Skip to playerSkip to main content
  • 4 weeks ago
कर्नाटक का चेन्नापटना शहर टॉय टाउन के नाम से मशहूर है, जहां कभी वीकेंड और दशहरा उत्सव के समय कारीगरों के पास कस्टमर्स की भारी भीड़ देखी जाती थी, लेकिन अब वो नई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और उनकी मुश्किलों की वजह है बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे.वीकेंड और दशहरा त्योहार के दौरान, हर दुकान पर एक दिन में कम से कम 100 ग्राहक आते थे. हर वीकेंड हमारे घरों में त्योहार जैसा होता था. लेकिन अब हम मुश्किल से एक महीने में 100 ग्राहक देख पाते हैं. खिलौनों की दुकानों तक पहुंचने के लिए, यात्रियों को कई किलोमीटर दूर जाकर फिर से वापस आना पड़ता है.  कस्टमर्स के नहीं आने से यहां के कारीगरों को नया बाजार ढूंढना पड़ रहा है. पिछले एक साल से वे नए कस्टमर्स बनाने के लिए अपने खिलौने बेंगलुरु, चेन्नई और दूसरे शहरों में भेज रहे हैं.. लेकिन वहां चीनी खिलौनौं की वजह से उन्हें टफ कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ रहा है.  चन्नापटना में खिलौने बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है. माना जाता है कि फारसी कलाकृतियों से प्रेरित होकर टीपू सुल्तान ने फारसी कारीगरों के बुलाया और स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग दिलवाई.. तब से यहां हाथों से खिलौने बनाए जाते हैं. खिलौनों को रंगने के लिए वेजिटेबल डाई और इकोफ्रेंडली पेंट का इस्तेमाल किया जाता है. इन खिलौनों को 2005 में GI टैग मिला था.. लेकिन नए संकट की वजह से इसकी पहचान पर खतरा पैदा हो गया है और कारीगरों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.  

Category

🗞
News
Comments

Recommended