00:00ुछ सफर ऐसे होते हैं जो हम प्लान नहीं करते वो खुद हमें बुलाते हैं जी हाँ और इस बार
00:07मुझे बुलावा आया ग्वालियर की धर्ति से और बंजिल थी द्वारिका नागेश्वरधाम और सोमनात
00:13क्या ये सिर्फ एक यात्र थी या महादेव की कोई लीला हमने शुरुवात की हर्याना के हिसार से दिल्ली की
00:20तरफ बढ़ते हुई रास्ते में दिवारों पर बनी कला जैसे हर चित्र कह रहा था रुको और इस पल को
00:27महसूस करो दिल्ली एयरपोर्ट के अंदर कदम रखते ही �
00:31ऐसे लगा जैसे मैं किसी और ही दुनिया में आ गई हूँ यह सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं था यह एक
00:38चलता फिरता शहर था जैसे ही हम आगे बढ़े यहां दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुचकर हमने सबसे पहले खुब मस्ती की
00:46बहुत सारे फोटो सेशन की वीडियो बना
01:01सबसे पहले बेकरी शोग जहां से आते हुई ताजा ब्रैड और केक की खुश्बू सीधे दिल तक पहुच रही थी
01:08ताज के पिछे सजे केक जैसे हर एक के कह रहा हो मुझे चुनो मैं तुमारे सफर को मिठा बना
01:16दूगा थोड़ा और आगे बढ़े तो कोस्मेटिक्स की �
01:20जहां हर शैल्फ पर रंगों की एक दुनिया सजी हुई थी जीहां लिप्स्टिक, फाउंडेशन, स्किन केर हर चीज जैसे कह
01:28रही थी सिरफ जगों का नहीं होता खुद को स्वारने का भी होता है और फिर परफ्यूम की शोग जहां
01:35हर खुश्बू एक अलग कहानी सुना र
01:47जैसे हर मूर्ति कह रही हो तुम कहीं भी जाओ हम तुमारे साथ हैं वो सिरफ एक शोप नहीं थी
01:54वो एक शान्ती का कोना था और जैसे ही विमान रनवे पर दोड़ने लगा दिल की धड़कने और भी तेज
02:01हो गई एक अजीब सा एकसाइटमेंट और हलका सडर दोनों साथ �
02:06फिर एक पल ऐसा आया जब महीं जमीन से उठे उस पल ऐसा लगा जैसे हम सिरफ आसमान में नहीं
02:14अपनी पुरानी सोच से भी उपर उठ रहे हैं नीचे की जमीन धीरे-धीरे छोटी होती है घर, सडकी, लोग,
02:22सब एक बिंदू जैसे लगने लगे और उपर बस खुला आसम
02:26बादलों के बीट से गुजरते हुए ऐसा मैसुस हुआ जैसे भगवान खुद कह रहे हूं डरों मत मैं हुना उस
02:35पल एक बात समझाई जिन्दगी में उपर उठना है तो नीचे की छोटी-छोटी बातों को छोड़ना ही पड़ेगा फिर
02:43हम सब होटल शिवी गनेश में र�
02:56बविता दिखाई देने लगती है मुचा शांत और दिवय और जैसे जैसे हम अंदर जाते हैं मंदिर की कारीगिरी और
03:04सजावट दिल को छोटी है दिवारों पर बनी नकाशी इतनी बारिक की हर आकरिती जैसे कोई कहानी कह रही हो
03:13चारों तरफ सादगी लेकिन उस सादगी म
03:16एक अलग ही भविता मंदिर का गर्ब रहे जहां शिवलिंग विराजमान है वहां की शांती शप्तों से परे है ऐसा
03:25लगता है जैसे हर दड़कन धिमी हो गई हो और फिर हमें मिला वो पल जिसका हमें इंतिजार था हमने
03:32अपने हातों से जल से रुद्र भिशे किया जब जल
03:36शिवलिंग पर गिर रहा था तो ऐसा लगा जैसे हम अपनी सारी चिंताएं अपने सारे दुख महादेव के चर्णों में
03:44अर्पित कर रहे हो उस पर ना कोई इच्छा थी ना कोई माग बस एक सुकून था अपना पन यहां
03:52हर सांस में ओम नवर्शिवाई गुंसता है और स�
04:06हम सब पहुंचे गुपी तलाप जहां की मिट्टेव की कहानी सुनाती है ऐसा लगा राधाक करिशन का प्रेम आज पी
04:13वई सांस ले रहा है और गोपियों का अनीर्मल प्रेम आज पी जिंधा है नम्बर थीन पर हम पहुंचे रुकमणी
04:20माता मंदिव कहा जाता है कि रुकम
04:35ुर्शी प्रेम के कारण उनका विवा हुआ, विवा के बाद भगवान श्री कृष्ण और रुक्मनी माता रिशी दुर्वासा को फोजन
04:44के लिए अमंत्रित करने गए।
05:05उस जल्दबाजी में रुक्मनी माता रिशी दुर्वासा को जल अर्पित करना भूल गई। इससे क्रोधित होकर रिशी दुर्वासा ने श्राप
05:14दिया कि दोनों को अलग-अलग रहना होगा। कहा जाता है कि उसी श्राप के कारण दुवारिका की भूमी पर
05:21मिठे पाने की क
05:21यहां का पानी खारा हो गया। इसी वज़े से आज भी दुवारिका में रुक्मनी माता का मंदिर दुर्वारिका धिश मंदिर
05:30से दूर स्थीत है। इसके बाद हम नंबर चार पर हम पहुंचे लक्षमी नारायन मंदिर गोलोक धाम। जी हां, यहां
05:36का वातावर्ण इतना �
05:38शांत था कि मन खुद ही ध्यान में चला जाए। ऐसा लगा जैसे हम प्रित्वी पर नहीं गोलोक में आ
05:45गए हो। इसके बाद हम पहुंचे शिरी राम मंदिर राम नाम की गोंच और अंदर की एक अजीब सी शक्ति
