00:01रमजान आते ही एक सवाल पर बहुत ज़्यादा बहस शुरू हो जाती है।
00:04तरावी आठ रकत है या फिर बीस रकत।
00:07कुछ लोग कहते हैं आठ ही सही है, कुछ कहते हैं बीस ही सही है।
00:10लेकिन सच्चाई यह है कि इस मसले में इसलाम ने तंगी नहीं रखी बल्कि आसानी रखी है।
00:15आज की इस वीडियो में हम बात करेंगे कुरान की रोशनी में, हदीस की रोशनी में, नभी की सुननत के
00:20हिसाब से, सहाबा के अमल से और बड़े-बड़े ओलेमाओं की राय से।
00:23तो वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए।
00:25दोस्तो तरावी रमजान की रातों की एक खास नमाज है जो इशा के बात पड़ी जाती है। तरावी का मकसद
00:31है अल्ला की अबादत बढ़ाना, रमजान की रातों को जिन्दा करना, पुरान की तिलावत सुनना और पढ़ना।
00:37तरावी फर्स नहीं है, बलकि ये सुननत मौकदा है, यानि बहुत जोर वाली सुननत है। बहुत लोग पूछते हैं कि
00:43कुरान में तरावी का नाम है या नहीं। तो दोस्तों कुरान में तरावी शब्द नहीं आथा, लेकिन कुरान में रात
00:48की नमाज, यानि क्याम-ॉ-ल-
00:49का बहुत बड़ा दिकर आता है
00:51अल्लाह फर्माता है कि रात में इादत करने
00:54वाले अल्लाह के खास बंदे होते हैं
00:55रमजान में जो रात की इबादत की जाती है
00:57तरावी उसी की एक शक्राइब
00:59और नभी अलाह avez-सलम ने फर्माया
01:01रमजान में रात की नमाज को बहुत ज़्यादा एहमियत दी
01:04अब असली मुद्दे पर आते हैं
01:06नभी सलिल्लावले सल्म ने तरावी की कितनी रकत पड़े
01:08सबसे मशूर हदीश जो इस मामले में आती है
01:11वो है हजरत आशा रदियारलाहुतालानों की रिवायब
01:14हदीश का मतलब ये है कि नभी सलिल्लावले सल्म
01:16रमजान और गयर रमजान में अकसर 11 रकत पड़ते थे
01:19यानि 8 क्याम प्लस 3 वित्र
01:21बहुत सारे लोग इसी हदीश की बुनियात पर कहते हैं
01:24तरावी 8 रकत की है
01:25और ये सच है कि 8 रकत की मजबूत हदीश मौजूद है
01:29लेकिन यहां एक बात बहुत जरूरी समझनी होगी
01:32नभी सलिल्लाव सल्म ने ये नहीं कहा कि तरावी सिर्फ 8 ही है
01:36और इस से ज्यादा नहीं हो सकती
01:37यानि 8 रकत नभी सलिल्लाव सल्म से साबित है
01:40लेकिन सिर्फ 8 ही फाइनल है
01:41ये बात नभी सलिल्लाव सल्म से साबित नहीं है
01:44एक और बहुत बड़ी हदीश आती है
01:46नभी सलिल्लाव सल्म ने कुछ रातों में सहाबा को जमात से तरावी पढ़ाई
01:49लोग बहुत खुश हुए और ज्यादा जमाफ होए
01:51फिर नभी सलिल्लाव सल्म बाहर नहीं आए
01:53सुबह बताया कि मुझे डर हुआ कि कहीं ये नमाज तुम पर फर्ज न कर दी जाए
01:57इससे ये साबित होता है कि तरावी जमात से पढ़ना सुनत है
02:01लेकिन इसे फर्ज नहीं बनाया गया
02:03और रकात की संख्या को लेकर भी मजबूरी नहीं रखी गई
02:05आप सवाल ये उड़ता है कि अगर नभी ने अकसर आठ पढ़ी तो बीस कहां से आए
02:09इसका जवाब है हजरत उमर रुदिया लाहुत आनुह के दौर में तरावी बीस रकात जमात से पढ़ी गई
