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Trump और Xi Jinping की मुलाकात के बाद दुनिया की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। Iran के साथ बढ़ते तनाव के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या America ने China से किसी बड़ी रणनीतिक मदद की मांग की है। Middle East संकट और वैश्विक दबाव के बीच यह बैठक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। इस वीडियो में जानिए Trump-Xi बैठक के पीछे की पूरी कहानी, China की भूमिका, Iran-US तनाव पर संभावित असर और दुनिया भर में हो रही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं। देखिए पूरी रिपोर्ट, ताज़ा अपडेट और वैश्विक कूटनीति का गहराई से विश्लेषण।

The Trump-Xi meeting has fueled global speculation after reports suggested the US may be seeking China’s support amid rising tensions with Iran. As geopolitical pressure increases in the Middle East, questions are being raised about America’s strategic position and China’s growing influence in global diplomacy. What kind of assistance did Donald Trump discuss with Xi Jinping? Could this meeting reshape the balance of power between the US, China, and Iran? In this video, we break down the key developments, diplomatic signals, political reactions, and the possible impact on international relations. Watch the full report for detailed analysis, breaking updates, and global political insights.

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~HT.410~PR.540~ED.520~

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00:00अमेरिकी राश्टपती डोनल्ड ट्रम्प इस वक्ट चीन के दोरे पर है आज चाइना की राज़धानी बीजिंग में उनकी मुलाकात चीनी
00:07चीन राश्टपती श्री जिन पिंग से हुई है इस मुलाकात के दोरान दोनों और से काफी कुछ कहा भी गया
00:13है राश्टपती ट्
00:27उनके साथ 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी भी चीन पहुँचे हुए है जिन में मस्क सामिल है इसके साथ ही टिम
00:34कुक भी गये है और भी बहुत सारे लोग पहुचे हुए है तो ट्रम्प कि इस यात्रा के माइने क्या
00:39है वो चीन में क्या कुछ करने वाले है उनकी जिन पिं�
00:55के राष्टा धक्ष्टो की जब मुलाकात होती है तो उस मुलाकात पर दुनिया भर की नजर होती
01:00है। थो इन सब ही विंदु अपर आज हम बात करने वालों है हमारे साहथ इस बादचीत में दो बेहदी
01:25विश्य निर्धारीत करने वाला है और खासकर भारतियों होने के नाते में इस दौरे को काफी आश्रम का किसा आप
01:33देख रहा हूँ क्योंकि जिस तरीके से प्रेज़िडेंट ट्रंप ने वहाँ पर बयान दिये हैं और पहली बार ऐसा मन
01:39कर रहा है कि प्रेज़िडेंट ट्र
01:53पहां पर बयान दे रहा है काफी जिम्मेदारी के साथ दे रहे हैं और ये बाकी दुनिया के लिए अच्छी
01:57ख़बर नहीं है
01:58क्योंकि अगर अमरीका और चीन के बीच में किसी तरीके का कोई समझोता हो जाता है
02:03तो पाकी काफी दुनिया को ये दोनों की देश मिलके लूटने का प्लान कर सकते हैं
02:10और हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि दोनों देशों की जो अंतर निर्भरता है वो काफी जादा है
02:15वो सोवियत संग और वो जो USA वाला मामला नहीं है कि दोनों के हिट बिलकुल टकराते नहीं थे
02:22इन दोनों के हिट आपस में जोड रहे हैं
02:25चीन जहां सबसे बड़ा प्रोडक्शन करने वाला उत्पादन करने वाला देश है वहीं अमेरिका सबसे बड़ा कंजूम आ रहा है
02:31और वो एक दूर से की सारी ही दरुतों को पूरा करके बागी पूरी दुनिया को इस्टब कर सकते हैं
02:39भारत के लिए एक तरीके से अलामिंग सुच्वेशन है खासकर तब जबकि उसके पड़ों से लेके हर तरफ से चुनोतियां
02:46उसके लिए बिल्कुल सामने आ रही है और अमेरिका ने भी पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए बहुत चुनोतिया
02:54वैदा की यह वैदा की
02:56बिल्कुल सिधार जी के पास चलते हैं सिधार जी जिन्पिंग और ट्रंप दोनों ने बड़े बड़े बयान दिये हैं मुलाकात
03:03के दौरान ट्रंप ने बहुत भरोसे मन साथी बताया है जिन्पिंग को अच्छा दोस्त बताया है और जिन्पिंग ने तो
03:09कह दिया है कि जो
03:25दर्जे के दोगले हैं ये किसी के सगे नहीं है ये सिर्फ अपना फायदा देख रहे हैं जब तक इनका
03:31उल्लू सीधा नहीं होता है तब तक एक दूसरे के दोस्त है और वैसे भी इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कहते हैं
03:37तो बेनेफिट्स वाली बात है अब अगर ज़रा ग
03:55लिक्सन, रोनाल्ड ड्रीगन, बिल क्लिंटन, बराक ओबामा और डोनल्ड ट्रम का ये दूसरा दौरा है तो कि वो दो बार
