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Shab e Barat 2026: हर साल शाबान के महीने में, खासकर शब-ए-बारात पर हमारे समाज में कई बातें बहुत ज़्यादा कही जाती हैं —
जैसे
अरफ़े की फातिहा
रूहों का घर आना
7 तरह के खाने बनाना
लेकिन सवाल ये है:
👉 क्या ये बातें क़ुरआन और हदीस से साबित हैं?
आज इसी की हक़ीक़त जानेंगे — बिना अफ़वाह, बिना बढ़ा-चढ़ाकर।



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~PR.115~HT.408~ED.120~

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Transcript
00:00हर साल जैसे ही शबिबारात आती है, समाज में कई बातें जोर पकड़ लेती हैं
00:09कहा जाता है कि आज अरफे की फातेहा होगी, आज मरहूमों की रूहें घर पर आएंगी
00:14साथ तरह का खाना बनाना ज़रूरी है
00:16लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सब बातें इसलाम से सावित हैं
00:20या ये सिर्फ हमारी परंपराइम बन चुकी हैं
00:22आज इस वीडियो में हम जानेंगे कुरान, हदीस और उल्लेमा की राय के मताबिक पूरी सच्चाई
00:27आपको बढ़ा दें, आज यानि तीन फर्वरी को शब बाराद है
00:30ये माफी और रहमत की रात कही जाती है
00:32हर साल ये शाबान महीने की चौदमी तारिख को आती है
00:35जो इस साल तीन फर्वरी को है
00:37तो सबसे पहले जानते हैं अरफे की फातिहा, क्या है इसकी हकीकत
00:41इसलाम में अरफा एक बहुत बड़ा और खास दिन है
00:44लेकिन ये दिन होता है नौ जिलहिज्जा हच के मौके पर
00:47जब हाजी मैदाने अरफात में खड़े होते हैं
00:50हदिस में आता है कि अरफा के दिन का रोजा और गैर हाजीयों के लिए
00:53पिछले और आने वाले एक साल के गुनाओं का कफारा है
00:56लेकिन ध्यान देने वाली बाती है कि शबान के मैदे में अरफा नाम का कोई दिन नहीं है
01:00ना कुरान में ना सही हदीज में
01:03शबबरात के साथ अरफा जोड़ना इसलामी तौर पर सही नहीं है
01:08हाँ फातिहा या इसलाह सबाब किसी भी दिन किया जा सकता है
01:11लेकिन उसे अर्फे की फातिहा कहना गलत नाम है
01:14उलिमा कहते हैं अमल जायज हो सकता है
01:16मगर गलत नाम और गलत यकीन के साथ नहीं
01:19सवाल ये भी है क्या शब बरात की रात रूहें घर पर आती है
01:23ये सबसे ज्यादा भावुक और डर से जुड़ी बात है
01:25अक्सर कहा जाता है आज मरहुमों की रूहें घर पर आती है
01:28इसलिए खाना बनाओ चिराग जलाओ
01:30लेकिन कुरान क्या कहता है
01:31कुरान के मताबिक इनसान की मौत के बाद
01:33वो बर्जख की जिन्दगी में चला जाता है
01:36और कयामत तक वही रहता है
01:38किसी भी सही हदीस में ये नहीं मिलता
01:41कि शब बरात की रात रूहें घर आती है
01:43या खाने का इंतजार करती है
01:45बड़े उल्माओं की राय है
01:46ये बातें सिर्फ लोगों की कहानी और रिवाजों से आई है
01:50इसका इसलामी अकीदे से सीधा तालुक नहीं है
01:52सही बात ये है कि अल्लह मरहूमों को जिन्दा लोगों की दूआ का सवाब पहुँचा देता है
01:57चाहे वो दूआ किसी भी दिन की जाए
01:59लेकिन रूहों का आना जाना तै करना इसलाम की तालिम नहीं है
02:03शब बात पर साथ तरीके का खाना सच है या वहम
02:06कहा जाता है अगर साथ चीजें नहीं बनाई तो नुकसान हो जाएगा
02:09पुरान और हदीस में ना साथ का जिक्र है ना किसी खास गिंती का हुक्ष
02:14लेमा कहते हैं काना बनाना गुना नहीं गरीबों को खिलाना सवाब है लेकिन साथ ही चीजें बनानी है वरना अनहोनी होगी
02:20ये सब बेबुनियादी बाते हैं इसलाम में डर नहीं समझ सिकाए जाती है
02:25अब सवाल ये है कि अगर ये सब गलत फैमिया है तो शब बरात का सही अमल क्या है
02:29उलेमाओं के मताबिक नफल नमाज, तौबा और अस्तखवार, कुरान के तिलावत, अपने और पूरी उम्मत के लिए दुआ, मरहुमों के लिए मखफरत की दुआ, बिना दिखावे, बिना डर, बिना नई रस्मे बनाए
02:40फिलाल इस वीडियो में इतना ही, अगर आपको ये जानकारी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल न भूलें
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