00:00तेजावस साब के पास चलते हैं तेजावस साब अभी मैं इतिहास में थोड़ा जहाग कर देख रहा था तो 54
00:05साल के बाद अमेरिका का कोई राष्टपती अपने देश के रक्षा मंतरी को लेकर चीन पहुचा हुआ है आप इसे
00:11किस तरह से देख रहे हैं ये तो पता है कि प्
00:28निदी मंडल के साथ ले जाने की पीछे कि आपको क्या वजह नजरा रही है देखिए वैबल साब मुझे वाकर
00:37इर्शिया हो रही है जैसा कि मैंने आपको शुर्वात में ही कहा था क्योंकि भारत को जो मैं तो मिलना
00:43चीए था या भारत को जिस तरह से अपनी पूर्ट नित
00:58कारण तो यह है कि चीन कुछ लोगों को लेकर सहज है तो वो पूरे डेलिगेशन में कुछ ऐसे लोगों
01:06को नहीं रखना चाहते थे जिससे कि जो चीनी लोग है वारत कार है वो थोड़े से सहज हो जाए
01:11यही भारत के साथ भी है वारत के कुछ लोगों को भी चीन बसन नही
01:15करता है तो वह अक्सर वहां दौरे पे जाने को एवाइट करते हैं जब कोई शीखर वारता होती है या
01:22बड़े लेवल की वारता हैं होती है पर आप देखिए 15 बड़ी-बड़ी कंपनियों के CEO जा रहे हैं और
01:29वहां पे इसने लेकर जो बोईंग के CEO है या अमाम जो बड़े-
01:45यह कह रहा है कि आप बाकी चीजों पर ध्यान दीजिए रक्षा उत्पादन पर हम ध्यान दे रहे हैं और
01:51चीत की जो भी ज़रुत हैं अमेरिका उनको देगा अमेरिका उनको सप्लाई करेगा जहां भारत के लिए वह कंजूसी करता
02:00है टेक्निलोजी हस्ताम तरण को लेकर ह
02:02जो पावन हन से लेकर जितने भी जो बड़े बड़े जो हमारे प्रोजेक्ट्स हैं उसमें अमरिका ने ना कोई साहे
02:08था कि न वहां जो हमारे जो भारत के जो स्वधिशी हाइटर जैट है उनके इंजन तक वहां देने में
02:15कंजूसी कर रहा है वहीं चीन के लिए अमरिका न
02:30क्योंकि वह उस पूरी जो ग्लोबल सप्लाई चैन का एक बहुत ही एहन भागीदार होकर उब रहा है और अमरिका
02:38की उस पर निर्भरता लगातार और बहुत तीजी से बढ़ रही है और इसलिए आप देखेंगे कि प्रिजिदेंट ट्रम्प के
02:44जो स्वर हैं वो धीरे धीर
02:46नरम पढ़ते जा रहा है पर चीन ने क्योंकि शीखर वारताओं की जो तैयारी होती है वो पांच-छे मैने
02:52पहले से ही शुरू हो जाती है और हम देख रहे हैं कि चीन ने शायद कुछ बाउंडरी लाइन फिक्स
02:57कर देते हैं कि देखिए युनाइटिट स्टीट कुछ ची�
03:14की है कि देखिए अमरीका को यह हक नहीं है कि हमें मांगा दिकार के बारे में पढ़ाएं और सिखाएं
03:20हमें क्या करना है क्या नहीं करना है हमसे बैतर कोई नहीं जानता है चीन के हित किसमें हैं वो
03:26चीन ही बताएगा पर हॉमोज को लेकर या इरान को लेकर कोई उनमें कोई
03:32आकरशन उतकंठा नहीं है और मूलत देखा जाए तो ये एजिंडे का मौक के इससा भी नहीं है उसका जिक्र
03:39जरूर आता है पर जैसे दूसरे मसले हैं वैसे ये मसले जब कि आप देखेंगे कि मीडिया में शोर इस
03:44बात का वरा था कि होमो स्टेट को लेकर क्या बात होगी न
