Skip to playerSkip to main content
Trump और Xi Jinping की हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बीच Elon Musk और Tim Cook को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर Trump के China दौरे के पीछे कौन सी बड़ी रणनीति और डील छिपी हुई है। क्या Tesla, Apple और अमेरिका-चीन के कारोबारी रिश्तों को लेकर कोई बड़ा फैसला हुआ? इस वीडियो में जानिए Musk के China कनेक्शन की पूरी कहानी, Trump-Xi बैठक के बड़े संकेत, संभावित बिजनेस डील्स और दुनिया की राजनीति पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण। देखिए पूरी रिपोर्ट, ताज़ा अपडेट और अंतरराष्ट्रीय राजनीति-बिजनेस से जुड़ी हर बड़ी जानकारी।

The Trump-Xi meeting has sparked massive global curiosity after reports linked Elon Musk and top tech leaders to the high-profile China visit. Speculation is growing over whether major business, technology, and geopolitical deals were discussed behind closed doors. Why did Elon Musk reportedly travel alongside discussions involving Trump and China? What role could companies like Tesla and Apple play in the evolving US-China relationship? In this video, we explain the hidden strategy, possible economic deals, political implications, and the global reactions surrounding the Trump China visit. Watch the full report for detailed analysis, breaking updates, and insights into the changing world power dynamics.

#Trump #ElonMusk #XiJinping #China #TrumpChinaVisit #Tesla #USChina #WorldNews #Geopolitics #BreakingNews

~HT.410~ED.520~PR.540~

Category

🗞
News
Transcript
00:00तेजावस साब के पास चलते हैं तेजावस साब अभी मैं इतिहास में थोड़ा जहाग कर देख रहा था तो 54
00:05साल के बाद अमेरिका का कोई राष्टपती अपने देश के रक्षा मंतरी को लेकर चीन पहुचा हुआ है आप इसे
00:11किस तरह से देख रहे हैं ये तो पता है कि प्
00:28निदी मंडल के साथ ले जाने की पीछे कि आपको क्या वजह नजरा रही है देखिए वैबल साब मुझे वाकर
00:37इर्शिया हो रही है जैसा कि मैंने आपको शुर्वात में ही कहा था क्योंकि भारत को जो मैं तो मिलना
00:43चीए था या भारत को जिस तरह से अपनी पूर्ट नित
00:58कारण तो यह है कि चीन कुछ लोगों को लेकर सहज है तो वो पूरे डेलिगेशन में कुछ ऐसे लोगों
01:06को नहीं रखना चाहते थे जिससे कि जो चीनी लोग है वारत कार है वो थोड़े से सहज हो जाए
01:11यही भारत के साथ भी है वारत के कुछ लोगों को भी चीन बसन नही
01:15करता है तो वह अक्सर वहां दौरे पे जाने को एवाइट करते हैं जब कोई शीखर वारता होती है या
01:22बड़े लेवल की वारता हैं होती है पर आप देखिए 15 बड़ी-बड़ी कंपनियों के CEO जा रहे हैं और
01:29वहां पे इसने लेकर जो बोईंग के CEO है या अमाम जो बड़े-
01:45यह कह रहा है कि आप बाकी चीजों पर ध्यान दीजिए रक्षा उत्पादन पर हम ध्यान दे रहे हैं और
01:51चीत की जो भी ज़रुत हैं अमेरिका उनको देगा अमेरिका उनको सप्लाई करेगा जहां भारत के लिए वह कंजूसी करता
02:00है टेक्निलोजी हस्ताम तरण को लेकर ह
02:02जो पावन हन से लेकर जितने भी जो बड़े बड़े जो हमारे प्रोजेक्ट्स हैं उसमें अमरिका ने ना कोई साहे