02:14हजरत उमर ने देखा कि लोग अलग अलग टोलियों में नमास कर रहे हैं
02:18तो उन्होंने सब को एक इमाम के पीछे जमा कर दिया
02:21और फिर मस्जिद में बीस रकात का अमल शुरू हुआ
02:24ये अमल सिर्फ एक दो दिन नहीं बलकि पूरे रमज़ान में चला
02:28और सहाबा ने इस पर एतराज नहीं किया
02:30सहाबा एकराम की जमात और खलीफा राशिद का फैसला 20 रकात पर था
02:35और नभी ने खुद फरमाया है कि मेरी सुन्नत और मेरे बाद खलीफा राशिदीन की सुन्नत को पकड़तर रखना
02:40तो 20 रकात को भी बहुत बड़े इसलामी स्कॉलर सुन्नत मानते हैं
02:44अब सोशल मीडिया पर बहुत लोग कहते हैं 20 रकात बिद्दत है
02:48लेकिन दोस्तों ये कहना बहुत बड़ा इल्जाम है क्योंकि हजरत उमर रदियालाहुत अलानौ
02:52खलीफा राशिद है
02:53सहाबा मौजूद थे किसी में उसे हराम या गलत नहीं कहा
02:57उम्मत सदियों से 20 रकात पड़ती आई है
02:59अगर 20 रकात गलत होती तो सहाबा ज़रूर रोपते इसलिए 20 रकात को बिद्दत कहना सही नहीं है
03:04अब आते हैं उलेमा की राय पर
03:06दुनिया के बड़े इसलामिक, फिक, मजहब जैसे हनफी अधिकतर हनफी उलेमा के मताबिक तरावी 20 रकात होती है
03:13शाफ़ई में उलेमा भी ज्यादा तर 20 रकात के कायल है
03:16मली की उलेमा में भी 20 और उससे ज्यादा का अमल मिलता है
03:20हमली उलेमा में भी अलग-अलग राय है लेकिन 20 को भी मानेता है
03:24और कई एहले हदीस उलेमा 8 को बहतर मानते है
03:26इसका मतलब उम्मत के अंदर दोनों पर अमल मौजूद है
03:30तरावी का मकसद सिर्फ गिंती नहीं असल मकसद है
03:32प्याम यानी रात में अल्ला के सामने खड़े होकर अबातत करना
03:35अगर कोई 8 रकात पढ़कर लंबी तिलावत करे दिहान से नमास पढ़े
03:39तो वो भी बहुत बड़ा सवाब है
03:41और अगर कोई 20 रकात पढ़कर इखलास से नमास पढ़े
03:44पुरान पूरा सुन ले तो वो भी बहुत बड़ा सवाब है
03:47अब सवाल आता है कि बहतर क्या है
03:49अगर आपकी मजजिद में 20 हो रही है तो 20 पढ़िए
03:51अगर कहीं 8 हो रही है तो 8 पढ़िए
03:53घर में टाइम कम है तो 8 पढ़िए
03:55अगर ताकत है तो 20 पढ़िए
03:57इसलम आसान दी ने सबसे गलत बाती है कि आठ वाले बीस वालों को गलत कहें
04:01बीस वाले आठ वालों को गलत कहें
04:03क्योंकि ये मसल़्ा एक तरावी है यानि इस में अलग-लग राएप हो सकती है
04:07दोस्तो रमजान की तरावी जगड़े का विशय नहीं बलकि इबादत का विशय है
04:11नभी ने फरमाया जो रमजान में इमान के साथ और सवाब की नियत से क्याम करेगा
04:16उसके पिछले गुना माफ कर दिये जाएंगे
04:18इसलिए हमें तरावी की रखत की बहस में नहीं
04:20तरावी की रूह में जाना चाहिए
04:22फिलाल इस वीडियो में इतना ही
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04:26शर करें और चानल को सब्सक्राइब करना बिलकुल न भूले
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