04:03आये थे, दो बार और भी आये लेकिन इनने ही ज़्यादा लगा के दो बार जाना चाहिए यहां पर एक
04:09चीज़ समझने वाली है कि लग रहा था क
04:13ये मिडिल इस में जो टेंशन चल रही है उसमें चीन कहीं न कहीं इरान को बैकिंग दे रहा है,
04:19सपोर्ट दे रहा है, अभी आप ये देखिए कि बात्चीत होते होते होते होते यहां तक पहुँच गई कि चीन
04:25इस बात पर राजी हो गया कि हां ट्रम्प सही कह रहे हैं कि �
04:29इरान के पास निकले नहीं होना चाहिए, एक पर ऐसे चीन ने मांग लिया है कि ट्रम्प जो कर रहे
04:34हैं, वो सही कर रहे थे, अब ऐसे में क्या होगा कि आप ने जिनको पहले उकसाया लड़ने के लिए,
04:40अब आप उन्हें पीछे उनसे हट रहे हो, यही अमेरिका ने यूक
04:56का करीबी मित्र है, तब ही जाएं, रही बात इनके यह मिल रहे हैं, कैसे देख रहे हैं इसको, इसको
05:04मैं कैसे भी नहीं देख रहा हूँ, इसको मैं ऐसे देख रहा हूँ कि बिजनस डील है, और यह अब
05:09गलोबर पावर बैलेंस जो है, उसको बदलने की तरफ एक कदम है, �
05:14इसमें एक चीज और जो चाइना ने एक तरीके का तमाचा जड़ा है ट्रप के गाल पर वो ये कि
05:21चाइना ने जब शी जिन पिंग बोल रहे थी तो उन्होंने अपने भाशना साफ कह दिया कि ताइवान पर हमें
05:27किसी तरह की दूराय नहीं रखनी चाहिए और ताइवान को ल
05:44उस पर मेरे साथ नहीं है ताइवान के मुद्दे पर तो फिर अगर मेरी आपसे लड़ाई होती है तो मैं
05:50उसमें बहुत ज़्यादा हिचके चाहूंगा नहीं तो यहां पर यह समझने वाली बात है कि जो ट्रॉम्प साब गए हैं
05:56यह कहीं न कहीं अपनी बेज़ती कराने क
05:58इससे पहले भी जो अमेरिकन प्रेसिडेंट के जाने का एक ट्रेंड रहा है उसमें अगर देखा जाए तो बराक उबामा
06:06को अगर सोड़ दे तो सभी प्रेसिडेंट कुछ नहीं कुछ वहां से खोके आए हैं और नहीं तो एक तरीके
06:12से जो लॉटते हैं न किसका स्कूर ज
06:27किया गए उसका रोना आज तक अमेरिका और पूरी दुनिया झेल नहीं इदर आप ताइवान को मतलब अगर आप वन
06:33चाइना पॉलिसी पर एग्री कर गए हो तो फिर ताइवान को हथ्यार क्यों दे रहे हो तो यह सारी चीज़
06:38है इस लिए इस यह जो अभी मुलाका थे द
06:54पूना लगाने वाले हैं उस सबसे जरूरी चीज़ है और यह दोनों लोग ऐसे हैं कि अपने फायदे के लिए
06:59किसी की भी बली देने में चूके गए बिल्कुल तेजावस साब के पास चलते हैं तेजावस साब अभी मैं इतिहास
07:07में थोड़ा जहां कर देख रहा था तो च
07:23प्रत्निदीम अंडल अपने साथ लेकर गए हैं कारोबारियों के आप नाम देखिए एक से बढ़कर एक इलन मस्क हैं टिम
07:28कुक हैं और भी बहुत सारे लोग हैं तो इतना बड़ा दोरा इतने बड़े प्रत्निदीम अंडल के साथ ले जाने
07:33की पीछे कि आपको क्या वज�
07:49पिछले कुछ सालों में करना चाहिए था शायद वैसा दुर्भागे से हो नहीं पा रहा है पर इसमें एक चीज
07:56जो है आपने जिस रक्षा मंतरी का जिक्र किया जो किवा चीन दौरे पे गए है इसका कुछ कारण तो
08:02यह है कि चीन कुछ लोगों को लेकर सहज है मार्क रू
08:19तो आप दौरे पर जाने को करते हैं जब बड़ी लेवल की बड़ी कमपणियों के जिसमें क्यारों की कंपनिया वगरा
08:43ये भी सबस्षा मिला है तो इसलिए रक्षा मंतरी का जाना वहां है क्यूंकि
08:47चीन को अमेरिका ये कह रहा है कि आप बाकी चीज़ों पर ध्यान दीजिए, रक्षा उत्पादन पर हम ध्यान दे
08:54रहे हैं और चीन की जो भी जरुवत हैं, फाइटे जेट से लेके जो भी हैं, अमेरिका उनको देगा, अमेरिका
09:00उनको सप्लाई करेगा, जहां भारत के लिए
09:02वो कंजूसी करता है, टेक्नलोजी हस्तांतरन को लेकर हमारा जो पावन हन से लेकर जितने भी जो बड़े-बड़े जो
09:09हमारे प्रोजेक्ट्स हैं, उसमें अमरिका ने न कोई साहे था कि न वो वहाँ जो हमारे जो भारत के जो
09:16स्वदेशी हाइटर जेट हैं, उनके इंजन
09:30को कोई परिशानी नहीं होगी, इसमें चीन को भी फाइदा है क्योंकि वह पूरी जो ग्लोबल सप्लाइचेन का एक बहुत
09:39ही एहन भागीदार होकर उब रहा है, और अमरीका की उस पर निर्भरता लगातार और बहुत तीजी से बढ़ रही
09:46है, और इसलिए आप देखेंग
09:59कि चीन ने शायद कुछ बाउंडरी लाइन फिक्स कर देते हैं, कि देखिए युनाइटिट स्टीट कुछ चीज़ों पर बिल्कुल बात
10:05नहीं करेगा, जैसे कि खासकर जिदों ने शी जिन पिंग उन्होंने उसका जिक्र भी किया कि ताइवान वाले मसले पे
10:13हम किसी के न
10:27जानता है, चीन के हिद किसमें हैं, वो चीन ही बताएगा, पर हॉमोस को लेकर या इरान को लेकर, कोई
10:35उन में कोई आकरशन उतकांठा नहीं है, और मूलत देखा जाये तो ये एजिन्डे का मुख्य हिस्सा भी नहीं है,
10:41उसका जिक्र जरूर आता है, पर जैसे दूसरे मसल
10:57कि ये दूनों ही हैं, एक दूसरे को उपस उसका केवल फाइदा लेना जानते हैं, और जो स्वार्थ के वशिभूत
11:05जो विदेश निती या कूट निती का जो संचालन होता है, मुझे लगता है कि चीन और अमेरिका भी दोनों
11:12उसी का परिच्छे दे रहे हैं, बिलकुल, औ