02:08था कि न वहां जो हमारे जो भारत के जो स्वधिशी हाइटर जैट है उनके इंजन तक वहां देने में
02:15कंजूसी कर रहा है वहीं चीन के लिए अमरिका न
02:30क्योंकि वह उस पूरी जो ग्लोबल सप्लाई चैन का एक बहुत ही एहन भागीदार होकर उब रहा है और अमरिका
02:38की उस पर निर्भरता लगातार और बहुत तीजी से बढ़ रही है और इसलिए आप देखेंगे कि प्रिजिदेंट ट्रम्प के
02:44जो स्वर हैं वो धीरे धीर
02:46नरम पढ़ते जा रहा है पर चीन ने क्योंकि शीखर वारताओं की जो तैयारी होती है वो पांच-छे मैने
02:52पहले से ही शुरू हो जाती है और हम देख रहे हैं कि चीन ने शायद कुछ बाउंडरी लाइन फिक्स
02:57कर देते हैं कि देखिए युनाइटिट स्टीट कुछ ची�
03:14की है कि देखिए अमरीका को यह हक नहीं है कि हमें मांगा दिकार के बारे में पढ़ाएं और सिखाएं
03:20हमें क्या करना है क्या नहीं करना है हमसे बैतर कोई नहीं जानता है चीन के हित किसमें हैं वो
03:26चीन ही बताएगा पर हॉमोज को लेकर या इरान को लेकर कोई उनमें कोई
03:32आकरशन उतकंठा नहीं है और मूलत देखा जाए तो ये एजिंडे का मौक के इससा भी नहीं है उसका जिक्र
03:39जरूर आता है पर जैसे दूसरे मसले हैं वैसे ये मसले जब कि आप देखेंगे कि मीडिया में शोर इस
03:44बात का वरा था कि होमो स्टेट को लेकर क्या बात होगी न
03:59देना जानते हैं और जो स्वाथ के वशिभूत जो विदेश निती या कूट निती का जो संचालन होता है मुझे
04:06लगता है कि चीन और अमेरिका इभी दोनों उसी का परिच्छे दे रहे हैं बेगो साथ बिलकुल और एक डील
04:12की भी बहुत चर्चा हो रहे सिद्धार जी वो
04:27इस तरह की डील हो सकती है दोनों देशों के बीच में अगर इतने ज्यादा संख्या में कारोबारी पहुचे हुए
04:32हैं तो जी आपको बता दो कि दो ही चीज़े हैं जो चीन के पास इस वक्त नहीं हैं जिसको
04:41जिसकी जरूरत उसे दुनिया के दूसरे देशों से या कहें कि
04:44अमेरिका से एक तो है सेमी कंड़क्टर और दूसरे हैं आपके पैसेंजर प्ले सिर्फ ये दो ही चीज़े हैं जिसमें
04:54अमेरिका से चीन पीछे रह जाता है ये डील होना कोई बड़ी बात नहीं है ये एक बिजनस डील है
05:01और इसमें ऐसा कुछ नहीं है इस सिर्फ इंटरन
05:05को बेटर बनाने के लिए है हाँ इसमें अमेरिका के लिए कायदा यह है कि उनके पास इसमें अच्छा घासा
05:12पैसा आ जाएगा और जो यूआन है उसकी तो नामे थोड़ा सा डॉलर और बेटर हो सकता है बहुत ही
05:19मामूली से मामूली से बेनिफिट है अब चुक्छी दुनिय
05:34आपको इतनी बड़ी तादाद में विमान सप्लाय करने से को दुनिया में कहीं भी विमान खरीदा जा रहा होगा इन
05:41दो मैंसे कोई एक कंपनी वोते ही होती है तो ये इसमें इतनी बड़ी डील नहीं है अगर सेमि कंड़क्टर
05:48पर कोई डील होती है स्टेट औफ फॉर्म�
06:03का क्या डील करके लोटता अभी ट्रम्प का भाशन क्योंकि वहां पर कुछी देर पहले खत्म हुआ है तो उसका
06:09अब डेट आना भी बाकी है कि आखिर बात क्या-क्या बनी है तो यह सब भी देखने वाली बात
06:15है बाकी बोईंग का जो आप कह रहे हैं मुझे उतनी बड़ी ड
06:31देखा था 2017 में आखरी बार ट्रम गए थे चीन के दौरे पर बतोर अमेरिकी राश्टपती उसके बाद जब अमेरिका
06:36के सत्ता में आ जाते हैं बाइडन जी तो उनका कोई भी दौरा चीन को लेकर नहीं होता है ट्रम्प
