00:00रात की खामोशी में आपका स्वागत है
00:02रात दो बजे
00:04ट्रेन एक सुनसान स्टेशन पर रुकी
00:06नाम था अंधेरी खड़ी
00:09बाहर एक बूढी और इत किसी अद्रिश्य इंसान से बात कर रही थी
00:13और जब वो वापस चड़ी
00:16उसके पैर जमीन पर नहीं थे
00:18ये कोई आम सफर नहीं था
00:20और राजीव भी अब कोई आम इंसान नहीं रहा
00:24जाना चाहते हैं कि वास्तव में क्या हुआ था
00:27पूरी कहानी सिर्फ रात की खामोशी पर दिये गए लिंक पर देखें
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