11:15और एक डील की भी बहुत चर्चा हो रहे हैं, इससे आप कैसे देख रहे हैं, किस तरह की डील
11:32हो सकती है दोनों देशों के बीच में अगर इतने ज्यादा संख्या में कारोबारी पहुचे हुए हैं तो
11:36जी, पहरा आपको बता दू कि दो ही चीज़े हैं जो चीन के पास इस वक्त नहीं हैं, जिसकी जरूरत
11:46उसे दुनिया के दूसरे देशों से या कहें कि अमेरिका से, एक तो है सेमी कंड़क्टर, और दूसरे हैं आपके
11:55पैसेंजर प्ले, सिर्फ ये दो ही चीज़े हैं जिस
12:06और इसमें ऐसा कुछ नहीं है, इस सिर्फ इंटर्नल ट्रांस्पोर्टेशन को बेतर बनाने के लिए है, हाँ इसमें अमेरिका के
12:13लिए फायदा ये है कि उनके पास इसमें अच्छा घासा पैसा आ जाएगा, और जो यूआन है उसकी तो नामे
12:19थोड़ा सा डॉलर और बेट
12:35आपको इनी दो पर जाना पड़े रहे, इसके लाव कोई तीसरी कंपनी आपको इतनी बड़ी तादाद में विमान सप्लाइ करने
12:41से, दुनिया में कहीं भी विमान खरीदा जा रहा होगा, इन दो मैंसे कोई एक कंपनी वोते ही होती है,
12:48तो ये इसमें इतनी बड़ी डील न
13:05च्छोटी फैक्ट्रियां वहाँ पर है, उनको लेकर अमेरिका क्या डील करके लौटता, अभी टरंप का भाशन क्योंकि वहाँ पर कुछी
13:10देर पहले खत्म हुआ है, तो उसका अपडेट आना भी बाकी है, कि आखिर बात क्या-क्या बनी है, तो
13:17ये सब भी देखने वाली �
13:18बात है बात की बोईंग का जो आप कह रहे हैं, मुझे उतनी बड़ी डील लंग नहीं रही है, बिल्कुल,
13:26अब आते हैं, टरंप जो मुलाकात कर रहे हैं जिन पिंग से और उसके क्या माइने हो सकते हैं, तेजाओ
13:34साब के पास सलते हैं, तेजाओ साब हमने देखा था, 2017 मे
13:36अखरी बार टरंप गए थे चीन के दोरे पर, बतोर अमेरिकी राष्टपती, उसके बाद जब अमेरिका के सत्ता में आज
13:41आते हैं बाइडन जी, तो उनका कोई भी दोरा चीन को लेकर नहीं होता है, टरंप के हमने पहले कारकाल
13:46में भी देखा था, दूसरे कारकाल में भी,
13:48कि वो बहुत ही आप्रत्याशित चीजे करते रहे हैं, उन्होंने नौर्थ कोरिया के जो ताना शाह है, उनसे भी मुलाकात
13:54की थी अपने पहले कारकाल के दौरान, इस कारकाल में वो जाके पुतिन से भी मुलाकात कर चुके हैं, उनकी
14:00बैठक चल चुकी है, और अब यहां �
14:02पर यह पहुचे हुए हैं, चीन, आपको क्या लगता है कि क्या इन दौरों के पीछे कि वो क्या वजह
14:08रहती होंगी, जैसे बाइडन ने ऐसा कुछ करने कोशिश क्यों नहीं की?
14:13देखिए, मुझे ऐसा लगता है, भले यह अलग बात है कि मुदी सहाब प्रिजिदेंट ट्रम के इलेक्शन कैंपिनिंग का हिस्सा
14:19थे, जो बाद में हमें उसके खामियाजा भी बोगतना पड़ा, और दूसरी बार वो उनके इलेक्शन कैंपिनिंग का हिस्सा नहीं
14:27थे, �
14:28जिसका भी खामियाजा, मैं बोगतना पड़ा, वो चाहते थे ऐसा, जी प्रिजिदेंट ट्रम चाहते थे, क्योंकि भारत बंशी अच्छी कासी
14:36संख्या में हैं, और वो डॉनेशन बहुत ज्यादा देते हैं, खासकर अगर, वो संख्या बलके अलावा जो पैसों का मामला
14:44
14:44हैं, वो भी भारत अंशीयों के इन पे काफी मैध्वून होता है, तो प्रिजिदेंट ट्रम वहां से उन लोगों से
14:50पैसा भी जाते थे, और सपोर्ट तो चाहते थे, और उसके लिए मोधी सहब जैसा आइकन और कोई वहीं नहीं
14:57सकता था, क्योंकि भारत में कुछ जो नेत
15:12पर थी, और वैसा का वैसा दरसा बादी साहब का है, जो कि बहुत ही लोग प्रिय निकाओं में होते
15:18हैं, तो उनका जो लोग प्रियता का प्रिजिदेंट ट्रम फाइदा उठाना चाह रहे थे, ऐसा ही उनना ने फाइदा मुस्लिम
15:24लीडरों से भी उठाय था मीडियलिस्�
15:33हमें अच्छे से बता है, तो यह प्रिजिदेंट ट्रम की शैलिये पर भारत के लिए दरसल डेमोक्रेट्स ज्यादा मुफीद पड़ते
15:39हैं, क्योंकि जो बाइडन के समय में भारत से रिस्ते मजबूत करने पे जोड़ दिया जा रहा था, और चीन
15:46को काफी शंका और डर के
15:48साथ देखा जा रहा था, अब धीरे दीरे वो खत्म होता जा रहा है, क्योंकि प्रिजिदेंट ट्रम की सारी नीतियां
15:54जो प्रो प्राकिस्तान से लेकर, जो प्रो चैना है, वो भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है, उनका साफ संदेश
16:00है, या तो हमारे साथ आओ, गुल
16:18उसके बाद फिर चार साल का उनका कारकाल रहा राष्ट पती वाला, उस वक्त ऐसा माना जा रहा था, क्योंकि
16:23ट्रम के आखरी कारकाल, पहले कारकाल के आखरी दोर में चीज़े शुरू हो गई थी, कि नया शित्यूद देखने को
16:28मिल सकता है हमें, जैसे पहले अमेरिका और
16:48चीन का मुकाबला कर सकती है, फिर चाहे वो संख्या बलके हिसाब से या संभावना उसके अंदर है, एक आर्थिक
16:54ताकत भी भविश्य में बन सकती है, लेकिन आपको नहीं लगता कि पिछले कुछ महिनों में ये सालों में उस
17:00नजरिये में बदलाव आ गया है, अब दुनि
17:15है कि चीन और मौरत की तुनना ही नहीं करनी की है, इसका कारण जो है कि वो ये देख
17:21रहे हैं कि जो चीन है वो हमसे काफी आगे बढ़ चुका है, अगर असी के दर्शक में अगर ये
