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  • 2 months ago
♫Albam: Sajjan Singh Aur Madho Singh Ki Ladai
♫Song: Sajjan Singh Aur Madho Singh Ki Ladai
♫Singer :Bechan Ram Rajbhar
♫Lyrics: Ram Naresh Kavi
♫Music : Aan Party
♫Recording Studio: Shama Cassettes
♫Video Editor: Sandeep Nishad
♫Mixd by : Hausila Nishad
♫Digital Manager : Amarnath Ji
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Comapany/Label - Shama Cassettes
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Category

🎵
Music
Transcript
00:00पार्णू के राउन होदाओ
00:09ये भाईया
00:16चारलाइन भुमी का बाँ
00:18का करें बैचारीव परफान हुआ
00:22पार्णू की कीमत सुनो साफियो
00:25हादा
00:26ये जगा लाटा भीजिवुदा
00:27पेया दा हम करें
00:28पानी की कीमत सुरो सा फिला, जिसका पानी गया उसका पानी नहीं, अब पानी पीछे हुआ तो बेपानी हुआ, उसका पानी में कोई रवानी नहीं, अरे पानी पीकर बहन का या तुल प्रेम से, हाथ राखी सजाई लेंगार है, तो राखी राखी की कीमत चुकाना पड़ा,
00:58कि अरे तुझे अपना साथी बनाने के पहले
01:25मेरी जान मुझे को बहुत सोचना है
01:31में अपना साथी बनाने के पहले, में अपना साथी बनाने के पहले, में अपना साथी बनाने के पहले, में अपना साथी बनाने के पहले, में अपना साथी बनाने के पहले, में अपना साथी बनाने के पहले, में अपना साथी बनाने के पहले, में अपना साथी बनाने के पहले
02:01और इसे तर्जबा लेकिन काने का भाव है क्या है माहिश्चता कि हमेरे तरफ सरका पिछा पर रबर है एक लाइन में लाज रुपे के बात का किया रे कदर जब करोगे कदर तबू मिलेगा
02:23मेरे आ रही जत खर्शी ते कदर जब करोगे कदर तबू मिलेगा
02:43कि अरे कदर जब करोगे कदर तबू मिलेगा
03:01कि अरे मेरे या रही जत खरीदी न जाती अरे जो इस हाथ दोगे वह इस पर मिलेगा घर घर मांगे से गरीदी न जाती यहीं से कहानी का सुर्वात है क्या
03:19कि अरे जिला भी लास पूर में जंगल एक मशुर रहा वही बनबासियों का प्यार भारा नूर रहा अरे उसी जंगल में एक विचारी बुढ़िया रहती थी और बेजकर लकरी वह जीवन निर्वाह करती थी पास में सज्जल सिंग ठाकुर की जमिदारी थी पास में पाच
03:49का मारा दाकु माधर सिंगला चार चला अब पीने को पारी रतनावती के बार चला पहले बात कि समझ़ ला बिराफ पुर्जिले में घंगोर जंगल एक रतनावती नाम की बुढ़िया अपने बिटिया पांच औरस की सीता बिटिया के लेकर जोपरी बना कर जंगल किनारे �
04:19और उसी जंगल में एक माधर सिंग नाम का दाकु अपने गिरूओ के साथ रहता था लेकिन माधर सिंग दाकु ऐसा था तो उसके नाम से उस जिले का जर्रह जर्रह कामता था ऐसा था वो माधर lasting दाकु
04:31एक दिन मादो सिंग डाकू को जंगल में प्यास लग गई तो मादो सिंग डाकू सोच रहे के रहे
04:38मुझे पानी कहा मिलेगा और पानी के लिए मेरा हलक सुखा जा रहा है
04:42सोच लिया मादू सिंग डाकू कि अगर मैं बुर्या के कुटिया की तरफ चलू तो मुझे पानी मिल सकता है वो मादू सिंग डाकू चल दिया लेकिन उस मादू सिंग डाकू की सज्जन सिंग जमदार से जुस्मनी थी जान के एकदम जुस्मनी और जब मादू सिंग डाकू
05:12कियर यंगुरी में कसले भिया नगिनिया हो नने दो दिया ना जला आईदा
05:27किया वो ममता कछल कलिबा गगरिया हो माई
05:39पाईया पिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नगिनिया नग
