14पती के आदव अब पंच ततों में विलीन हो चुके हैं
00:18लेकिन उनकी अंतिम यातरा के दौरान जो तस्वीरे सामने आई उन्होंने लोगों के मन में कई सवाल भी खड़े कर
00:23दिये
00:24सबसे बड़ा सवाल यही था जब पूरे परिवार के साथ अखिलेश यादव खुद शमशान घाट पहुँचे हुए थे
00:30मौजूद थे तो फिर उन्होंने अपने छोटे भाई को मुखागनी क्यों नहीं दी क्या दोनों भाईयों के रिष्टे ठीक नहीं
00:37थे क्या परिवार में दूर्या थी या इसके पीछे कोई और वज्जह थी
00:42आज के इस एक्स्प्लेनर में हम आपको पांच बड़े पॉइंट्स में पूरी कहानी समझाएंगे
00:46हम आपको प्रतीक और अपढ़ना यादव की लव स्टोडी से लेकर अखिलेश यादव ने मुखागनी क्यों नहीं दी यहां तक
00:52की पूरी कहानी बताएंगे
00:53साथ ही अंतिम यात्रा के उन भावुक पलों को भी दिखाएंगे जिन्होंने हर किसी को रुला दिया नमस्कार मेरा नाम
01:00है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी
01:08प्रतीक यादव को जिसने मुखागनी दी उनका नाम है अरविंद सिंग बिष्ट तो यहीं से शुरुवात करते हैं कि कौन
01:15है अरविंद सिंग बिष्ट जिन्होंने मुखागनी दी
01:17शिम्शान घाट में सबसे ज्यादा चर्चा जिस चहरे की हुई वो थे अरविंद सिंग बिष्ट वही अरविंद सिंग बिष्ट जिन्होंने
01:24अपने दामाद प्रतीक यादव को मुखागनी दी यानि कि अरविंद सिंग बिष्ट जो है अपढ़ना यादव के पिता है प
01:45में सूचना युक्त भी बने लेकिन मुलायम परिवार से उनका रिष्टा सर्फ समधी वाला नहीं था करीबी बताते हैं कि
01:52शादी के बाद उनका रिष्टा मुलायम सिंगी यादों से बेहत दोस्ताना हो गया था वहीं प्रतीक यादों को वह हमेशा
01:58बेटे जैसा मानते थे �
01:59यही वज़े थी कि जब अंतिम सल्सकार का वक्त आया तो परिवार की सहमती से उन्होंने अपने दामाद को मुखागनी
02:05दी।
02:05शमशान घाट में वो लगातार परिवार के साथ खड़े रहें कभी अपना यादों को संभालते दिखे तो कभी रोती हुई
02:11नातिनों को शांत कराते नजर आए
02:13चले इसके बाद आपको बताते हैं कि प्रतीक और अपना यादों की लव स्रोरी क्या है क्योंकि ससुर तो बाद
02:19में फ्रेम में आये
02:20पहले तो इन दोनों की प्रेम कहानी हुई, शादी हुई जिसके बाद अरविन सिंग बिष्ठ प्रतीक यादों के ससुर बने
02:26है
02:26तो प्रतीक यादव और अपढ़ना यादव की कहानी राजनीती से ज्यादा दोस्ती और भरोसी की कहानी माने जाती है
02:32अरविन सिंग बिश्ट ने खुद बताया था एक बार दोनों की पहली मुलकात साधना गुपता के जन्मदिन समारोह में हुई
02:38थी
02:38ये कारेकरम लखनव के क्लाक्स अवद होटल में हुआ था इसे दिन दोनों पहली बार मिले और यहीं से दोस्ती
02:45की शुरूआत हुई
02:46पताया जाता है कि उस कारेकरम में अपढ़ना को छोड़ने को दर्विन सिंग बिश्ट गए थे वो भी वहां मौझूद
02:51थे कारेकरम में
02:52बाद में अपढ़ना पढ़ाई के लिए विदेश चली गए लेकिन दोनों के बीच बातचीत जारी रही
02:57दिरे दिरे दोस्ती प्यार में बदल गई फिर 2010 में दोनों परिवारों ने सगाई का फैसला किया
03:02और 2011 में प्रतीक और अपढ़ना शादी के बंधर में बंद गए
03:07राजनीती से दूर रहने वारे प्रतीक हमेशा अपढ़ना के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम माने जाते थे
03:13जब अपढ़ना ने राजनीती में कदम रखा और भाजबा जोईन की खास करके
03:17तब ही प्रतीक ने कभी सारवजनिक तोर पर किसी विवाद में खुद को नहीं डाला
03:21प्रीच में दोनों के बीच और अलग हुने की खबरे आई तला की बाते चल रही थी पर बच्चियों के
03:25लिए दोनों हमेशा मिला करते थे
03:27वक्यूशन्स पर जाया करते थे
03:29करीबी ये भी बताते हैं कि दोनों के बीच का रिष्टा बेहद मजबूर था और यही वजह थी कि अंतिम्यात्रा
03:34के दौरान अपढ़ना यादो पूरी तरह से तूट चुकी थी
03:38वो कई बार बिलख बिलख कर रोती नजर आए
03:40आखिर कैसे थे प्रतीक यादो