17:27कहें तो ये बात नहीं होती थी, उस समय ये तुनना होती थी, जोर्ज कॉर्णनी साब का
17:31बयान देखिए, अर्थल बियारी साब का बयान देखिए, उस समय ये कहती थी कि हमारा चीन अगर पाकिस्तान से भी
17:38ज़्यादा मैदपूर्ण हमारे लिए एक प्रतिय होगी है, उस समय ऐसे बयान आते थे, अब हमारे इपलोमेट्स कह रहे हैं,
17:45हम चीन को कैसे काउंटर कर
18:01पीछे चला गया था, और हम काली ये दक्षिन पंथियों और वाम पंथियों को मनाने में लग रहे थे, दक्षिन
18:07पंथियों और वाम पंथियों को मनाने में लग रहे थे, दक्षिन पंथियों दोनों पंथियों से गंदा मिलाके, उस जमाने की
18:24सरकार और नितिनियनताओं क
18:27चुलू किया भारत भी उसका हग्तार था दूसरी बात यह कि आर्थिक सुधार जो उपली तोर पे सिंग साहब ने
18:34किये थे उसके बाद में आप देखेंगे कि जो आर्थिक सुधार खासतर घरेलू अर्थ विवस्ता में जो सुधार करने पर
18:43इन्वेस्टमेंट तो बाहर से �
18:44गया उसका आपको फाइदा मिल गया भारत को भी फाइदा मिला ग्रोफ रेट बहुत तेज हो गई हम जानते हैं
18:50बारा तक की भी दो अंकों की ग्रोफ रेट तक हम लोग पहुंच गये थे और बाद में अंदर के
18:55सुधार आप जब तक नहीं करेंगे आप अपने समाज को न
19:12इकल नजर नहीं आते हैं जैसे कि भारत के लोग पूर्ता और पाजामा पैन के और उस पर कोटी डाल
19:17के जाते हैं उससे भी आपको अंदाज लगेगा कि भारत और चीन की समाज में फर्क क्या है मूलत तो
19:23वो नहीं कर रहे हैं जैसे कि मिडल इस के लोग अपने वो पगड�
19:40इसलाम उने में चार-पांस साल इसलिए लग जाते हैं कि आपका जो प्रोसिश्रल डिले हो रहा है वोट को
19:46निर्ने लेने में समय नहीं लग रहा है कि ये क्या सही है या क्या गलत है और इसका काम
19:51कौन करेगा पार्लेमेंट करेगी इसी तरीके से जिस तरीके का भाई भति�
19:55और जिस तरीके के सिफार सी लोग आ रहे हैं इनकॉंपिटेंट लोग आप बताईए कितने युनिवर्सिटीज कितना मदद करती है
20:03पॉलिसी बनाने में कोई नहीं करती है जबकि आप देखेंगे कि उसामा बिन लादेन को पकड़ने में अगर किसी की
20:08मैथू भूमिका थी
20:10तो वो एक रिसर्च स्कॉलर की थी उसना रिसर्च करके बताया था कि हो सकता है कि उसामा बिन लादेन
20:15क्वीटा में हो तो जिस तरीके का इस तरीके से गैप रहेगा जिस तरीके से संथादनों के बरवादियों की रहेगी
20:21भरत एक महानरास्ट नहीं बन सकता है अब मैं वा
20:37आजीव जी के समय से 20 साल तक हमारा पूरा वो बॉर्डर डिस्टरब नहीं रहा इसका कारण ये था कि
20:43हमने कहीं न कहीं चीन के साथ ये अंडरस्टेंडिंग बना रखी थी कि जो भारत है वो प्रो अमेरिका तो
20:49बिल्कुल भी नहीं है जब ये भ्राम टूटा तो चीन ने ए
20:55एक तरीकी का कहना चीए कि दंश है हम उसके लिए बिल्कुल भी तयार नहीं थे जब की तयारी होनी
21:00चाहिए आप जब खत्रों से खेल रहे हैं जब उनके खिलाफ खेमे में जा रहे हैं तो आपको अपने बॉर्डर
21:07को पहले देख लेना चीए वो दुरस्त कर लेना चीए �
21:10भारत ने वह नहीं किया और एक दोस्त फिर जब अमरीका ने देखा कि गलवान होने के बाद भारत वापस
21:16संतुलित निती अपना रहा है वह अमरीका की तरह या उसके खेमे में बिल्कुल आना पसंद नहीं कर रहा है
21:21क्योंकि वह भारत अपना है तो फिर अमरीका ने एक अ
21:39भारत के लिए अर्भी समय है जैसा कि औरंग्चेव के मरने के बाद में हम लोग कहते थे कि जो
21:46शुरुवाती मुगलों के पास भारत को संबालने का वक्त था अगर भारत अपने आंट्रिक विवादों और अंदर के परिशानियों से
21:55उसमें सही समय रहते वे अपना ठीक से
21:59विकास नहीं किया तो मुझे लगता है कि जी थे विश्वयुद से पहले जो पॉलें के आलत की वह कहीं
22:04भारत की नहीं हो जाए कि भारत एक महान रास के रूप में उबरेगा और जी बिलकुल सिद्धार जी के
22:13पास चलते हैं एक और सवाल रूट रहा है
22:15एक सवाल मेरा भी है वहाब तिजवत जी से कि गूट निरपेच होने की हमने हमेशा कीमाच चुकाई है ना
22:22हम कभी एलाइड पावर के हिस्सा रहे ना कभी मैक्सिस्वार के हिस्सा रहे ना हम यूएस असरोड के रहे ना
22:28नैटो के रहे और नतीजह यह रहा कि हम उस कश्म क
22:32कश्मिर कहीं के नहीं रहे चाइना ने बासक पर हम पर हमला किया हम से कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा
22:40चीन लिया अक्साइड चीन चीन लिया उसके बाद भी हम उसकी सरपरस्ती में क्यों जाएं क्यों नहीं जाएं यह सवाल
22:48बहुत अलग चीज है लेकिन हमारा जो गुट निर
23:05अमेरिका किसी जमाने में हमारे खिलाफ अपना पूरा जंगी बेड़ा भेज रहा था उस पर भी भरोसा नहीं किया जा
23:11सकता है
23:11हम मान सकते हैं कि हम एक अलग जगह खड़े हैं हम अपनी पावर पोजिशन स्ट्रॉंग करके बैठें
23:17लेकिन अभी तक ये नहीं समझ पा रहा हूँ या भारत की पॉलिसी नहीं समझ पा रहा हूँ
23:23कि जब कोई बड़ा योद होगा तो क्या हमारे साथ कोई खड़ा होगा
