00:00बड़ी मस्त कहानिया हैं रिशी रिभू की और ये जो इनके शिष्य है निदा अगिन की सब लिखा पढ़ा दिया
00:08अच्छे से शिष्य बाबू को
00:09शिष्य बाबू पढ़ लिग गए और छोड़ के चले गए और कहीं जाकर शादियोदी कर रही
00:15उन्हें पक्का भरोसा था है कि उनको अद्वायत पूरा समझ में आ गया है तो गुरू को चोड़ के भग
00:20गए फिर गुरू ने कहा इतने साल लगाए थे इसको लिखाने पढ़ाने में कहां गया है देखें जरा तो एक
00:27दिन यही रिभू रिभू गीता वाली रिभू ये भे
00:43राजा जी आएंगे राजा जी आएंगे तो वो भी पहुंच गया ताली बजाने ये भी पहुंच गया पीछे से शेशे
00:48के पास तो उसको पूछते हैं कि कौन आ रहा है तो बोलता है राजा आ रहा है राजा ये
00:54राजा क्या होता है तो बोलता है वो हाथी दिख रहा है तो
01:13माने राजा की परिभाशा किस पर आश्रित हो गई हाथी पर तो उन्हों ने प्रशन ऐसे बना गर पूछा पर
01:19शिश्य गुरू को छोड़े अर्सा हो चुका था वो सब भूल भाल गया था तो बोलते आरे बात नहीं समझ
01:25में आ रही है वो हाथी है वो राजा है जो हाथी पर
01:28चढ़ा है उसको राजा बोलते है तो गुरू ने का पर ये चढ़ना माने क्या होता है चढ़ना माने क्या
01:33होता है तो अब उसको आ गया गुस्सा बोलते है इसको बोलते है चढ़ना नहीं समझ में आ रहा था
01:42चढ़ना कि इसको बोलते है जैसे हाथी पर राजा चढ़ा है �
01:46ऐसी मैं तुम पर चड़ गया हूँ।
01:47तो खिल-खिला कर जोर से हसते हैं, उपर चड़ा हुए, उसकी और ऐसे मूँ गर करके देखते हैं।
01:52और बोलते हैं, तुम मेरे उपर चड़े हो, ये तू और मैं क्या है।
01:57तो फिर कथा कहती है कि जब इतनी पास से गुरू ने आख में आख डाल के देखा, तो फिश्चे
02:01को कुछ याद आया, और कुछ भीतर कौंधा और जट से नीचे उतरा, उसे कुछ बात समझ में आई।
02:08अब समझ में ये रिभू कीता है, ये रिभू की कहानी है।
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