00:00जूटी मैफिलों में तालियां बहुत मिलती हैं, पर सुकून नहीं मिलता, वहां लोग मुस्कुराते जरूर हैं, पर आखों में उनके
00:11सच्चाई नहीं होती, हर कोई दिखावे की रोशनी में चमकता है, पर दिल अंधेरे में ही रहता है,
00:20कभी-कभी भीड में खड़े होकर भी इंसान खुद को सबसे ज़्यादा अकीला महसूस करता है, इससे बहतर है कि
00:30आप अपने कमरे की खामूशी चुन ले, जहां आपको कोई मुखोटा नहीं पहनना पड़ता, जहां आप जैसे हैं वैसे ही
00:40रह सकते हैं,
00:41अकेला पन सजा नहीं है, अगर वह आपको खुद से मिलवा दे, छूटी मैफले ताली देती हैं, पर सच्ची तनहाई
00:51आपको पहचान देती हैं, इसलिए याद रखीर भीड में खो जाने से बहतर हैं, सच के साथ अकेले खड़े रहना,
01:00राधे राधे,
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