23:30मुश्किल है सिदाची भारत ने बहुत कीमत चुकाई है और इसका कारण हमें पता है
23:36जो हमारा पूरा जो पाकिस्तान अकुपाइट कश्मीर है वो दरसल हमारी गुटनेट पिक्षनिती की ही देने की जब हमारी सेनाएं
23:45लाहूर तक पहुंच गई थी
23:47हम पाक उकुपाइट कश्मीर का समाधान निकाले वगएर हमें पीछे हटना पड़ा क्यूंकि रूस की तरफ से एकदम जो उस
23:54चमाने का युवेसे साथ था उसकी तरफ साफ संदेश था कि ये सास्रीची मान जाये नहीं तो मुश्किल होगा और
24:01वैसा ही जब हमने देखा क
24:03चीन भारत की जो पूरी जमीन को कप जाये तो अमेरिका ने कहा कि हम उसको रोक सकते हैं आपकी
24:09जमीन हम छुड़वा के नहीं देंगे कारण यह कि अमेरिका यह चाहता था कि विवाद बना रहे अगर जमीन वापस
24:15मिल जाती तो विवाद खत्म हो जाता और सब कुछ ठीक ह
24:18हो जाता है तो वो कभी-कभी तो इसलिए भी शर्म आती है कि मैं जब कोरियन की सीडिया चड़ता
24:26हूं तो वहां पे पैंक्यू इंडिया लिखा हुआ होता है क्योंकि 62 पैरलल को शांत करवाने में नेरुजी ने भारती
24:32सोल्जर्स भीजे थे वहां पे और आज देखिए कि
24:35जो साथन कोरिया है वो कहां है LG, Samsung, बड़ी-बड़ी कंपनिया भारत पे एक तरीकी से राज कर रही
24:41है और जो उस चमाने हम है क्योंकि प्रिजिडेंट मिले थे और वह बहुत्तर लोगों के साथ भारत में इस
24:48उमीद में आये थे कि जो मिश्रितार से वस्ता है उसका भी हम
24:52एक्सपेरिमेंट करेंगे ना हम नौत का हिसा रहेंगे ना साथन कोरिया का हम एक अलग ही दुनिया तलाशेंगे और वो
24:58लोग भारत आयते हैं वो भारत के उस चमाने के वहभव को याद करते हैं तब देश नया नया आजा
25:04दुआ था और आज अब फर्द देख लीजिए क
25:07यहां साथन कोरिया कहां पर हैं हम कहां पर हैं और वो हैं तो हमें करना पड़ेगा जनता का इसमें
25:13कोई कसूर नहीं है कारण यह कि हमने सत्ता बदली है दिल्ली में सत्ता बदली थी कॉंग्रेस और बीजेपी के
25:19राज से हटकर एक नहीं सत्ता आई तक्षिन में लोगोंने
25:22सत्ता बदली है और पूरे बिहार और यूपी में उन्होंने नए-ने
25:26राजनितिक दलों को मौका दिया है जनता की कमी नहीं है पर उसको
25:30जो संभालने वाले लीडर है वो एक तो नौकरशाही में इतने
25:34भयानक तरीके से उल्जे हुए है और हमारे समाज में जो
25:37सामन्तवाद है वो इतना हावी है कि यहां का एक साधार
25:42नौकरशाह वो भी अपने आपको किसी छोटे बड़े सामन से अधिक
25:45नहीं समझता है जब यह सब कुछ होगा तो खुले दिमाग में और
25:50खुली बयार में नहीं नीतियां कहां से आएगे और जब नहीं
26:06मीडिया और इंडियन मीडिया के मसलों को ही देख लीजिए जहां
26:10चीन के लिए बड़े-बड़े मसले हैं अमरीका से क्या समझ
26:12होने जिए चांद पर कैसे जाना है या AI को लेकर क्या है भारत में
26:17क्या मुद्दे रहता है मैं गिनाना नहीं चाहता अब बहुत ही
26:20मैं खुद उसका हिसा रहा हूँ टीवी का लंबे समय तर जिस तरीक है कि वहाँ
26:26पर जिन टॉपिक्स पर डिबेट रखते हैं जिन टॉपिक्स पर चर्चा करना चाहते हैं वह वाकिमें हमारी
26:32बताता है दरसल कि आप कहां खड़े हो आज की लिए दूसरी चीज यह है कि चाइना और अमेरिका जिस
26:39स्पीड से चल रहे हैं भारत तो इस स्पीड के आसपास नहीं है सबसे बुरी बात यही है कि जितनी
26:47स्पीड से वो लोग बढ़ रहे हैं हम उसके आसपास नहीं है
26:50development तो आप छोड़ दीजिए कि वो कहां पहुंच गया और वो 50 साल आगे है
26:53इसमें मेरा भी एक सवाल है
26:55सिदार जी एक चीज और मैं तेजावत सर से पूशना चाहूँगा
27:00कि 2035 कहा जा रहा है कि दुनिया का निजाम बदले
27:05क्या दुनिया को एक नई सुपरपावर मिलेगी जो अमेरिका को डॉमिनेट करेगी और वो चायना होगी
27:10ऐसा कहना कहा तक ठीक है
27:13बिल्कुल और मेरा भी चुशन सवाल है तेजावत साहब उसका भी जवाब आप दे दीजेगा
27:17सिधार जिसे भी सवाल का जवाब लेंगे
27:191990 के दौर में ये कहा जा रहा था कि देश में स्थिर सरकार नहीं थी
27:24उस वक्त गडबंधन का दौर आ चुका था
27:2684 में आखरी बार कॉंग्रस को बहुमत मिला था इंद्रा गांधी की मौत के बाद
27:29फिर गडबंधन का दौर आ गया और सरकारे लगातार गिरती रही बनती रही गिरती रही इस वज़ा से देश किसी
27:35स्थिर नेता के हाथ में नहीं रहा
28:00नितिगत गलतियां होती है वैवास आप देखिए हमने जब भी बड़ी चलांग लगाई है कहीं नितियों की बज़े से लगाई
28:06है जैसे कि भारत आई-टी सेक्टर में इतना थाकत पर पहले से नहीं तयार था आपके इसाब से
28:13ठाचा है तो तयार किया जाता है जैसे चीन का तरीका यह होता है कि पहले वह ठाचा तयार करता
28:18है और फिर वह अपना काम करता है भारत की जायतर जो शैली है कि पहले वह काम शुरू करता
28:24है और देरे-देरे ठाचा बनाता है दोनों ही देशों में यह फार्क है जैसे कि इं
28:46खाने हैं
28:51वो थी, वो एसी हमने हरित क्रांती की.