06:09अर पनियों पिया दाय अपने गोदी में उठा ला तानिया पिया दाय अपने
06:20अर लागी गईले नहीं आपे रसरिया हो है माई तानिया पिया दा
06:38क्या कि लागी गईले नहीं आकर शरिया हो दाकू बहुत हो गया जरू लेकिन आवाज गुषिया रतना होती है कान में पहुच गई अजरू करे कान में पहुंच गईले दखले के रे बाप रे बाप
07:07आज तके जंगल में कोई माता कहवाला मुझे बेटा नहीं मिला लेकिन अगर एक डाकू मेरी सरण में आकर मुझे माँ खाकर पुकारा है तो मेरा फर्ज होता है उसे पानी पिलाना और बुहिया मतारी रतना होती है एक लोटा पानी लेकर चल देती है और जब मादर सिंग
07:37बेटा है तब कहता है के रे बुहिया मा एक लोटा पानी पिला कर मेरे जान की रक्षा की ने तो पहचाल लेकि मेरा नाम मादर सिंग डाकू है किसको तुप पानी पिला करके जिलाई है यह मादर सिंग डाकू है मेरे नाम से जिले का जर्रा जर्रा काता है तो अगर एक लो
08:07सम्झत्य वराली आप्रस्क्राइब
08:13करें करें कियो बढ़िए यह जल्डी जल्डी चलुई रहरा जल्दी जलुरे कहरवा
08:25जल्डी जल्डी चलुई रहरा आप शुरूज डुबे रहरा नभी आप
08:36लेकिन मादों ते उसी दीन से करने क्या लगाति ने आवाजिक भिठी है
08:41कि अरे रतिया के या गिला पहरवा रोजा माधोयावा बुढ़िया के भारवा
08:51रोजमा धोया वा बुरिया के घारवा
09:21कवले खिल पी जाला जंगल के अंदार वा
09:31कवले खिल पी जाला जंगल के अंदार वा
09:47रहे जब कुछ रात होकर मादो सिंग को बुरिया कुटिया में आवा है
09:52और घ्रम का बिटिया सीता के साथ धरम का भाई बनके गुलिया के साथ धर्म का बेतवा बनाकर पूरा रात बनकर के पूरा रात गुजा रहे
10:00और सभरवा भेले की पहले में ज़ाकर जंगलवा में च्छिप जा, यो कर रोगकर काम रहल
10:09एक दिन किसी तरह से बात पहलते पहलते सजण सिम्ठाकु जमिदार के कानों तक पहुछी जमिदार साप सुन लिए करे
10:16ये तो नहीं मादु सिंग डाकू बुःया कुटिया में आता है जिसे मेरी दुश्मनी है
10:20मेरा गान उर्कर सारा भन गरीबे में बांचुका है
10:23तो आज मौका है
10:24अरे चलकर बुःया कुटिया को घर लू
10:26मादु सिंग डाकू को गिरखावड़ करके
10:28और अपना ला करके बढला चुका लूँ उसे
10:30बाबुजी सबेरे सबेरे
10:33सज्जन सिंग ठाकुर घोड़ा पसवारी करके
10:35तलवार लेकर बुहिया के जोपरी को घेर लिये
10:38लेकिन उस समय माधु सिंग डाकु जंगल में जा चुका था
10:41बुढ़िया को धरवाजे के बाहर लाकर सज्जन सिंग ठाकु डाक तहके रे पगली
10:46क्या इधर माधु सिंग डाकु तेरे कुटिया में आता है
10:49मंगली रतनावती बुढ़िया करें ठाकु साहब
10:54जमिदार साहब
10:56अरे आप क्या पूछते है
10:58कहा कि माधु सिंग के भी समय पूछता हूं कि माधु सिंग डाकु तेरा रिस्टा क्या है
11:03अरे वो क्या खाता है क्या करता है
11:06कहा रहता है
11:07रतनावती बुढ़िया करें जमिदार साहब हमके कुछ नहीं मालू
11:11और तब
11:13तब जबिदार फाब उसकी बुहिया बिटिया सीता को हाठ में ले लिए और देख मेरा तलवार
11:19अगर तु कादे से मादू सिंispers कादा नहीं बताएगी
11:23तो तेरी मैंज तु काद करके तु काद कर दूगा तब तु मादू सिंस्थ का पताएगी
11:28लेकिन कई से कहले ने ख्लेक तर्ज बाग
11:31तर्ज है बाग
11:35हाए की कहावा कखाया रचुनावा
11:43हाए कहावा कखाया रचुनावा
11:54आरे कहावा कखाया रचुनावा
12:02अब लिलारावा अमार हो जान कहावा कखाया रचुनावा
