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Surya Grahan 2026: अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है। फाल्गुन महीने की अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह हिंदू साल के अंतिम महीने की अमावस्या होती है। इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 मार्च को मनाई जाएगी। अगर आपके कामों में बार-बार बाधा आ रही है या परिवार में अशांति बनी रहती है, तो इस दिन (Falgun Amavasya 2026) अपने पितरों का तर्पण जरूर करें, तो आइए इस वीडियो में पितृ तर्पण की सरल विधि जानते हैं।Surya Grahan 2026: Falgun Amavasya Me Surya Grahan,Pitru Puja Kab Aur Kaise Kare ?

The Amavasya Tithi is dedicated to the ancestors. The Amavasya of the month of Phalgun is even more significant because it is the Amavasya of the last month of the Hindu calendar. This year, Phalgun Amavasya will be celebrated on March 17th. If you are facing repeated obstacles in your work or there is unrest in the family, then definitely perform Tarpan for your ancestors on this day (Falgun Amavasya 2026). So, let's learn the simple method of Pitru Tarpan in this video.

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~HT.318~ED.118~PR.111~
Transcript
00:01साल दोहजाएटशबिस में फालगो नमावस्या सत्र फरवरी को पढ़ रही है और इसी दिन साल का पहला सूरिग्रहन भी लग
00:08रहा है
00:09लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या फालगो नमावस्या पर होने वाले स्नान दान और पित्री तरपन
00:16कारे सूरिग्रहन की वज़े से नहीं हो पाएंगे
00:19तो आईए आपके सवाल का जबाब देते हैं
00:21सबसे पहले तो आपको बता दें कि फाल्गो नमावस्या पर सूरिग रहन भले ही लग रहा हो लेकिन ये भारत
00:28में ना तो दिखाई दे रहा है और ना ही सूतकाल इसका मानने है ऐसे में आप स्नान, दान, पित्र
00:34पूजन और तरपणादी सभी कारे बिना किसी बाधा के कर सकत
00:39आईए वीडियो में आपको ये भी बताते हैं कि पित्रि पूजा घर पर बिना पंडित के कैसे किया जाता है
00:45सबसे पहले तो इस नान दान ब्रह्मो मुहूर्त में करें फालगो नमा वस्या की सुबह पाँच बचकर छे मिनट से
00:52लेकर साड़े छे बजे तक स्नान जरूर कर लें दान आप पित्रि पूजन के बाद भी कर सकते हैं या
00:58फिर पूरे दिन में किसी भी समय दान जरूर करें
01:01अब आप तरपन के लिए तांबे अपीतल के बरतन में साफ जल भर लें थोड़ा सा गंगा जल लें उसमें
01:07कच्चा दूद काले तिल और जौ मिलाएं हाथ की अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी पहनें शास्त्रों में कुशा के
01:13बिना तरपन अधूरा मानते हैं अ
01:27जल छोड़ते समय अपने पित्रों का ध्यान जरूर करें कुशा से छू कर गया हुआ जल सीधे पित्रों तक पहुँचता
01:34है और उनको त्रप्त करता है इसके बाद अरम्या देवता की पूजा करें जो की पित्रों के देवता होते हैं
01:40पित्री सुक्त का पाड़ करें पित्
01:48अगर आपको उनकी पसंद नहीं पता तो सात्विक भोजन बना कर अपने घर की बैलकनी अच्छत पर रख दे और
01:55कवों को उसे खाने दे या फिर आप गाए या कुत्ते को भी ये भोजन दे सकते हैं
02:01ध्यान रहे पित्र पूजन में बनाए गए भोग को स्वैम ना तो ग्रहन करे और नहीं परिवार जनों को दे
02:07इसे जीव जन्तों को ही खाने दे या फिर दान कर दे इससे पितर प्रसन होते हैं और तृप्त होकर
02:14आपको आशरवाद देते हैं
02:15पित्रों के लिए आप श्राद्ध और पिंडदान फाल गुनमावस्या के दिन सुबह साड़े ग्यारा बज़े से दो पहर धाई बज़े
02:22की बीच कर सकते हैं
02:23इसके बाद शाम के समय तरपड के बाद पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और सफेद मिठाई
02:29का भोग भी लगाएं क्यूंकि पीपल में देवताओं के साथ पितरों का भी वास होता है
02:34फिलहाल अस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें
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