00:00कॉलकाता की बारिश में आज कुछ अजीब हो रहा था। रात के 12 बचकर 5 मिनत थे जब दर्वाजे पर जोरदार दस तक हुई। मैंने दर्वाजा खोला तो एक भीगी-भीगी महीला खड़ी थी। क्लारा मुखर जी। उसने कहा मेरे पिता की मौद से पहले उनके पास एक �
00:30पांच साल पहले फांसी हुई थी। लेकिन ये घड़ी और ये मौते एक रहस्य थे जो अभी भी जिन्दा था। फिर अचानक खिड़की के बाहर एक परचाई दिखी और घड़ी की धीमी टिक-टिक गुंजने लगी। क्या ये सच में मौत की घड़ी थी। शायद कुछ
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