03:59देना जानते हैं और जो स्वाथ के वशिभूत जो विदेश निती या कूट निती का जो संचालन होता है मुझे
04:06लगता है कि चीन और अमेरिका इभी दोनों उसी का परिच्छे दे रहे हैं बेगो साथ बिलकुल और एक डील
04:12की भी बहुत चर्चा हो रहे सिद्धार जी वो
04:27इस तरह की डील हो सकती है दोनों देशों के बीच में अगर इतने ज्यादा संख्या में कारोबारी पहुचे हुए
04:32हैं तो जी आपको बता दो कि दो ही चीज़े हैं जो चीन के पास इस वक्त नहीं हैं जिसको
04:41जिसकी जरूरत उसे दुनिया के दूसरे देशों से या कहें कि
04:44अमेरिका से एक तो है सेमी कंड़क्टर और दूसरे हैं आपके पैसेंजर प्ले सिर्फ ये दो ही चीज़े हैं जिसमें
04:54अमेरिका से चीन पीछे रह जाता है ये डील होना कोई बड़ी बात नहीं है ये एक बिजनस डील है
05:01और इसमें ऐसा कुछ नहीं है इस सिर्फ इंटरन
05:05को बेटर बनाने के लिए है हाँ इसमें अमेरिका के लिए कायदा यह है कि उनके पास इसमें अच्छा घासा
05:12पैसा आ जाएगा और जो यूआन है उसकी तो नामे थोड़ा सा डॉलर और बेटर हो सकता है बहुत ही
05:19मामूली से मामूली से बेनिफिट है अब चुक्छी दुनिय
05:34आपको इतनी बड़ी तादाद में विमान सप्लाय करने से को दुनिया में कहीं भी विमान खरीदा जा रहा होगा इन
05:41दो मैंसे कोई एक कंपनी वोते ही होती है तो ये इसमें इतनी बड़ी डील नहीं है अगर सेमि कंड़क्टर
05:48पर कोई डील होती है स्टेट औफ फॉर्म�
06:03का क्या डील करके लोटता अभी ट्रम्प का भाशन क्योंकि वहां पर कुछी देर पहले खत्म हुआ है तो उसका
06:09अब डेट आना भी बाकी है कि आखिर बात क्या-क्या बनी है तो यह सब भी देखने वाली बात
06:15है बाकी बोईंग का जो आप कह रहे हैं मुझे उतनी बड़ी ड
06:31देखा था 2017 में आखरी बार ट्रम गए थे चीन के दौरे पर बतोर अमेरिकी राश्टपती उसके बाद जब अमेरिका
06:36के सत्ता में आ जाते हैं बाइडन जी तो उनका कोई भी दौरा चीन को लेकर नहीं होता है ट्रम्प
06:41के हमने पहले कारकाल में भी देखा था दूसरे कार
06:56चुकी है और अब यहां पर यह पहुचे हुए हैं चीन आपको क्या लगता है कि क्या इन दौरों के
07:03पीछे कि वो क्या वजह रहती होंगी जैसे बाइडन ने ऐसा कुछ करने कोशिश क्यों ने की
07:08कि अधिये ऐसा लगता है यह अलग बात है कि मोधी सहाब प्रिजिडैंट ट्रम के एलेक्शन केमपिननिंग का हिस्सा थे
07:16जो बाद में आप उस
07:37कर अगर वो संख्या बलके अलावा जो पैसों का मामला है वह भारत अंश्यों के पे काफ़ी मैद्पून होता है
07:44तो प्रेजिडेंट ट्रंप वहां से उन लोगों से पैसा भी जाते थे और सपोर्ट तो चाहते थे और उसके लिए
07:49मोधी सहाब जैसा आइकन और कोई वही नही
07:57हैं चाहिए वो किसी भी विचारदारा से उससे मतलब नहीं है पर खरिश्मा ही व्यक्तित्टों के रहे हैं जिसमें हम
08:03जवाहलाल नहरू को हम वैसा देखते हैं या इंद्रा जी का एक समय औरा ऐसा था जब वो अपने पीग
