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Shab e Barat 2026: शब-ए-बारात की रात आते ही अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है—

सलातुल तस्बीह की नमाज़ कैसे पढ़ें?

क्या ये नमाज़ शब-ए-बारात में ही पढ़नी चाहिए?

इसके अलावा कौन-कौन सी नमाज़ पढ़ना सही है?
आज इस वीडियो में हम बिलकुल आसान भाषा में
शब-ए-बारात की नमाज़ों की सही जानकारी जानेंगे।

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~HT.318~PR.266~
Transcript
00:00शबे बराद की रात आते ही अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है
00:07सलातल तजबी की नमाज कैसे पढ़ें?
00:09क्या ये नमाज शबे बराद में ही पढ़नी चाहिए?
00:12इसके लावा कौन-कौन सी नमाज पढ़ना सही है?
00:14आज इस वीडियो में हम विलकुल आसान भाशा में शबे बराद की नमाजों की सही जानकारी आपको देंगे
00:19आपको बता दें शबे बराद को माफी और रहमत की रात कहा जाता है
00:22हर साल ये शाबान महीने की चौद में रात को आती है जो इस साल तीन फरवरी की रात से शुरू हो रही है
00:28और सुबा तक रहेगी
00:30सबसे पहले बात करते हैं सलात तजबी क्या है?
00:33सलात तजबी एक नफल नमाज है जिसमें लावा की तजबी ज्यादा की जाती है
00:37हदीस में आता है कि इस नमाज के जरीए
00:39अल्लाह इंसान के चोटे बड़े पुराने नए गुना माफ कर देता है
00:43ये नमाज किसी भी दिन पढ़ी जा सकती है
00:45सिर्फ शब बरात के लिए तै नहीं है
00:47लेकिन इस रात पढ़ना बहतर अमल माना जाता है
00:49सलातल तजबी पढ़ने का तरीका क्या है ये भी जान लीजे
00:53सलातल तजबी चार रकत नफल नमाज होती है
00:56इसमें एक तजबी पढ़ी जाती है
00:58सुबानलाही वलहम्दलिल्लाही वला इलाहा इल्लाहू वल्लाहू अक्बर
01:03तरीका समझ लीजे
01:04हर रकात में करात के बाद 15 बार तजबी, रुकू में 10 बार, रुकू से उठकर 10 बार, सजदे में 10 बार, दोनों सजदों के बीच 10 बार, दूसरे सजदे में 10 बार, एक रकात में कुल 75 तजबी, चार रकात में 300 तजबी
01:19दिहान रहे, आराम से पढ़े, जलबाजी ना करें, अगर पूरा तरीका याद नहों तो सिर्फ नफल नमाज भी काफी है।
01:25अब जानते हैं शब बरात में कौन कौन सी नमाज पढ़ सकते हैं।
01:29बात करते हैं नफल नमाज की, दो दो रकात जितनी तोफीखों तनियाब पढ़ सकते हैं।
01:33तौबा की नमाज, गुनाओं की माफी के लिए, हाज़त की नमाज, अपनी जरूरतों और दौाओं के लिए, वित्र और तहज्जुत की नमाज, अगर आसान हो।
01:41उलिमा कहते हैं कोई खास गिंती तै नहीं, छे, बारा, सो, रकात की पाबंदी सही नहीं, जितना दिल चाहे उतना पढ़ें।
01:48अब क्या गलत है, क्या नहीं करना चाहिए, ये भी जाननी जाए, ये सोचना गलत है कि इतनी रकत नहीं पड़ी तो गुना होगा, ये नमाज वर्ज है, जबरदस्ती पूरी रात जागना जरूरी है, इसलाम आसान दीन है, ठाकान और मजबूती का भी ख्याल रखता है, द
02:18को सब्सक्राइब करना बिलकुल ना भूलें
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