28:58तो जितनी भी भड़ी बड़ी चीज हैं, जिसमें कि आज भारत इतना बड़ा ताकतवर्ग देश बनकर
29:04बनकर ऋब रहा है, और अफ़रीकी देशों के लिए भारत आड़ा का स्रोत हैं,
29:08तो इसका कारण ये है कि हमारे यहां पे निश्चित और एकदम बिल्कुल सुनिश्चित नीतियां थी और वो वे नीतियां
29:15थी जो कि देश को आगे बढ़ाने के लिए थी
29:18पिछले काफी लंबे समय में ऐसी नीतियों का अब हाफ देखने को मिल रहा है और ऐसा लग रहा है
29:23कि जो पुरानी चीज़ें हैं वो वही चलती आ रही है एक चीज मैं काफी जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहता
29:30हूँ और वो यह है पर काफी गंबेर भी हैं कि कुछ पर्टि
29:48एक आकड़े हो तभी उन सब चीजों को ठीक तरीके से साबित किया जा सकेगा और अगर आपके इंस्टिटूशन्स अंदर
29:54से कोकले होते जाएंगे चाहे वो एजुकेशन इंस्टूशन्स हो जुडिश्री हो बहुत सारी तमाम चीज़ें हो तो एक तरीके से
30:03जो एक खुल
30:18आसिदार जी ने भी आपसे एक सवाल किया था आतिजाव साब इसमें एक और चीज़ है कि जो मुफ्त वाली
30:24योजना है चल रही है उनके लिए जो बजट है इस साल का उसका अनुमान है कि चार लाग करोड
30:29से ज्यादा का हो सकता है जिसमें फ्री सस्टिडाइस खाद आपक
30:45प्रोजेक्ट हमने तै किये थे चाहे उसमें पर 13 के जमाने में कहीं इस औरो का बजट हमारा है 14
30:52इसी में इस औरो को सब कुछ करना होता है मिसाइल बनानी है टेस्ट करनी है है एचल का बज़र्ट
30:58देखेंगे तो इस से और कम उमीद की जाती है कि आप फिप्ट जेनरेशन
31:02का एरक्राफ्ट हमें लाग करते हैं बिल्कुल सिद्धार जी की आवाज अभी नहीं आ रही तेजावस साहब आपका क्या मानने
31:13है उन्होंने आपसे सवाल किया था कि चीन को लेकर
31:21तेजावस साब आप मुझे सुन पा रहे हैं तो आपको बता दें कि अभी हम बात कर रहे थे कि
31:29किस तरह से चीन और अमेरिका के बीच में साहिदारियां बढ़ रही है आगे खास कर तब जब टरंप दोरे
31:36पर पहुचे हैं चीन के और बीजिंग में अभी वो इस वक्त हैं �
31:41और उनकी मुलाकात हुई है जिन्पिंग से टरंप अकेले नहीं गए हैं उनके साथ कई सारे कारोबारी गए हैं वो
31:47कारोबारी जो दुनिया के सबसे अमेरि लोगों में शामिल हैं और जिनकी कमपनियों का दबदबा है पूरी दुनिया में वो
31:54भी टरंप के साथ पहुचे
31:56हुए हैं और इसकी वज़ा से भारत को कितना चिंतित होना चाहिए क्योंकि सब
32:00को पता था पिछले कई दश्कों से बाते हो रही थी कि आने वाला जमाना भारत और
32:05चीन का है दुनिया भारत और चीन की ओर ही एक उम्मीद भरी नजरों से देख रही है और
32:10दुनिया को लग रहा था कि इन दोनों के बीच में ही आर्थिक लड़ाई होगी अगली आर्थिक ताकत यही दोनों
32:16होने
32:16वाले हैं लेकिन इस दोर में किस तरह से चीजे बदल रही हैं और हमारे हाथ से भी कई सारी
32:22चीजे जो निकलती जा रही हैं उस पर हम चर्चा कर रहे थे कि किस तरह से हमने मौके गवाए
32:26हैं
32:26सिद्धार जी हमाई साथ फिर से जुड़ चुके हैं उनसे हम सवालों का जवाब लेंगे
32:32लेकिन आपको बता दें कि 2014 के बाद 2014 के चुनाओं में जो लोकसभा का चुनाओं हुआ था
32:38उसमें 30 साल के बाद नरेंड मोधी सरकार को बहुमत मिला
32:42गुजरात के मुखी मंतरी नरेंड मोधी प्रधान मंतरी बनते हैं
32:45वीजेपी को 280 जादा सीटे मिलती हैं उनका जो गडबंधन था उसे 300 जादा सीटे मिलती हैं
32:50बहुमत की सरकार थी कहा गया कि मोधी जी प्रधान मंतरी बने हैं
32:55शोशल मेडिया की युग में, डिजटल युग में और उनका कैंपेन भी पूरी तरह से सोशल मेडिया पराधारी था, जिस
33:00तरह से उन्होंने देश्वासियों से समवात किया था, उसके बाद ये उम्मीदे थी कि इस डिजटल दोड में भारत पीछे
33:07तो नहीं रहने वाला, �
33:08भारत पीछे रहा भी नहीं, भारत ने बहुत सारे ऐसे कदम उठाएं, जैसे कि हमनारा जो यूपी आई है, जो
33:13ऑनलाइन ट्रांजिक्सन वाला मामला है पूरा, उसमें हम दुनिया के अगरनी देशों में शामिल है, दुनिया के कई सारे देशों
33:18है, वो हत्प्रभ होते है
33:19कितने बड़े बाजार में भारत कैसे सुचारू ढंग से ये चीजे कर पा रहा है, लेकिन इसका एक दूसरा पहलू
33:25भी है कि हम 2016-17-18 के बाद से धीरे धीरे जो नई दौर शुरू हुई, उसमें हम पीछे
33:32हो गए, वो दौर थी AI की, क्योंकि उस वक्त ही दुनिया भर की ब
33:47मलाकात हो रही है, उस मलाकात में AI को लेकर भी बड़ी साथेदारी होने की उमीद है, इसी वज़ा से
33:53जैसा कि अभी तजाव साप रता रहे थे, कि उन्हें बहुत ज़्यदा निराशा हो रही है देखकर, कि ये साथेदारी
33:59नई दिल्ली और वाशिंटन के बीच में होनी च
34:17अपनी नीतियों में बदलाओं नहीं कर पाए हैं, क्या ये हमारे लिए सोचने की बात है, क्या हमारे लिए चेंटा
34:22करने की बात है, इस पर हम बाते कर रहे थे, इसके लावाँ आपको बता दे कि कई सारे और
34:27ऐसे मसले हैं, जिन मसलों की वज़ा से भी ये जो है अटरम की �
34:31यात्रा बहुत महत्पूर हो जाती है, उस पर भी हम आएंगे, जिस इदार जी आपको बता रहे थे सर, जो
34:37हमारा बज़ेट है, वो तो हमने रखा है, इतना बड़, है ना, और जो हमारा बज़ेट होना चाहिए था, अच्छी
