00:00कभी कभी यूनिवर्स भी में शब्दों की बेडियों में बांदेता है, ना पूरी तरह से चुप रहने देता है, और
00:09ना ही खुल कर बोलने की इजाज़त देता है, अंदर जजबातों का शोर होता है, और बाहर खामोशी का नियम.
00:18यूनिवर्स कहता है, रुको, अभी नहीं, पर दिल हर पल कहना चाहता है, अब नहीं, तो कब, हम बोले तो
00:28बैलेंस भी गड़ता है, ना बोले तो हमारी आत्मा भारी हो जाती है, ये वो दोर है, जहां यूनिवर्स हमारी
00:38प्रिक्षा लेता है, क्या हम शब्दों से जुड़
00:48ूर जब बोलना मना हो तो समझ लेना यूनिवर्स चाहता है कि तुम आवाज नहीं विश्वास बनो
00:57राधे राधे
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