00:00लोगों का ये कहना रहता है कि आचार्य जी बोलते तो सत्य ही है और सही बोलते हैं लेकिन वो
00:05इतना ज़ादा सच होता है कि वो निर्मोही है और विद्रोही है
00:14उनको पानी दिया करिये एक गिलास में और पानी देते वग तुसमें ठूख दिया करिये
00:23और कहा करिये कि मैं कैसे तुमको दे देती ये ज्यादा शुद्ध हो जाता ना
00:35जैसे तुमको आचायरे जी का ज्यादा सच बुरा लगता है
00:42वैसे ही पानी भी तुमको ज्यादा शुद्ध बुरा लगना चाहिए
00:46तो थोड़ा तो अशुद्ध करने दो
00:51ये ज्यादा सच क्या होता है
00:53एक छोर पे वो भी है जो बोलते हैं
00:56कि ये तुम्हारे आचारे एकदम जूट बोलते हैं
00:58उन्हें नहीं सुनना क्योंकि उनकी अनुसार में
01:01जूट बोलता हूँ
01:03दूसरों को नहीं सुनना क्योंकि उनकी अनुसार में
01:05ज्यादा सच बोलता हूँ
01:07तो गजब हो गया
01:09और बीच वाले हैं
01:10वो कहरें देखो तुमारे आचारजी आधा सच आधा जूट बोलते हैं
01:14पर वो तो हम भी बोल लेते हैं
01:15तो काय को सुने
01:18तो माने तीनों इस्थितियों में नहीं सुनना
01:21मुझे नहीं लगता समझाने का कोई भी तरीका मैंने छोड़ा होगा
01:26एक ही बात को भारतिय, यूनानी, चीनी, अर्बी
01:32जितने अंदाजों से घुमा फिरा करके बोल सकता था बोला
01:37सच को भी परखने के लिए बंदा सच्चा चाहिए न
01:43कोई दस प्रतिशत भी नियत रखता हो समझने की तो समझ जाएगा
01:49बेशरम आदमी के सारे तरक काट दीजे चो अंत में खीसने पोड़ देता है
01:52ही ही ही ही
01:54वह इतना करके वो भग जाएगा
01:57आप ठगे से खड़े रह जाओगे, सुधरता तो तब भी नहीं है
02:00बेमानी है और कुछ नहीं है यहाँ पर बल चाहिए
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