05:53यहां खड़े होकर बस एक ही ऐसा साता है सत्य और धरम क�
06:08है और धुनात जनम और पुनर जनम का परतिक है। जब हमने प्रिक्रमा की तो ऐसा लगा जैसे हम अपने
06:16ही पिछे जनमों से गुजे रहे हैं। नंबर साथ पर हम पहुंचे गोमती घाट। गोमती नदी स्वर्ग से अफ्तृत हुई
06:23मानी जाती है और इसे अफ्तृत गं�
06:38समंदी नंबर आट पर हम पहुंचे और फिर यहां देखा हमने बहुत बीड़ थी इतनी कि लोगों को एक सैखिंड
06:45के लिए भी रुक कर दर्शन करने का मोका नहीं मिल रहा था। हर कोई बस एक जलक के लिए
06:52त्वारी कादीश की आगे बढ़ रहा था। लेकिन शायद उस
07:08करने का अफसर मिला जी हां यह अफसर मेरे लिए बहुत ही सर्प्राइसा यूनिवर्स की तरफ से हां हम वहीं
07:16बैटे थे भीड़ के बीच लेकिन फिर भी जैसे वो पल सिर्फ हमारा था और उस दिन मुझे सच में
07:23ऐसा लगा कि भगवान के दरबार के आज की सिंगर हम ही है
07:27हम बजन गा रहे थे राधे राधे नम के जैकारे ला रहे थे और हर श्रब सीधे दिल से निकल
07:34रहा था और फिर एक और चमतकार हुआ हमें अपने हाथों से भगवान को चावल का भोग चड़ाने का मुका
07:42मिला उस पल मेरे हाथ का अप रहे थी आखे नम थी दिल बस एक य
07:57मेरे और मेरे भगवान के बीच और उसी पल मुझे एक बात अच्छे से समझ आ गई कि जब नियत
08:06साफ होती है तो यूनिवर्स खुद आपके लिए रस्ते खोल देता है उस दिन यूनिवर्स मेरे साथ था और भगवान
08:14मेरे सामने यहां जब हम द्वारी का धीश मंदिर से
08:17निकले तो बीच रस्ते में हमने भगवान की जाकी देखी और हाँ यहां की इमली बहुत फिमस है मैं इमली
08:24भी लेकर आए इपने घर के लिए अब भगवान जगनाजी की एक मूर्ती और यहां से मैंने बहुत सारी शोपिंग
08:29की
08:30नमबर नाइन पर हम पहुँचे सवामी नरायन मंदिर यहां की साफ सफाई और शान्ती मन को चुझाती है
08:36नमबर टैन पर हम पहुँचे सिपनात महादेव मंदि छोटा सा मंदिर लेकिन उर्चा बहुत बड़ी ऐसा लगा जैसे शीव यहां
08:46शान्त रूप में बैटे हैं
08:47इसके बाद नमबर इलावन पर हम पहुँचे बढ़केश्वर महादेव मंदि
08:52सिरफ एक मंदिर नहीं है यहां महादेव और समूंदर का मिलन होता है
08:58यह मंदिर समूंदर के बिलकुल किनारे स्थीत हैं
09:02इतना क्रेप की लहरे खुँच चलकर महादेव के पास आते हैं
09:06When the sun is calm, the sun is like a good dur.
09:12But the sun is weak, the sun is weak, and the sun is weak.
09:21In the sun is like a good day, the sun is weak.
09:26When the sun is weak, the sun is weak.
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10:06ुपोचे घीता मंदिर दीवारों पर निखे गीता की अध्याए 18 ऐसा लगा जैसे भगवान शिरी खुझन हमें जीवन का ज्यान
10:17दे रहे हो।
10:17This is the number 14, which is the Bheat Dwarika.
10:21This is the name of Bhagawan Krishna and the other of the Siddhara.
10:28The name of Bheat Dwarika is the name of the Bheat Dwarika.
10:46my feet in my head and then when I was singing my hair on me, I used to sing my
10:53feet.
10:53I would like to sing my hands on my feet and go out and walk with my feet,
10:59and come to me and I would like to swim with my feet.
11:01And sometimes, my love was holding my feet and I would like to go out.
11:04I was not just the same with my feet.
11:07I was enjoying my life.
11:10I was worried that no doubt or no doubt,
11:13it was just a feeling.
11:15I am alive, I am alive. When we lost everything, everything was done. But I did not do that. It
11:24was not just the journey of God. It was the journey of God to me.
11:31And when I close my eyes, I hear the sound of God. When I hear the sound of God, when
11:37I hear the sound of God, then stop.
11:39Because God doesn't know the path, he will be the path.
11:42This is the way we all have been in the Dwarika Nageshwar Dharm.
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11:57We'll see you next time.
11:58in the video, until you are happy, happy, happy, happy, happy, happy.
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