00:00ुस दिन सचकहों तो मेरा बिल्कुल भी मन नहीं था रूम से बाहर निकलने का बस चुपचा पहटना चाहती थी
00:07लेकिन कभी-कभी जिन्दगी हमें वहां ले जाती है जहां जाने का हम सुचते भी नहीं और उस दिन जैसे
00:16किस्मत मुझे हलका सा धक्का दिया हो और मैं पहु
00:29जैसे दोबारा बुलाए गया था पिछले साल जब मैं यहां आई थी तो इस किले की हालत देखकर मुझे सच
00:38में बहुत दुख हुआ था इतना भवय इतना एतियासी किला लेकिन उसकी दिवारों की हालत देखकर दिल में बस एक
00:47ही खयाल आया था इतनी महान विरासत को संभ
00:50पालना बहुत जडूरी है मैंने उसमें ग्वालियर के कई लोगों से भात भी की थी मैंने उन से कहा था
00:56कि इस किले की मेंटेनस होने चाहिए क्योंकि यह सिरफ पत्थ्रों की इमारत नहीं है यह हमारे इतिहास की घड़कन
01:03है लास्ट टाइम मैं यहां से दुखी होकर गई �
01:07और आज जब मैं दुबारा यहां पूछी तो मुझे कुछ अलग ही दिखाई दिया कहीं पत्थर साफ की जा रहे
01:15थे कहीं दिवारों की म्रम्मत हो रहे थी और कुछ मजूर मंदे के पास काम कर रहे थी उन्हें देखकर
01:22मेरे दिल में उमिच जगी मैं तुरंत उनके पास ग
01:37को इस इतिहासी के लिए की मरमत का काम दिया गया है और अभी मंदिर से काम शुरू हुआ है
01:44धीरे-धीरे पूरा किला ठीक किया जाएगा उनकी यह बात संकर मेरे दिल में एक आजेब से खुशी किल है
01:52दोड़गी क्योंकि दुआ तो दिल से की गए थी और जब आप दिल से
01:57खुले आसमान में मांगते हो तो भगवान को भी आपको देना ही पड़ता है क्योंकि कभी कभी हमारी छोटी सी
02:04उमीद भी सच बन जाती है और उस पर दिल के अंदर एक बहुत खुशी हुई उस खुशी को बातने
02:11के लिए मैं और मेरा युनिवर्स दोनों साथ थे जैसे य
02:18हमारी चिंता बिकार नहीं थी और यहां किले के अंदर एक बहुत खास जगे है विक्रम महल जी हां कहा
02:26जाता है कि इस महल का संबन प्राचीन भारतिये इतिहास से जुड़ा हुआ है इसकी बनावट को देखिए पत्थ्रों की
02:34मजबूत दिवारी पुराने जमाने की महराब
02:47जैसे इतिहास को दीरे दीरे अपनी कहानी सुना रहा हो राजाओं का समय युद्धों की आवाजे और इतिहास के वो
02:56पल जो आज सिर्फ याद बन कर रह गए हैं किले की उचाई से जब आप नीचे देखते हैं तो
03:03पूरा गुवालिय शहर एक खुब सूरत पेंटिंग जै
03:21किले की अंदर चलते हुए कई बार ऐसा लगा जैसे समय यहीं कहीं ठैर गया हो पुराने आगन पत्थ्रों की
03:29सीडिया और वो पेड जो शायद सेकड़ों साल से यहीं खड़े थी आज मुझे समझाया शायद किस्मत मुझे यहां दुबारा
03:38क्यों लाई
03:39लास टाइम मैं यहां से दुखी होकर गए थी जी हां लेकिन इस बार किला धीरे धीरे फिर से सांस
03:44ले रहा था जैसे इतिहास फिर से जाग रहा हो ताकि हम देख सके कि बदलाव संभव है और हम
03:52उस चीज को थोड़ा और गहराई से समझ सकी जो मैं इस किले से वापस जा र
04:09पने इन में हमारे सब विता की कहानिया बस्ती हैं और शायद आज किस्मत मुझे यहां इसलिए भी दुबारा लाई
04:16थी थाकि मैं यह कहानी आप तक पहुंचा सकूंँ अगर आपको गवालियर के लिए कि यह यात्रा पसंद आई हो
04:23तो वीडियो को लाइक शेयर कर्मेंट �
04:25जुरूर करें और जुड़े रहे कैंडी डेली चैनल के साथ क्योंकि हर सफर सिरफ खूमना नहीं होता यहां हर सफर
04:32एक ऐसास बन जाता है जो सीधा दिल से दिल तक उतरता है मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में जैश्री शाम
04:41राधे राधे
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