03:42हलागी प्रतीक यादो मुलायम सिंग यादा और साधना गुपता के बेटे थे लेकिन उन्होंने हमेशा राजुनीती से दूरी बना कर
03:49रखी
03:49उनका जुकाव फिटनेस और बिजनेस के तरफ जियादा था
03:52उन्होंने युनाइटेड केंग्डम की उनिवर्सिटी ओफ लीड्स में पढ़ाई की
03:55भरत लोटने के बाद लखनव में आधुनिक जिम शुरू किया
03:59कहा जाता है कि लखनव में आधुनिक फिटनेस कल्चर को लोग प्रिया बनाने वालों में प्रतिक यादों का बड़ा योगदान
04:05था
04:06वो बॉड़ी बिल्डिंग और हिल्थ को लेकर बहत गंभीर रहते थे
04:09लेकिन कुरोना में हमारी के बाद उनकी तबियत लगतार बिगड़ती गई
04:13करीबी लोगों के मुताबिक कोविट के बाद उनकी शारीरिक और मांसिक स्तिथी दोनों प्रभावित हो
04:19फिर माता-पिता के निधन ने भी उन्हें भीतर तक तोड़ दिया
04:23वो कई बार अस्पताल में भरती भी हुए
04:26हलाकि बाहर से हमेशा शांत और फिट दिखने वाले प्रतीक अंदरी अंदर गंभीर बिमारी से जूँच रहते
04:34टॉक्टरों के मुताबिक उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिस्म था
04:37जिसमें खून का थक्का फेफडों तक पहुँचकर ब्लड सर्कूरेशन रोग देता है
04:42जिसके बाद अब उस सवाल की बात करते हैं जिस पर हमने ये पूरा एपिसोड कर शुरू किया था
04:47अखिलेश यादव ने मुखागनी क्यों नहीं दी
04:49यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल बन गया है
04:52सोशल मीडिया पर कई लोग बूच रहे थे क्या अखिलेश यादव को अपने भाई से लगाव नहीं था
04:56क्या परिवार में दूर्या थी
04:58लेकिन शुम्शान घाट से आई तस्वीरे तो कुछ और ही कहानी बता रही थी
05:01पूरे अंतिम संसकार के दौरान अखिलेश यादव लगतार परिवार के साथ खड़े दिखाई दिये
05:05कभी वो अपढ़ना को संभालते दिखे तो कभी रोती हुई बच्चियों को चुपकर आते दिखे
05:09तो कभी जो पृतिक यादव की छोटी बेटी है उन्हें संभालते दिख रहे थे जब वो परिवार को
05:17तो तूट और दूरी का सवाल कहां से आता है
05:24करिवी सुत्रों के मुताबिक परिवार की आपसी सहमती से अर्विंद सिंग बिष्ट ने मुखागनी दी जिसका कारण हम आपको पहले
05:30बता चुके है
05:30क्योंकि अपढ़ना उनकी बेटी थी और प्रती को वो दामाद से ज्यादा बेटे के तौर पर मानते थे
05:36और उनका रिष्टा बेहद भवनात्मक था बहुत थी खास लगाओ था
05:41धार्मिक मानेताओ के अनुसार भी अगर परिवार सहमत हो तो ससुर दमाद को मुखागनी दे सकता है
05:45काशी के विद्वानों के मुताविक हिंदु धर में अन्तित संसकार की परंपराएं अलग-अलग परिवारों से भिन हो सकती है
05:51ऐसे में विवात या दूरी से जोड़ कर देखना सही नहीं माना जा रहा
05:55और अन्तिम यात्रा का सबसे भावुपल
05:57बैकुंट धाम में उस वक्त महौल पुरी तरह गमगीन हो गया
06:01जब प्रतीक यादों की बेटी अपने पिता के पार्थिव शरीर के सामने फूट-फूट कर रोने लगी
06:06वो बार-बार अपने पिता को देख रही थी
06:08उसे यकीन नहीं हो रहा था
06:10मानों की उसके पिता वापस नहीं आएंगे
06:12वहीं अपढ़ना यादों भी कई वार खुद को संभाल नहीं पाई
06:16करीबी रिष्टेदार लगतार उन्हें धांडस बंधाते रहे
06:19शव वहन पर प्रतीक यादों की अपने पालतु को तो और बंदर के साथ तस्वीर लगी थी
06:23यह तस्वीर देखकर भी कई लोग भावुख हो गये
06:25क्योंकि प्रतीक को जानवरों से बहत प्यार था
06:28सपाका रेले के बाहर भी पार्थिप शरीड को कुछ दे रखा गया
06:31जहानेताओं और कारेकरताओं ने नमाखों से श्रधान चली थी
06:3538 साल की उंभ में प्रतीक यादों का यूँ अचानक चले जाना
06:38क्या तो परिवार के लिए ही नहीं
06:39कलकी उतर प्रदेश के लिए भी एक भावुक छण बन गया
06:42और शायद यही वजह है कि बैकुन ट्रधाम से उठता हुआ धुआ
06:45सिर्फ एक उचिता का नहीं था बलकि कैसे शांत नीजी और हसे में
06:49जीवन के अंत का प्रतीक बन गया
06:51जिसे लोग अब हमेशे याद रखेंगे
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