00:00राद गहराती जा रही थी, पुराना घर सन्नाटे में डूबा था, तभी अचानत दर्वाजे पर एक धीमी दस्तक हुई, मैं हडबडा कर उठा, सोचा शायद हवा होगी, फिर वही दस्तक, इस बार तेज, मानो कोई अंदर आने को बेचैन था, मुझे डर लगने लगा, मै
00:30एक परच्छाई धीरे धीरे हिल रही थी, अचानक दर्वाजा चर करके खुला, अंदर कोई नहीं था, पर एक आवाज गूंज उठी, तुम्हें बुला लिया है, मेरी सासे रुख गई, पसीना छूट गया, अगले ही पल, वो साया मेरे सामने था, खोखली आखें, काले क
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