00:00रात के एक बजे, राजेश अपनी आखिरी बस पकड़ चुका था, बस में ज्यादा लोग नहीं थे, सिर्फ कुछ पैसंजर्स और एक बुजर्ग आदमी जो खिड़की के पास बैठा था, बस सुंसान रास्ते से गुजर रही थी, लाइट्स बार-बार टिम्टिमा रही थ
00:30जैसे कुछ कहना चाहता हो, वो जुक कर धीरे से फुस फुस आया, बेटा पिछली सीट पर मत बैठना, राजेश चौंक गया, उसने मुड़कर पिछली सीट देखी, वहां कोई नहीं था, लेकिन, लेकिन सीट पर गीला निशान था, जैसे कोई अभी अभी वहां बैठा ह
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