06:41के हमने पहले कारकाल में भी देखा था दूसरे कार
06:56चुकी है और अब यहां पर यह पहुचे हुए हैं चीन आपको क्या लगता है कि क्या इन दौरों के
07:03पीछे कि वो क्या वजह रहती होंगी जैसे बाइडन ने ऐसा कुछ करने कोशिश क्यों ने की
07:08कि अधिये ऐसा लगता है यह अलग बात है कि मोधी सहाब प्रिजिडैंट ट्रम के एलेक्शन केमपिननिंग का हिस्सा थे
07:16जो बाद में आप उस
07:37कर अगर वो संख्या बलके अलावा जो पैसों का मामला है वह भारत अंश्यों के पे काफ़ी मैद्पून होता है
07:44तो प्रेजिडेंट ट्रंप वहां से उन लोगों से पैसा भी जाते थे और सपोर्ट तो चाहते थे और उसके लिए
07:49मोधी सहाब जैसा आइकन और कोई वही नही
07:57हैं चाहिए वो किसी भी विचारदारा से उससे मतलब नहीं है पर खरिश्मा ही व्यक्तित्टों के रहे हैं जिसमें हम
08:03जवाहलाल नहरू को हम वैसा देखते हैं या इंद्रा जी का एक समय औरा ऐसा था जब वो अपने पीग
08:09पर थी और वैसा का वैसा दरसा बादी साहब का
08:11है जो कि बहुत ही लोग प्रिया निताओं में होते हैं तो उनका जो लोग प्रियता का प्रिजिदेंट ट्रम्प फाइदा
08:17उठाना चाह रहे थे ऐसा ही उनना ने फाइदा मुस्लिम लीडरों से भी उठाय था मीडियलिस्ट के जो प्रभाव शैली
08:24जो लोग थे जिनका व
08:41और चीन को काफी शंका और डर के साथ देखा जा रहा था अब धीरे धीरे वो खत्म होता जा
08:47रहा है क्योंकि प्रिजिदेंट ट्रम्प की सारी नीतियां जो प्रो प्राकिस्तान से लेकर जो प्रो चैना है वो भारत के
08:54लिए अच्छी खबर नहीं है उनका साफ संदेश है �
08:56या तो हमारे साथ आओ गुलाम बनो चीन के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ो और उसके बाद में गलवान करो और
09:04या फिर आप अपना लड़ते रहें हम हमारा हिट देखेंगे हमें आप से कोई मतलब नहीं है जब बाइडन 2020
09:13में जब आये थी सर उसके बाद फिर चार साल
09:15का उनका कारकाल रहा राष्टपती वाला उस वक्त ऐसा माना जा रहा था क्योंकि ट्रम के आखरी कारकाल पहले कारकाल
09:21के आखरी दोर में चीज़े शुरू हो गई थी कि नया शित्यूद देखने को मिल सकता है हमें जैसे पहले
09:26अमेरिका और सोव्यत संग हुआ करते थे वै
09:42भारत ही एशिया में ऐसी ताकत है जो चीन का मुकाबला कर सकती है फिर चाहे वो संख्या बलके हिसाब
09:47से या संभावना उसके अंदर है एक आर्थिक ताकत भी भविश्य में बन सकती है लेकिन आपको नहीं लगता कि
09:54पिछले कुछ महिनों में सालों में उस नजरिये में ब
10:12चीन और भौरत की तुलना ही नहीं करनी की है इसका कारण जो है कि वो यह देख रहे हैं
10:17कि जो चीन है वो हमसे काफी आगे बाढ़ चुका है अगर असी के दर्शक में अगर यह कहें तो
10:23यह बात नहीं होती थी उस समय यह तुलना होती थी जोर्ज कॉंड़नीच साब का बय
10:29देखिए उस समय यह कहती थी कि हमारा चीन अगर पाकिस्तान से भी ज्यादा मैदपूर्ण हमारे लिए एक्रति होगी है
10:36उस समय ऐसे बयान आते थे अब हमारे पास पैसा ही नहीं है हम चीन को कैसे काउंटर करेंगे तो
10:44आपने बहुत बड़ी गल्टियां की है अपने दे�
10:58यह चला गया था और हम काली यह दक्शिन पंथियों और वाम पंथियों को मनाने में लग रहे थे दक्षिन
11:03पंथी और वाम पंथि दोनों बंदी
11:19से उसने अपने यहाँ पे जिस तेजी से प्रोडक्शन और इंडिसलाइजेशन शुरू किया भारत भी उसका हक्तार था दूसरी बात