12:14यह दो ब्रेयारा कखा यह रचुमावा अरे बनार सकप्पान उगुली कती कुली
12:38लिला रवा मारे हो जाम हुगुली कती कुली
12:46अच्छा थे कि सब गावे लगा एक यह देखा है मेरे फिट कही लिए
12:52कि एकसर आप लों देखते हैं कि महरारू का मरे जब कमाए बदे पर्दे से चल जाला नहीं
12:57और जब जाए लगें तो उनके महरारू अगर मन चली किसम को बाती है कि ठीक ठाक बाती है तो अपने दुलास से मुस्किया कि समान मंगें कि यह दुला जब कमाए बदे जात हो न तो हमके एक जुला नहीं लेता है
13:09अक्यो के बहुत मन साइट पकाई कि हमके ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठीक ठी
13:39तो हम के अच्छा पकले एक दुरही कला सहिया जब कमाई बदे जाता ना तो हमरे खाद रेक्टे चिजू लेकर यहां
13:46चिजू का मतलब ना समय जाना था लेकिन घुनवाव तो आप लोगन चिजू का मतलब उसमान हाव मंगलन
13:53इवला समान
13:56समझे ला ना हाँ मुझे पर यहां समझे ला लगए तो यहां महरारू सब समान मंग हैं वह जब कुछ महरारू वह इसन खड़ा वह ली कुरूंके मरे जब कमाई बदे चल गई लन अदुचार बर इस परदेशे में बीत गल अकई चिथी चुपाती ना बहलां सबर्मा उठी
14:26लेकिन एक थो महरारू को महाया बदे मोरंग जया लगलन
14:31तम मोरंग में मोर बहुत होलन के दुलहनया कले संया हमरे खाती रेख mendhye मौर लं लेई हा
14:35वीचार गई लेगए जरूर लेकिन लविट कच च चे चले लन
14:39उनका दुलहनया कले काह मोरवा ना लेई ले ला
14:41तो इस बतावा तो कि मोरवा कहने ले लिया उपूछत यहों कि मोरवा कहने लिया तर जबाग
14:45कि एर पिया मोर मोर न गई ले
14:52अरे मोरवाने के देश मोर पिया मोर न ले ले
15:02अरे बज्यर परहो देश मोर पिया मोर न ले ले
15:12कि एरे ये धनिया हम मोर न गई ले
15:19अरे धनिया हम मोर न गई ले
15:24अरे मोरवन के देश मोर पिया मोर न ले ले
15:32अरे मोरीनी के लागी रेठेश मोर न ले ले
15:36लेकिन ये तो तरजी का मुझी लहला लेकिन तनी गाने का भावस्तल गो करें
15:52कि अरे जमीदार साहब उठाये तो अरिया हाँ
15:56अरे बोले बापिया पखान मादो सिंगा पता ना बताईबू
16:01अरे तो अरे बिटिया कामारी डॉल जाहान मादो सिंग का पताईब अवहले
16:09अरे रतनावती बुञ्या कान खोल कर सुल ले
16:12यही तो पिटिया हैने सीथा देख तो मेरे एक हाथ में तो पिटिया सीथा
16:17और एक हाथ में नंगी चमचमाती हूई तलार
16:20नंगी चमचमाती हुई तलवार
16:22अगर मादो सिंग का पता काइबस नहीं बताएगी
16:25तो तेरी भी टिया सीता को काड़ कर दो टुकड़ा कर दूँगा
16:28रतना थी बुढ़िया डर गई
16:31कलेज जमिदार साहब
16:32आज आप चल जा
16:35सवेरे आप अईबा तो आपके हम बता दे मादो सिंग का पता
16:39जमिदार साहब घर चले गए
16:42लेकिन जब रतिया भाहिल तो रोट की भांत
16:45मादो सिंग डाकू फिर पहुचल बुढ़िया के कुटिया पर
16:48अजब मादो सिंग डाकू के बुढ़िया मतारी देखले तो क्रयावक से ज़र ज़र ज़र ज़र आशू चले लगल
16:54डाकू पूछा के रहे मा क्यूं रो रही है रहे
16:57बुढ़िया कले बिटवा
16:59इह बात मत पुछा कि कहा बद रो थी के ले थे बात हमार मान जा कि अब हमरे कुटिया पर मताया
17:05अब हमरे कुटिया पर मताया मादो सिंग डाकू कहा रहे मा क्यूं ऐसे कहती है
17:10कले बिटवा
17:11सज्जन सिंग ठाकूर को रे गईले के बाद कला कर कुटेज़ को पुछे तलत तो हर पता
17:16और आज उंसे उनसे दादा कई लेगी पता तो हर बता देव
