00:00अमावस्या की रात थी, राजेश पुराने घर में दाखिल हुआ, जहां एक तूटा हुआ आइना था, वो अंदर आते ही सिहर गया, उसे अपने पीछे एक परचाई दिखाई दी, पर वो अपनी नहीं थी, अचानक दर्वाजा जोर से बंद हुआ, लाइटे जपकने लगी
00:30परचाई धीरे से फुस फुस आई, तुम्हारे आने का इंतजार था, हमेशा से अगले ही पल आईना चटक गया, परचाई गायब थी, पर राजेश भी कभी लोट कर नहीं आया, गाव वाले कहते हैं, उस घर में आज भी किसी की अधूरी परचाई भटकती है
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