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यह वीडियो 08.02.2026 को आयोजित Goa Literature Festival से लिया गया है।
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Transcript
00:00मेरे ओफिस में आचारे जी वो ऐसी बिल्डिंग है जहां पर दस बारा ओफिस है
00:04सब एक दूसरे से पूछ रहे होते हैं तेरे यहां पर वेकेंसी है
00:07हम सेटिस्वाई क्यों नहीं हो पाते हैं
00:10जिसको डिससाटिस्वैक्शन बुरा लगेगा
00:12वो बाकी सब कुछ छोड़ करके इस डिससाटिस्वैक्शन के पीछे लग जाएगा न
00:18यह बेचैनी बला क्या है
00:19हमें चैन तो चाहिए
00:21पर चैन से ज्यादा हमें हमारी माननेताएं प्यारी हैं
00:26कौन सी माननेता?
00:27कि चैन उधर है
00:31जैसे घर में कोई छोटा बच्चा हो
00:34और वो रो रहा है
00:35और माबाब इतने अनाडी है
00:37कि कभी उसको डीजल पिला रहे है
00:40कभी उसको पेंट से नहला रहे है
00:43कभी उसको धूप में खड़ा कर रहे है
00:45अनाडी इतने है कि बस यह नहीं समझना चाह रहे है
00:48कि बच्चा चाह क्या रहा है
00:50हमारे भीतर भी बैठा है
00:52कोई जो लगातार बिलख रहा है
00:53हम उसकी और नहीं देख रहे हैं
00:55हम दुनिया की और देख रहे हैं
00:56कि दुनिया में और क्या हासिल कर लूँ
01:12जो कुछ भी हासिल करेंगे
01:14क्या मैं उसको अपनी उपलब्धी अपना अचीवमेंट बोल भी सकता हूँ
01:17या मैं जूट मूट ही फक्र करता रहता हूँ
01:20जब ये humility आती है न ये विनमरता
01:23कि मैंने आज तक ये सब जो गठा करा
01:27उससे बहुत ज्यादा कुछ भीतरी तल पर मिला नहीं है
01:30तब आदमी की जिन्दगी की दिशा बदलती है
01:34पुराने ही रास्तों को और नहीं दोराता
01:37पर हम ऐसा कर नहीं रहे हैं
01:38तो हम कहते रहते हैं कि हमें चैन चाहिए
01:41हमें चैन नहीं चाहिए
01:43हमें भटकाओ चाहिए
01:44वही मिल रहा है जो चाहिए
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