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Transcript
00:00भारतियों की घर गंदें होते, रासोइयां गंदें नी होती हमारे सारजन एक स्थान है न वो गंदे होते हैं Singapore,
00:06में उच्छे से वृठ्वा भारत के पास लेकिन गिरी
00:10वारतियों में पाई जाती है।
00:12और गिरी से गरी माननेता यह है कि मुझे अपना बस ठीक रखना है।
00:15अस्पतालों में देखिए दीवालों पर लोगोंने क्या कर रखा है।
00:18वो क्या धोखे से हो गया उनसे।
00:20हम कि दी परेटन स्थल पर जाते हैं।
00:22कोई बहुत पुरानी इमारत हो सकती है और वहां पर हम जाकर के खुरेद कर आ जाते हैं
00:28पिंकी लव्ज मोनू राजय पहरें अगरा की बसे होती है लोग पैन लेकर सामने की पहले सीट फाड़ देंगे
00:34और फिर उस उंगली डाल डाल के उसको नोच रहें रेलवे में बैठे हुए वहां मुंफली के छिलके फैला दिये
00:40यह आदमी गंदा है इसका रिष्टा गरीबी से नहीं है इसका रिष्टा संसकार से है
00:46हमारे जो लोकधार में एक संसकार है ना उनमें गरिमा आत्मसमान की बहुत कमी है
00:52आत्मा आत्यंतिक निजिता का नाम है हमारी रहने ही नहीं दी जाती
00:57कौन सा आत्मसमान बचा आपके पास बताइए और जब हमें हर तरफ से गंदगी गंदी मिल रही है
01:04हर कोई हक रख के बैठा है कि आएगा और हमारी जिंदगी पर थूख के चला जाएगा
01:08तो फिर हम भी सणकों पर थूखते हैं हम अपनी नदियों गंदा करते हैं हम हवाहों को गंदा करते हैं
01:14क्यों कि निजिता जैसी तो कुई बात होती ही नहीं ना
01:17तो कुछ भी होता रहे हमें हमें बरधाश्ट हो जाता है हम जेल लेते हैं और इसको हम कह देते
01:21हैं कि हम तो बड़े सहिश्णू हैं संतोशी हैं ना सहिश्णू है ना संतोशी हैं
01:25कैसे बन सकते हैं कुछ बहतर सबसे पहले तो कुछ ऐसा थोड़ा बहुत ही सही आंशिक ही सही पाईए तो
01:34पूरी तरह अपना है फिर उसकी रक्षा में आप जीजान लगा दोगे जो सचमुछ अपना होता है ना इंसान उसकर
01:41किसी को थूकने नहीं देता है
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