34:45योजनाव का, जिसमें हमारे एचेल को फंड
34:48करने देना था, इस रोको फंड देना था, डी आइडियों को रिसर्च के लिए देना था, वो रखाया हमने बिल्गुल
34:53जरा सा, कि आप इसी में कमाल कर, यही कारण है कि भारत के पास आज तक अपना फिफ्ट जनरेशन,
35:00फाइटर जैट नहीं है, हम पोर्थ जनरेशन को सा
35:08साड़े चार्ज जनरेशन जैसा कुछ होता नहीं, तो एक तो यह सीधा-सीधा चूना लगाने वाली बात, और यही कारण
35:15है कि हम कंटीनियसली ग्रो करने की वज़ाए पिशडते जारे, सरकार भी खुश है कि ज्यादा विरोध नहीं हो रहा,
35:22सिस्टम भी धीरे-धीरे उस
35:38पूरी दुनिया बढ़ रही ना, वहां उसके आसपास भी नहीं बढ़ रहे हैं, और अगर आप पाकिस्तान से कॉम्टीशन करके
35:45पीट थप थपा रहे हैं, तो हमारे यहां नीट एक्जाम का पेपर लिग हो जाता है, जो कैलिफॉर्निया का एक्जाम
35:55होता है, वहां पर व
35:56लिग हो गया, तो आप ऐसा करके अपनी फीट थप थपा लेते हैं, किसाब पाकिस्तान में अभी हो रहा है,
36:02हम एक एक एक्जाम ढंग से नहीं करा पा रहे हैं, आप चाइना से कॉम्टीशन की बात कर रहे हैं,
36:06हमारी पॉलिसी क्या है, चार सवाल पूछ तो, तो मिनिस्ट
36:22कर स्याएं चल रही है, एक प्रेस conference नहीं होती है, धीरे धीरे ये पै screens के हो चूके है,
36:28कोई सवाल के जवाब नहीं देना चाहता है, तो यह कही की हमें पीछे की तरम धकिर रहा है, अगर
36:34सब कुछ अच्छा चल रहा होता है, तो सरकारे सवाल से बश आज सी क्योंएं, जनक
36:37सब कुछ ठीक नहीं है आपके पास बताने के लिए कुछ अच्छा नहीं है तो आप सबसे अच्छा तरीका है
36:42कि मीडिया को म्यूट करो और मज़े लो बिलकुल आखरी के दो सवाल है पहला सवाल तो थोड़ा रादनीती से
36:49जुड़ा हुआ है तेजावस साहब आप अगर हम �
36:52पिछले 20-35 सालों के भारत के इतिहास को देखें तो कहा जाता है कि UPA की सरकार बनी थी
36:58मनमोहन सिंग का जो पहला कारकाल था उस कारकाल में बहुत अच्छे से काम हुआ था आर्थी गती हमें अच्छी
37:04मिली थी दूसरे कारकाल में जाकर चीजे थोड़ी खराब हुई थी औ
37:21और जिन उमीदों के साथ आये थे वो उमीदे फिर पूरी नहीं हो पाई क्या आपको लगता है कि एक
37:26लंबे अर्से तक एक ही सरकार को एक ही पार्टी को सत्ता में लाते रहना भी एक तरह से खामी
37:32हो सकती है
37:35देखिए विवसा अगर ये कहा जाए कि जो भारती रास्टी कोंगरेस हैं या खासकर जो वहां से लेकर अगर अभी
37:45तक का हम पूरा दौरा करें और हम ये कहें कि कोंगरेस की सरकार बहुत अच्छी थी मन्मौन सिंग साहब
37:51कर समय की और मोदी साहब के समय की सरकार ठीक और �
38:00समानर पता हैटॉ सबकुश तो हैं यह साथ्र संया लाख करण हाए जो लक देता हैं कि अपने �gyu ऊसाफ
38:12से सबस्कूश तोकूश पॉट्टे भी है
38:14चाहे वो कॉंग्रेस हो चाहे वो भारते जंदा पार्टी जो के नेतरत वाली सरकार हो दोने ही जगए यह हो
38:21रहा है
38:21और जो प्रतिभाएं हैं वो लगातार या तो उनको इतना सिमित कर दिया गया है कि वो बोलने की हालत
38:28में नहीं है
38:29और क्योंकि वो एक तरीके से युनाइटेड नहीं है इसलिए उनका लगबग लगबग जुबान बन रहे हैं और बाकी जो
38:36लोग केरिरिस्ट हैं वो चाहे सरकार में हो या कहीं पर भी हो
38:40अपना अच्छा अफसर पाकर अपने मूल विचारों को एक तरफ रख कर वो खाली अपनी लगजरी को एंजॉय कर रहे
38:46हैं और कहीं किसी को रज्यसभा या कभी किसी को तमाम तरीकों से दोनों ही सरकारे लगब करती रही है
38:54जब तक आप पूराने सामन्ती धर्वे का या वो एरिस्ट्रोक्रेसी की तरीके का जो आप शार्षन दिवस्ता नहीं बदलेंगे जब
39:04तक जो इंस्टिटूशन्स में आमुल चुल परिवर्तन नहीं होंगे
39:08कांग्रेस के जमाने में भी कोई बहुत ज़्यादा अच्छे नहीं थे और यही कारण है कि भारती जनता पार्टे जैसे
39:14दलों को स्पेस मिलागर वहां पे सब कुछ ठीक हो रहा होता तो एक फासिवा मतलब जो हम कहना चीए
39:22कि जो जहां सांस्रतिक रास्टवाद तरीके की
39:26कि किसी पार्टी के लिए कोई खास ज़्यादा अफसर था नहीं एक तरीके से उन्होंने वहाद जगे प्रोवाइड कराई है
39:33और उसका खामिया जो भारत को गुगतना पढ़ रहा है वो वैसा ही हो रहा है शुरात में जैसे की
39:38ठीक वैसा ही होता है कि शुरात में हम यह कहत
39:55है वो हमसे काफी आगे वाड़ चुका है और यहीं से हताशा और यहीं से जो आत्म इश्वास के डगमगाने
40:01की शुरात होती है बिल्कुल एक आखरी सवाल तेजाओं साहब इसका जवाब मैं आपसे भी लोंगा फिसिधार जी के पास
40:07चलेंगे पिछले दो अमेरिकी राश
40:24में जब G20 के बैठा कोई थी उस वक्त हुआ आये थे भारत में इस बार आपको क्या उम्मिद लग
40:29रही है आएंगे भी या इस बार स्किप करने वाले हैं
40:36तेजाओ साहब
40:39मुझे लगता नहीं है जिस तरीके से अमरीकी नीतियां है उसके आधार पर ऐसा लगता है कि भारत अभी उनकी
40:45प्राइयोटी में नहीं है खासकर वेस्ट एशिया में जब उसके लिए काफी चैलेंजेज नहीं और रूस और चीन के साथ
40:52एक संतुलित नीती अपनाने की बा