17:19तो बैêटवा तो �HO के गिरपतार करके लिए जाके जान से मार दिहने बैटवा
17:22मादय सिंहों सिंह को नहीं है कि अरे मा क्या दूजिनी इस सब्सक्राइब कुए אז
17:48जवने भरवा में माधों का वहल बसे लाउनु तेहरा कई से लूटी
17:53अरे मा मेरा नाम माधो सिंग दाकु अजिस कुटिया में माधो सिंग दाकु का पडार पर हो चुका है
18:14और उस कुटिया को कौन लूट सकता है उस बगिया को कौन उजार सकता है एक बात याद रख ले
18:20मेरा भेद मत बताना चाए कुछ भी हो जा तो का इसका अंजाम जो कुछ होगा मैं सब सहलूगा रे मा
18:27यही करकर के माधो सिंग दाकु उसी रात को जाकर जंगल में छिप गया लेकिन बाबुजी सबेरवा जब भेल तो सज्जन सिंग ठाकु फिर वही तलवार ले करके और घोला पसावारी करके आकर बुरिया को कुटिया को घेर लिये
18:40किया तो बुरिया माधो सिंग का पता बता ही देगी लेकिन बाब जबने समय सज्जन सिंग ठाकु कुटिया पर पहुंचे ले माधो सिंग दाकु जंगल में जा चुका था
18:49खापकुर शाप पूछते के रे बुहिया बता दे
18:53लेकिन बुहिया की आवाज के जर एक है कि मैं मादो सिंग का पता नहीं जानती
18:57तो फिल्म का नाम बाड जंगली और तर्जवा
19:00कि दिन सारा रे गुजारा तेरे यंगना
19:06है अब छोड़ा दमो है मोरे सजना
19:15मेरे यार सब बखे मेरे यार सब बखे
19:27इत तर्जबा लेकिन बुढ़िया कहरलबा कि अरसा मुझा के बुढ़िया बोली
19:37परभेद नहीं है खोली
19:45मजदूर जिन्दाबाद
19:52कि रेट हो कुर सजन सिंग भागी और बुहिया की बात ना माना
20:07जट पकड़ के लड़की उसकी तलवार हाथ में ताना
20:12कि गर्भेद बताएगी ना तो मारूंगा इसे जरूरी और तेरी भी बंदर हेगी दुनिया में आज मजूरी पर बुहिया जरान डोली तुम मार दे भलही गोली गोली गोली
20:30अरे सज्जन सिंग ठाकुर कान खोल कर सुन ले मेरी बिकिया सीता को बोटी बोटी काब सकते हो मुझे गोली मार सकते हो लेकिन मैं माभो सिंग का पता नहीं जानती नहीं जानती नहीं जानती
20:44इवतिया जे बुहिया रतनाती के सज्जन सिंग जमिडार सुनन तो क्या किये
20:50कि धाकू की ममता जागी ना बुहिया देद बताई
20:58अरे भरी के क्रोध सज्जन सिंग
21:03भरी के क्रोध हमें सज्जन सिंग
21:06अरे लड़की को दिये या लगाई हो
21:10लूटेरा कैसे लूटी बगीया अर बॉढ। रोपी देजिल सु परत पů प्यरा।
21:23सद्जनु शिंग्तां कुर। गुर्या 48 उसां कार करके दू� нее कर दान।
21:29आफ हो जब दूट टूट गलना वाबू जी कोई दूट करीफ लास लेकर्क बुर्यारेतनाती कुटिया
21:35कि देखी देखी लसी आ हावा माई असी आ हो यह तो ही रहलू बुरह उती के सहर वह बीटिया
22:05कुटनी बुह उती में हमरो ठें दुनिया हो अब कई देई सहर वह बीटिया
22:20लेकर के दू टुकडी लास अपनी बिटिया के बुढ़िया वोई कुटिया में रो रहलबा कोई आसु तक पोच्छे वाला नहीबा बाबुजी लेकिनी चर्चा भीरे दीरे छेतर में फैले लगल एकदम संसनी की तरह से किये रहे मादू सिंग डागू के पता नवब तवल
22:50मादू सिंग जागू के कर खबर नहीं बाब यह लोग बतियावा चर्चाई फैले लगल लेकिन धीरे धीरे बात कहां तक पहुंची मेरे दोस्तों गवर करने की बात है देखें गरीब के आख अभी स्फोट यह बात फैले कहां तक चपी अपर फेग अ
23:20आपने भाही नीका अछे पवला माधो सिंग जाब की आए फाबारी आए अपने भाही में बाहंटे असंट तो घोड़े पर चलकर माधो सिंग अरे घोड़े पर चलकर माधों सिंग