11:27यह कि आर्थिक सुदार जो उपली तोर पे सिंग साहब ने किये थे उसके बाद में आप देखेंगे कि जो
11:34आर्थिक सुदार खासतर घरे
11:49हम लोग पहुंच गए थे और बाद में अंदर के सुदार आप जब तक नहीं करेंगे आप अपने समाज को
11:55नई दुनिया के लिए तयार नहीं करेंगे तब तक नहीं होगा आप देखिए न अभी प्रेजिडेंट ट्रम्प और श्री जिन
12:00पिंग में कोई फ़र्ट नजर �
12:09जैसे कि भारत के लोग पूर्ता और पाजामा पैन के और उस पर कोटी डाल के जाते हैं उससे भी
12:14आपको अंदाज लगेगा कि भारत और चीन के समाज में फर्क क्या है मूलत तो वो वो नहीं कर रहे
12:20हैं जैसे कि मिडल इसके लोग अपने वो पगड़ी और वो सब कुछ कर
12:24कि वो पूरी तरीके से चाइनीज मॉडनाईज हो चुका है और भारत में अभी तक यह हैं बहुत सारी चीजें
12:29तो यह हैं मैं अपनी बात बहुत जल्ब खर्म करना चाहूंगा क्योंकि यह विशेट से थोड़ा विशेटर है भारत में
12:35एक फैसला होने में चार-पांस साल �
12:38इसलिए लग जाते हैं कि आपका जो प्रोसीश्रल डिले हो रहा है वोट को नीने लेने में समय नहीं लग
12:44रहा है कि यह क्या सही है या क्या गलत है आप और इसका काम कौन करेगा पार्लेमेंट करेगी इसी
12:49तरीके से जिस तरीके के सिफारसी लोग आ रहें इनकॉंपिटें
13:05तो वो एक research scholar की थी उसने research करके बताया था कि हो सकता है कि उसामा बिन लादेन
13:11क्वीटा में हो तो जिस तरीके का इस तरीके से gap रहेगा जिस तरीके से संथादनों के बरवादियों की रहेगी
13:17हरत एक महानरास्ट नहीं बन सकता है
13:20अब मैं वापस अपनी बात पर लोटता हूँ जो विदेशनीती से संबन देता है जी दरसल अमरीका से दोस्ती की
13:28कीमत भारत ने बहुत कुछ अदा की है हमने गलवान कराया क्योंकि इतने दिन तक राजीर जी के समय से
13:3420 साल तक हमारा पूरा वो border डिस्टरब नहीं रहा इसका
13:38कारण ये था कि हमने कहीं न कहीं चीन के साथ ये अंडरस्टैंडिंग बना रखी थी कि जो भारत है
13:44वो प्रो अमेरिका तो बिल्कुल भी नहीं है जब ये भ्राम टूटा तो चीन ने एक साफ साफ संदेश दिया
13:49और गलवान उसी का एक तरीके का कहना चाहिए कि दंश है ह
13:54हम उसके लिए बिल्कुल भी तयार नहीं थे जब की तयारी होनी चाहिए आप जब खत्रों से खेल रहे हैं
13:59जब उनके खिलाफ खेमे में जा रहे हैं तो आपको अपने बोर्डर को पहले देख लेना चाहिए वो दुरस्त कर
14:05लेना चाहिए भारत नहीं किया और एक दोस्त �
14:08जब अमरीका ने देखा कि गलवान होने के बाद भारत वापस संतुलित निती अपना रहा है वो अमरीका की तरह
14:15या उसके खेमे में बिल्कुल आना पसंद नहीं कर रहा है तो फिर अमरीका ने एक अलगी निती अपना ही
14:22और उसने भारत को पहले कंट्रोल करना शुरू किय
14:25और जब भारत कंट्रोल नहीं हुआ तो उसने पाकिस्तान को सपोर्ट करना और जो तमाम चीज़े हैं तो उसमें एक
14:32खास तरीके की जो पॉलिसी शिफ्ट है वो पेशने को मिल रहा है भारत के लिए अभी भी समय है
14:38जैसा कि औरंचेव के मरने के बाद में हम लोग कहते थे
14:41कि जो शुरुवाती मुगलों के पास भारत को संबालने का वक्त था अगर भारत अपने आंत्रिक विभादों और अंदर के
14:50परिशानियों से उसमें समय रहते हुए अपना ठीक से विकास नहीं किया तो मुझे लगता है कि विश्व युद्द से
14:58पहले जो पॉलिड के आलत
15:11सब्सक्र अपना
Comments

Recommended