41:06जब जो बाइडन साब आये थे G20 की मीटिंग में तो कोई बहुत बड़ी प्यक्षी वारता है नहीं हुए थी
41:11वो आये थे सीधे प्रदान मंत्री के अप्शारी तरीके से कहना चाहिए कि वो जरूरी थी G20 जैसा बड़ा सम्मिलन
41:21था तो उसमें आना जरूरी था अमरीकन �
41:23जो कंट्री हैड और वो पूरे टाइम रुके भी नहीं वो बाकी नेतां से बहुत जल्दी चले गए थे जबकि
41:29बाकी नेता रुके वे थे हमने टूडो को तो यहीं रोक लिया था उनका प्ले नहीं खराब हो गया था
41:33तो यह भी एक तरीके का संदेश था कैनेडियन लोग
41:53और यहां पर विदेशी उपस्थिती लगबना के बराबर थे पर अब विदेशी ताट्रिया काफी सख्रिया है चाहिए वो अमेरिका हो
42:00चाहिए वो चीज़े बिल्कुल सेधार जी आपका क्या मानना है कारेकाल के तो अब दूसरे तीसरे साल में जाना ही
42:09वाले है ट्रब स
42:20करेंगे क्योंकि वहां पर दो साल के बाद होता है मिट्टर्म एलेक्शन मिट्टर्म एलेक्शन के बाद आपकी ताकत लगबग लगबग
42:27चली जा आपको हर चीज़ में विपक्ष की ज्यादा जरूत पड़ती है हर बल्कुल को पास करवाने के लिए तो
42:34उसके बाद से अम
42:50ऐसे राश्वपती हुए हैं जिन्होंने मिट्टम एलेक्शन जीते हैं और उसके बाद भी अपना कारे जारी रहा अनफॉर्शनेटली ट्रम्प उनमें
42:57से नहीं है अभी के जो आकड़े हैं वो ये कहते हैं कि ट्रम्प अपना मिट्टम एलेक्शन खारने वाले हैं
43:04योकि �
43:04अबंबर में होने वाला है इसी साथ ऐसी इससी में क्या होगा कि दो साल बाद ट्रम्प हो डापस अपनी
43:11मान्द से बाहर निकलेंगे और दुनिया दर्शन करेंगे किरेंगे करेंगे ट्रम्प का भारत ना आना ही बmaleतर होगा
43:32तो उसके बाद पीमोदी ने केनेड़ा जाने से बना कर दो और ये बात भारती ए अ सरकार को भी
43:40पता है कि हम उनको बुलाएंगे तो शायद वो ना आए इसमें ज्यादा बेज़ती हो सकती है तो बुलाएंगे ही
43:47नहीं और वही ज्यादा बहतर होगा क्योंकि दोनों नेताओ
43:50में अब बात उस हद तक हो रही है कि हाँ ठीक है फॉर्मेलिटी टाइप आगे चल कर अगर किसी
43:57तरीके से यह सुलश बाता है हमारे जो काबिल आई आई आई एफेस हैं है ना और बाकी अधिकारी हैं
44:07अगर वो इस चीज़ में सफल रहते हैं कि वो रिलेशन्शिप अमेरि
44:20हैं कि वो भारत नहीं है अगले जो होंगे वो शायद तब की पॉलिसी तब देखी जाएंगे बिल्कुल तेजाव साब
44:27लॉबिंग की भी बात होती है कि वाइट हाउस तक आपको पहुचना है बहुत सारी सरकारों के बारे में कहा
44:31जाता है तो वो बहुत सारे एजंसियों क
44:36की कोशिच करते हैं ऐसा कुछ भी होता है राश्टपती के दौरों को प्रस्तावी दौरों को बनाने के लिए बिल्कुल
44:42होता है यहां तक कि पैसा भी काफी खर्च होता है बारतियों ने बहुत पैसा खर्च किया खासकर जूस लॉबी
44:48पर या जो वहां पे इंडियंज है �
44:51उस पे और खासकर इस्राइल से जो हमारी दोस्ती है कहीं न कहीं अमेरिका में लॉबिंग करने के लिए भी
44:56हम उसका इस्तिमाल करते हैं इसमें कोई दोराय नहीं है और यहां तक भी आरूप लगते हैं कि इलेक्शन में
45:01भी पैसा पहता है जो खासकर जो जितने भी बड़े
45:04देश है वो बाकि दूसरे देशों के इलेक्शन को प्रवाइद करने की कोशिश करता है रूस पे आरूप लगता है
45:10कि अमरिका में पैसा लगा है अमरिका पे आरूप लगता है कि वहां रूस में और तमाम देशों में अपना
45:17रुपया खरश करता है तो यहां कोई बहुत �
45:19बड़ी राजनिती नहीं है और जो सरकार के काफी करीबी जो एक नौकरशा को मैं जानता हूं जिन से मैं
45:26कुछ महीनों पहले मिला था तो उन्होंने भी ये का था कि जो हमारे अडोसी पडोसी है उनमें भी भारत
45:33के जो बहुत सारी जो तमाम संस्थाय हैं वहां के इलेक्शन स
45:49हमारे यहां यह इलीगल है लेकिन अमेरिका में एक एक्ट है फारा इजेंट रेजिस्ट्रेशन एक्ट उसका नाम है और उसके
45:58तएट आप वहां पर वाइट हाउस में पकड़ बनाने के लिए बात करने के लिए अपना ब्रिज बनाने के लिए
46:05आप लॉबिंग कर सकते हैं
46:07company hire कर सकते हैं इसके लिए भारत जो है जो है पब्लिक अफेर्स करके
46:11company है वहां के लोगों को hire करता है और वो हमारी इस सेज़ना help करते हैं
46:16ताकि हम अपने company मजबूत कर सके और इसके अलावा पाकिस्तान है जो
46:21करीब छे फर्म का साहरा लेता है जिसके और टीम वगर ऐसे कई
46:27company है तो फुल छे आदा दर्जन company की मदद लेता है वाइट हाउस में
46:32के लिए तो यह कोई वहां पर आम बात नहीं है और इलीगल नहीं है विल्कुल आ तिजावा साहब आपका
46:39सिदार
46:40जी आपका आप दोनों का बहुत शुक्रिया और इंडिया के साथ जोड़ने के लिए उस चर्चा में भाग लेने के
46:44लिए और मैं दर्शकों को महतपूर बाते
47:02में दो घंटे जो बात हुई है उसमें ये भी विशय थे इसके लावा इस दोरे से भारत पर क्या
47:07परभाव पढ़ सकता है क्योंकि भारत चीन का पडोसी है और लंबे आर्चे से हमारे रिष्टे जो हैं तनावपूर बने
47:13हुए हैं तो इन सब बिंदुओं पर हमने बात की
47:16और फिलाल तक के लिए इतना ही देश-दुनिया की तमाम और खबरों को जानने के लिए आप देखती रहिए
47:20वन इंडिया
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