08:09पर थी और वैसा का वैसा दरसा बादी साहब का
08:11है जो कि बहुत ही लोग प्रिया निताओं में होते हैं तो उनका जो लोग प्रियता का प्रिजिदेंट ट्रम्प फाइदा
08:17उठाना चाह रहे थे ऐसा ही उनना ने फाइदा मुस्लिम लीडरों से भी उठाय था मीडियलिस्ट के जो प्रभाव शैली
08:24जो लोग थे जिनका व
08:41और चीन को काफी शंका और डर के साथ देखा जा रहा था अब धीरे धीरे वो खत्म होता जा
08:47रहा है क्योंकि प्रिजिदेंट ट्रम्प की सारी नीतियां जो प्रो प्राकिस्तान से लेकर जो प्रो चैना है वो भारत के
08:54लिए अच्छी खबर नहीं है उनका साफ संदेश है �
08:56या तो हमारे साथ आओ गुलाम बनो चीन के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ो और उसके बाद में गलवान करो और
09:04या फिर आप अपना लड़ते रहें हम हमारा हिट देखेंगे हमें आप से कोई मतलब नहीं है जब बाइडन 2020
09:13में जब आये थी सर उसके बाद फिर चार साल
09:15का उनका कारकाल रहा राष्टपती वाला उस वक्त ऐसा माना जा रहा था क्योंकि ट्रम के आखरी कारकाल पहले कारकाल
09:21के आखरी दोर में चीज़े शुरू हो गई थी कि नया शित्यूद देखने को मिल सकता है हमें जैसे पहले
09:26अमेरिका और सोव्यत संग हुआ करते थे वै
09:42भारत ही एशिया में ऐसी ताकत है जो चीन का मुकाबला कर सकती है फिर चाहे वो संख्या बलके हिसाब
09:47से या संभावना उसके अंदर है एक आर्थिक ताकत भी भविश्य में बन सकती है लेकिन आपको नहीं लगता कि
09:54पिछले कुछ महिनों में सालों में उस नजरिये में ब
10:12चीन और भौरत की तुलना ही नहीं करनी की है इसका कारण जो है कि वो यह देख रहे हैं
10:17कि जो चीन है वो हमसे काफी आगे बाढ़ चुका है अगर असी के दर्शक में अगर यह कहें तो
10:23यह बात नहीं होती थी उस समय यह तुलना होती थी जोर्ज कॉंड़नीच साब का बय
10:29देखिए उस समय यह कहती थी कि हमारा चीन अगर पाकिस्तान से भी ज्यादा मैदपूर्ण हमारे लिए एक्रति होगी है
10:36उस समय ऐसे बयान आते थे अब हमारे पास पैसा ही नहीं है हम चीन को कैसे काउंटर करेंगे तो
10:44आपने बहुत बड़ी गल्टियां की है अपने दे�
10:58यह चला गया था और हम काली यह दक्शिन पंथियों और वाम पंथियों को मनाने में लग रहे थे दक्षिन
11:03पंथी और वाम पंथि दोनों बंदी
11:19से उसने अपने यहाँ पे जिस तेजी से प्रोडक्शन और इंडिसलाइजेशन शुरू किया भारत भी उसका हक्तार था दूसरी बात
11:27यह कि आर्थिक सुदार जो उपली तोर पे सिंग साहब ने किये थे उसके बाद में आप देखेंगे कि जो
11:34आर्थिक सुदार खासतर घरे
11:49हम लोग पहुंच गए थे और बाद में अंदर के सुदार आप जब तक नहीं करेंगे आप अपने समाज को
11:55नई दुनिया के लिए तयार नहीं करेंगे तब तक नहीं होगा आप देखिए न अभी प्रेजिडेंट ट्रम्प और श्री जिन
12:00पिंग में कोई फ़र्ट नजर �
12:09जैसे कि भारत के लोग पूर्ता और पाजामा पैन के और उस पर कोटी डाल के जाते हैं उससे भी
