00:00आचारे जी नमस्ते, शोर्षन जो शब्द है, वो मेरे साथ बच्पन से होते आया है, घर वालों से शुरू करते
00:10हूँ, घर वाले ही थे, तो अब मुझे उसके बाद से मर्द जाती से नफ्रत सी हो गई है
00:18आजाद हो नाबाप, दुखी क्यों हो रहे हो, अच्छा है दिख गया सब, जल्दी दिख गया, सबसे ज्यादा बुरी हालत
00:28तो उन लड़कियों की होती है, जो 20-25 साल की होती है और अभी रोमेंटिक ख्यालों में जी रही
00:33होती है, कि दुनिया बहुत अच्छी जगह है, और
00:48अभी रो लिए, जो अभी नहीं रोती हैं, उन्हें फिर उम्र भर रोना पड़ता है, वो दुनिया की ववस्थाओं को
00:56खुदी सुईकार कर लेती हैं, हसके और फिर उम्र भर तड़कती हैं, जिस चीज का सामना कर रहे हो ना,
01:02पुरुशों के सेक्शूल वेवहार का, वो क
01:06कम से कम डेड़ हजार साल के इतिहास की पैदाईश है, उसमें न जाने कितने कारक तत्तों जुड़े हुए हैं,
01:15contributing factors, मैं उसको निर्दोश नहीं कहा रहा है, ना उसका पक्ष ले रहा हूं, बस ये बता रहा हूं
01:22कि ये सब पीछे की बड़ी लंबी धारा से आ रहा है, वो �
01:28उसको पता भी नहीं है कि उसके उपर कौन से शारीरिक, सामाजिक, एतिहासिक प्रभाव काम कर रहे हैं, जिसके कारण
01:35वो अशालीन, रुग्ण, विक्रत व्यवहार कर रहा है, उसको छुड़ो, तो पहला काम तो ये है कि अपने आपको तत्काल,
01:48इम्यून करो, ये काम इम
01:58लोगों के बीच जीओ, तो अपनी जगह बदल दो, दूसरी जगहों पर जाओ, ऐसी जगहों पर जाओ, जहां पर पुरानी
02:05धारा, अब उतनी बलवान नहीं है, इस काम में थुड़ा समय लगेगा, पर ये काम भी हो जाएगा, फिर तीसरा
02:12काम है, जो संस्था कर रही है, �
02:15वो ये है कि बिलकुल जड़ से सफाई कर दी जाए, ना इस्तरी वैसी रह जाए जैसी वो है, ना
02:21पुरुष वैसा रह जाए जैसा वो है, और इस्तरी पुरुष का रिष्टा भी वैसा रोगी न रह जाए जैसा वो
02:27है, उसमें समय लगेगा, आर ये बात समझ में है, और अ
02:45झाल झाल
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