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Electoral Trusts:How does companies’ money reach political parties? In this video, we explain the ABCD of electoral trusts in simple language. Learn what an electoral trust is, how it works, and the role of companies in political funding in India. Also understand corporate funding to political parties, the election funding system, and the rules related to political donations.

Electoral Trusts: कंपनियों का पैसा सियासी दलों तक कैसे पहुंचता है? इस वीडियो में हम इलेक्टोरल ट्रस्ट की ABCD को आसान भाषा में समझा रहे हैं। जानिए electoral trust क्या होता है, यह कैसे काम करता है और political funding in india में कंपनियों की भूमिका क्या है। साथ ही समझें corporate funding to political parties, चुनावी फंडिंग सिस्टम और राजनीतिक चंदे से जुड़े नियम।

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~PR.396~HT.178~

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00:00अलेक्टोरल बॉंड स्किम रद्ध होने के बाद कंपणियों ने साल 24 पच्चुस में स्यासी पार्टियों चंदा देने के लिएक बार फिर अलेक्टोरल ट्रस्ट को अपना जरिया बना लिया है
00:13साल 2023 में केवल पांच ट्रस्टों ने कुल 1218.36 करोर रुपए का चंदा बाटा था
00:22वहीं फरवरी 2024 में सुप्रीम कोट ने अलेक्टोरल बॉंड स्किम को रद्ध कर दिया
00:26अब इसके बाद साल 2024 पच्चिस चंदा बाटने वाले उलेक्टोरल ट्रस्टों के संख्याबर कर नौ हो गई
00:32अब उन्होंने इस दोरान करीब 3811 करोर रुपए का चंदा सियासी दलो को दिया
00:37तो आज किस वीडियो में आपको बताते ही कि Electoral Trust क्या है और इन्हें फंड कैसे मिलता है और ये काम कैसे करता है
00:44लेकिन उसे पहले नमशकार मैं सुटो शड़ा बोल्स काई देख रहे हैं
00:48दरसल Electoral Trust स्किम साल 2013 में UPA सरकार ने शुरू की थी
00:52फिर साल 2018 में एंडिया सरकार Electoral Bond स्किम लेकर आई
00:56अब दोनों के जरिये कमपनियों और व्यक्तियों की और से सियासी दलो को चंदा दिया जाता है
01:00अब Electoral Bond के जरिये कोई भी कमपनी या फिर व्यक्तियों सीधे सियासी पार्टियों को चंदा दे सकते हैं
01:06लेकिन Electoral Trust के जरिये ऐसे चंदा नहीं दिया जा सकता
01:09पहले कमपनियों या फिर व्यक्तियों को इन ट्रस्ट को चंदा दिया जाएगा
01:13फिर ये ट्रस्ट अपने पास आए पैसो को सियासी दलो में बाटते हैं
01:17वहीं Electoral Bond के तो है तो चंदा देने वाले की जानकारी गोपनी रखी जाती थी
01:21वहीं Electoral Trust के जडिये जा आनिवारे है कि इसके तो है तो मिलने वाले चंदे की जानकारी देनी होती है
01:26अब हर साल कमपनी आया फिर वेक्तियों से मिले चंदे की जानकारी चुनाव आयोप को देनी होती है
01:31अब इसमें ये साफ बताना होता है कि किस कमपनी से कितने रुपय मिले
01:35फिर इससे फंड से किस पार्टी को कितना रुपया चंदा दिया गया
01:38तो आई अब आपको यह भी बिता देते हैं कि भारत माखिर कितने electoral trust हैं
01:41साल 2013 में registered trustों के संख्या 3 थी वही साल 2021-22 में संख्या 17 हो गई थी
01:46लेकिन देखा जाए तो इनमें से कुछ trust ही पार्टियों को चंदा देती है
01:502023 में केवल 5 trustों ने चंदा दिया था वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 9 हो गई
01:55वहीं इनमें से 3 trust प्रूटेंड electoral trust, progressive electoral trust और new democratic electoral trust ने सबसे ज़्यादा चंदा दिया
02:04वहीं सियासी दलों को मिले कुल चंदे का 98 फिजदे हिस्सा इनहीं trustों से मिलता था
02:09तो यह आपको बदाते कि आखिरी trust क्या से काप करता है
02:12company अदिनियम के तहे तो register कोई भी company electoral trust बना सकती है
02:16पर उससे trust को कोई भी company या फिर विक्टी चंदा दे सकता है
02:20अब trust को भारती नागरिक भारती कंपनिया या फिर firm शेक्षिक रूप से चंदा देती है
02:25अब यह पैसा चेक, bank craft या फिर electronic transfer के जरिये भी किया जा सकता है
02:30मैं trust को चंदा देते समय पैसे देने वालों को अपना पैन नंबर या फिर passport नंबर देना जरूरी होता है
02:36अब इसके बाद एक वी टीए वर्ष में जो चंदा इकठा हुआ है उसका 95 फिजदी हिस्सा सियासी दलों में बाठा जाता है
02:43मुई जन प्रतिनिधत्व आधिनियम 1951 के तहट यह अनिवारे हैं कि बागी 5 फिजदी हिस्सा trust अपने खर्च के लिए रख सकते हैं
02:51में चंदे के पैसे का स्तमाल trust के समय अपने लिये नहीं कर सकते हैं
02:54वह एलेक्टरल ट्रस्टों को हर तीन वी टीए वर्षों में रेविन्यू के लिए अप्लाई करना होता है
02:59वह ट्रस्ट को अपने अकाउंट्स और इडिट करवाने होते हैं
03:01पैसे देने वाले और जिन्हें चंदा दिया गया उनका बेवरा CBDT और चुनाव आयो को देना होता है
03:07तो दोस्तों फिलाल इस वीडियो में इतना ही आपको इजनकरी कैसे लेगी हमें कमेंट में लिपकर ज़रूर बतेएगा
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