23:49पहुचा जवान दिन दहारे भोरे पर चरगर के माधो सिंग्दाकू उसके शरीर में आग की लपड़ भवत रही थी प्रतिशोत की भावना जल रही थी जवान जब पहुचा भोरा बुहिया कुट्यक पिछवारे बांदिया और कहता एरे मा तुझे मैं एक बचन दे चुका
24:19रूटुकरी लास मारोती हुई माधो सिंग्दाकू के हाथ में ठमा देती है माधो सिंग्दाकू पहुचा उस लास को लेकर नभी किनारे चिता लगा कर सीता की लास चिता पर रख दिया और जिसमें आग लगा है चिता सीता की जल्ल लगी चो चिता की राक उठा कर तिलक �
24:49अरे किया प्रतिया भारी तरफ पुजा या पर या भाही नी कहे
24:53अरे बदला लेबा ज़ुए तोनों भाया बने भाई
24:56अरे है पता मरी मादूगा की गव तक बदला ना पांगा
25:11और शादी का दिन सपना होगा ठाली में अनना खांगा
25:17अरे गाँवालों काण खोल कर सुन लो
25:21अरे इस गाँव के अंदर सहनाई अब कभी न बजने पाएगी
25:26बोली में चरकोई दूलन ससुराल अपने जाएगी जाएगी जाएगी जाएगी
25:33तब भुड़ावा पच्चरी के बाबू माधों सिंगा वाणावा
25:39अरे इस गाँवा पच्चरी के बाबू माधों सिंगा के बाबू माधों सिंगा वाणावा
25:51अरे तो ले ठाकुराईन गईनी बुधिया के लागा वाणावा पच्चरी के बाबू माधों सिंग जाएगी जाएगी
26:13शच्चरी के बाबू माधों सिंग ठाकुर को ग्रफ्तार करके गोड़े के पर में बात कर और घसीट ते हो ले गया जंगल में जान से मारने के लिए अट्तले ठाकुराईन रोवत गिलगिलाद कोंचलीं रतनाथी बुधिया के पास
26:27के पास और या के गाली कि माई है हमिरसे लुढ़कतोर के बिचाया ला तोенशिका हृगून है हरुद माधुप गालज माधुस संग माधू new Learn
26:47भदिया के आप तक है लेकिन यद्ध हम्हरे तोय लुआ まघर द Темनई करें हम अङो नहीं तुוז
26:56अपने बढ़ा मतारी के त्याद ठकुराइन के अपने कुटिया में बैठा करके ज़ंगल में सज्जन सिंग ठाकुर के बचाओ बद वो समभ हैल का
27:15इसरी आप बर्यश द्याद अपने मागए जोल्या गया खरने मादों सिंग लागा आ
27:35अगर कुछ कहले का मौकान नबा अगर कुछ कहले का मौकान नबा तो एक ठोपाय भाग थाकुर साब कर बचा ले का कवर्चीप
27:48किया रजभपती का बुढ़िया आई गेल तो समहना लार अर लगा तलवरिया बुढ़िया गिर भाहर आये
27:58जादर के लपकर कोई बीचों में खरी होगे तलवार के सामने
28:03तलवार सज्जन सिंग ठाकूर के नल लग करके बुढ़िया मतारी के लग गया
28:07बुढ़िया मतारी जब गिर करके आह कैले हो
28:12मादो सिंग डाकू तलवार फे करके बुढिया मतारी को गोद भी ले लिया कि अरे मा
28:17मैं तेरा भी कातिल बना रहे
28:19बुढिया मतारी कहे बटवाती मेरा कातिल नही है
28:22एक बात सुन ले
28:24मरते वक्त अपनी मां की अन्ति में छापुर कर देना बेटा
28:28क्या कहती है रतनावती बुहिया कि अब मत मरिया बेता ठाकुर का परनवा हक्त वल पापी परनवा सपनवा होई जाए
28:41अब मतारी की बेटवास सज्जन सिंग ठाकुर के अब मत मरिया यही कहते का ते बुढ़िया मतारी के प्रांग पक्षिरू निसर गए ते वह लास रह गई लेकिन मादू सिंग दागू के दिमगवा लगल लट्टू की भात नाचे
28:55कि अब मुझे करना क्या चाहिए मादू सिंग्दा को बुढ़िया मतारी के नाम पर एठे नगर बनाया उस नगर का नाम रखा रतनफूर और वही से जाकू पना छोर कर जंगल में जाकर के सन्यासी बन गया
29:11कि अब मोडेल याज का दिमाग कभी लिखे है क्या गुर्विहाई गुर्राम लाल की दाया कथने कर तक चंडरी का बच्चन की अनुपम्हाया अरे लुटे रा कईसे लूटी बगिया बेचन कभी नरेस पस्तारत कबसे रा लुटे रा कईसे लूटी बगिया
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