00:03क्या कोई हिंदू रमजान के रोजे रख सकता है का इसलाम इसकी इज़ाज़त देता है और हिंदू धर्म इस बारे
00:09में क्या कहता है आज हम इसी समवेदन श्रील लेकिन महत्वपूर्ण सवाल का तथ्य अधारे तक जवाब देंगे आज किस
00:17वीडियो में लेकिन उसे पहले �
00:20सबसे पहले समझते हैं कि रमजान है क्या रमजान इसलाम का पवित्र महिना है जिसमें मुसल्मान रोजा रखते हैं रोजा
00:28यानि की सुरियोदय से सुरियास्त तक को खाने पीने और कुछ अन्य चीजों से परहेज करना अब इस महिने में
00:34मुसल्मान नमाज दान और आत्म स
00:37पर विशेस ध्यान देते हैं, अब इसलाम के अनुसार रोजा हर बालिग स्वास्त मुसल्मान पर फर्ज यानि की अनिवार होता
00:45है, लेकिन अब सवाल है कि क्या कोई हिंदू रमजान रख सकता है, इसलाम में रोजा मुलरुप से मुसल्मानों के
00:51लिए अनिवार इबादत है,
00:52लेकिन अगर कोई गैर मुसलिम सम्मान समझ या फिर अध्यात्मिक अनुभव के लिए रोजा रखना चाहे, तो इसलाम में इसकी
00:59सक्त मनाही का कोई पश्टनियम नहीं मिलता, हलाकि रोजे का असली धार्मिक सवाब यानि कि पुन्य इसलाम के अनुसार नियत
01:08और इमान से �
01:09जुड़ा होता है, अब इंदु धर्म की बात करें तो हिंदुजम में वरत और उपवास की परंपरा बहुत पुरानी है,
01:15एकादशी, नवरातरी, शेवरातरी जैसे कई वरत रखे जाते हैं, अब इंदु धर्म में किसी दूसरे धर्म की उपवास को रखने
01:21पर कोई प्रत
01:39मित्रों के साथ एक जुड़ता या फिर सम्मान के तोर पर रोजा भी रखते हैं, तो दोस्तों धार्मिक रूप से
01:45रुम्जान मसल्मानों का पवित्र महीना होता है और रोजा उनके लिए अनिवार इबादत होता है, लेकिन आपसी सम्मान और समझ
01:52के नजरिये से कोई हिं�
01:56तो आस्था और स्वहार्द का प्रतीक हो सकता है, लेकिन सबसे जरूरी है सम्मान सद्भा और सही जानकारी, फिलाल इस
02:03वीडियो में इतना ही आप कोई जानकारी कैसे लगी हमें कमेंट में लिख कर जरूर बतेगा
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