12:14आपको अंदाज लगेगा कि भारत और चीन के समाज में फर्क क्या है मूलत तो वो वो नहीं कर रहे
12:20हैं जैसे कि मिडल इसके लोग अपने वो पगड़ी और वो सब कुछ कर
12:24कि वो पूरी तरीके से चाइनीज मॉडनाईज हो चुका है और भारत में अभी तक यह हैं बहुत सारी चीजें
12:29तो यह हैं मैं अपनी बात बहुत जल्ब खर्म करना चाहूंगा क्योंकि यह विशेट से थोड़ा विशेटर है भारत में
12:35एक फैसला होने में चार-पांस साल �
12:38इसलिए लग जाते हैं कि आपका जो प्रोसीश्रल डिले हो रहा है वोट को नीने लेने में समय नहीं लग
12:44रहा है कि यह क्या सही है या क्या गलत है आप और इसका काम कौन करेगा पार्लेमेंट करेगी इसी
12:49तरीके से जिस तरीके के सिफारसी लोग आ रहें इनकॉंपिटें
13:05तो वो एक research scholar की थी उसने research करके बताया था कि हो सकता है कि उसामा बिन लादेन
13:11क्वीटा में हो तो जिस तरीके का इस तरीके से gap रहेगा जिस तरीके से संथादनों के बरवादियों की रहेगी
13:17हरत एक महानरास्ट नहीं बन सकता है
13:20अब मैं वापस अपनी बात पर लोटता हूँ जो विदेशनीती से संबन देता है जी दरसल अमरीका से दोस्ती की
13:28कीमत भारत ने बहुत कुछ अदा की है हमने गलवान कराया क्योंकि इतने दिन तक राजीर जी के समय से
13:3420 साल तक हमारा पूरा वो border डिस्टरब नहीं रहा इसका
13:38कारण ये था कि हमने कहीं न कहीं चीन के साथ ये अंडरस्टैंडिंग बना रखी थी कि जो भारत है
13:44वो प्रो अमेरिका तो बिल्कुल भी नहीं है जब ये भ्राम टूटा तो चीन ने एक साफ साफ संदेश दिया
13:49और गलवान उसी का एक तरीके का कहना चाहिए कि दंश है ह
13:54हम उसके लिए बिल्कुल भी तयार नहीं थे जब की तयारी होनी चाहिए आप जब खत्रों से खेल रहे हैं
13:59जब उनके खिलाफ खेमे में जा रहे हैं तो आपको अपने बोर्डर को पहले देख लेना चाहिए वो दुरस्त कर
14:05लेना चाहिए भारत नहीं किया और एक दोस्त �
14:08जब अमरीका ने देखा कि गलवान होने के बाद भारत वापस संतुलित निती अपना रहा है वो अमरीका की तरह
14:15या उसके खेमे में बिल्कुल आना पसंद नहीं कर रहा है तो फिर अमरीका ने एक अलगी निती अपना ही
14:22और उसने भारत को पहले कंट्रोल करना शुरू किय
14:25और जब भारत कंट्रोल नहीं हुआ तो उसने पाकिस्तान को सपोर्ट करना और जो तमाम चीज़े हैं तो उसमें एक
14:32खास तरीके की जो पॉलिसी शिफ्ट है वो पेशने को मिल रहा है भारत के लिए अभी भी समय है
14:38जैसा कि औरंचेव के मरने के बाद में हम लोग कहते थे
14:41कि जो शुरुवाती मुगलों के पास भारत को संबालने का वक्त था अगर भारत अपने आंत्रिक विभादों और अंदर के
14:50परिशानियों से उसमें समय रहते हुए अपना ठीक से विकास नहीं किया तो मुझे लगता है कि विश्व युद्द से
14:58पहले जो पॉलिड के आलत
15:11सब्सक्र अपना
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