00:00रात का आखरी पहर था, एक पुराना बर्गत का पेड सुनसान गली में खड़ा था, तभी एक रहागीर उसकी जडों में बैठ कया, अचानक एक सफेद साया उपर से जूलने लगा, रहागीर की रूप काम पुठी, धीरे धीरे वो साया नीचे उतरने लगा,
00:18रहागीर भागने की कोशिश करने ही वाला था, कि एक सर्द हाथ उसके कंधे को जकर लेता है, वो पलट कर देखता है, और सामने उसकी अपनी लाश खून में लत्पत पड़ी है, तब उसे एहसास होता है, वो जिन्दा नहीं, बस अपनी मौत का आखरी सफर देख रहा है,
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