00:00हमारे कुछ दिल है कि नहीं है, हमें दिखाई देता है, हमने दुनिया कैसी बना दिये,
00:05या हम इतने पत्थर हो गए हैं कि हमें लोगों का दर्द समझ में ही नहीं आता,
00:10मैं जहां खेलने जाता हूँ, वहाँ पर पास में कहीं पर कोई मदुमक्ख्यों का चत्ता होगा,
00:30यह है हमारी सोसाइटी, दुनिया जैसी चल रही है, इसी को पाप कहते हैं,
00:35पर ये बात सुनकर ही आपको बिलकुल साफ सूंग जाता है,
00:40खौफ जदा हो जाते हो, बापरे बाप, यह क्या बोल दिया,
00:43यह जैसा वर्ल्ड ओर्डर हमें नहीं चाहिए,
00:46यह दुनिया के आधी प्रजातियां खत्म कर चुका है,
00:50प्रते दिन सौ से एक हजार प्रजातियां सदा के लिए विलुप्त हो रही है,
00:54और जानते हो नैचुरल रेट ओफ एक्स्टिंशन क्या है,
00:57जो हम कर रहे हैं, जो एंथ्रोपोजनिक काम है सारा,
01:00जो अगर ना करा जाए, तो नैचुरल रेट ओफ एक्स्टिंशन है वन स्पीशी पर दे,
01:06जो प्राकृतिक दर है विलुप्ति की,
01:08हम उससे सौ गोना, हजार गोना ज्यादा तेजी से प्रजातियों को प्रतिदिन मार रहे हैं,
01:13यह कर रहा है हमारा समाज,
01:14आप सब की क्या रूची है इस सिस्टम को इस व्यवस्था को बनाए रखने में,
01:20तुमने इस प्रत्वी के आधे बाशिंदों को साफ कर दिया,
01:24और जो बचे हैं आधे उनके साथ ही, घोर तुम दुरवेवार कर रहे हैं,
01:30अभी तुमारा समाज रहम चाहता है,
01:32हमारे मन में बठा दिया गया है, विवस्था ही भगवान है,
01:36दा सिस्टम इस गॉड, फिर सिस्टम का क्या होगा,
01:38सिस्टम का क्या होगा, अरे मैनमेड सिस्टम है यार,
01:41हमने बनाया था, हम ही तोड़ेंगे,
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