00:00गाव के बाहर एक टूटा घर था, जिसे सब छोटी का घर कहते थे, कहा जाता था, वहाँ एक बच्ची की आत्मा रहती है, दीपक, 32 साल का आत्मी, उस घर में रात बितानी की हिम्मत कर बैठा, रात के 12 बजे खिल खिलाने की आवाज आई, अंकल, खिलोगे, वो मुड़ा, �
00:30खिलोची की आवाज आई, अब तुम्हें हमेशा मेरे साथ रहना होगा, सुबह जब लोग घर पहुचे, दीपक कहीं नहीं था, बस वो गोडिया मुस्कुरा रही थी,
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