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पूरा वीडियो : मौत नहीं, अधूरी कहानी डराती है || आचार्य प्रशांत, गीता दीपोत्सव (2025)
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Transcript
00:00इजिप्ट में ममी बनाते थे और उसके शरीर से जितनी उसकी आती पुलाती जितने भीतर के अंग होते थे न
00:06सब बाहर निकाल लेते थे क्योंकि वरना वो भीतर सड़ते
00:09वो कहते थे कि अभी ये दुवारा जनम होगा और जब इसकी रूह आएगी तो उसको शरीर नहीं मिला तो
00:16गड़बण हो जाएगी तो शरीर बचा कर रखो ताकि जब रूह आए तो शरीर सलामत रहे
00:21भीतर बस पता है क्या छोड़ देते थे दिल क्योंकि वो अर्मानों का अड़ा है इतनी सारी ममी उन्होंने बना
00:29कर रख दी कि इनका आगे जनम होगा हमने तो नहीं देखा कि आज तक कोई विदा हुई रूह वापस
00:34आ करके ममी में घुसी हो और ममी उठके चलने वलने लग
00:50जाता था और ममी अकेले नहीं जाती थी बड़ा राजा मराया तो उसके साथ उसकी 70-80 रानिया भी वहीं
00:56पर डाल दी जाती थी लोगत अकेले परिशान हो जाएंगे महराज हाथी घोड़ा सब उसका सब साथ में विदा करा
01:04जाता था क्योंकि अभी अर्मान बाकी हैं अर्म
01:18आतनी को मौत कभी समझ में नहीं आई क्योंकि आतनी को कभी समझ में नहीं आया कि जिन्दार रहने के
01:23लिए कोई है ही नहीं हम सोचते हमारे भीतर कोई है जो जी रहा है हमें समझ में नहीं आया
01:29कि एक अपूर्णता मात्र है अहंकार और उसकी तकलीफ यह नहीं है कि उसके �
01:35अर्मान पूरे नहीं हो रहे।
01:36उसकी तकलीफ ये है,
01:37कि उस सोचता है,
01:37कि अर्मानों के पूरा होने से,
01:39वो पूरा हो जाएगा!
01:40और किसलिए चाहिए जीवात्माई?
01:42इसलिए तो चाहिए,
01:43कि एक जनम मि पूरा नहीं पढ़ा हो अभी,
01:45पचास जनम चाहिए अर्मान निकालने के लिए
01:47भाई इसी जनम में निकाल लो
01:51और मुक्त हो जाओ
01:52मरो है जोगी, मरो मरो, मरन है मीठा
01:57मुक्त हो जाओ
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