00:00हर रात की एक सुबह होती है, लेकिन कुछ राते ऐसी होती है, जिनकी सुबह नहीं होती, ये कहानी है एक ऐसे इनसान की, जो एक रात एक ट्रेन में चड़ा, लेकिन उतरने वाला शायद कोई और था, ये बात 2016 की है,
00:25नाम है राजीव, पुने में IT कंपनी में काम करने वाला एक सीधा साधा लड़का, राजीव को ओफिस के काम से अचानक भुसावल जाना पड़ा, टिकट वैटिंग में था, लेकिन रात 11.45 पीम की ट्रेन में एक सीट मिल गई, स्लीपर क्लास, S6 बोगी, सीट नमबर 23, रा�
00:55एक बुजूर्ग औरत एक कोने में बैठी थी, सफेद साडी, माथे पर बड़ी लाल बिंदी, वो लगातार खिडकी की तरफ देख रही थी, बिना पलक जपकाए, राजीव ने सोचा थका हुआ हूँ, सोजाता हूँ, उसने अपनी सीट पर चादर बिछाई, और लेट ग
01:25एक सुनसान स्टेशन पर खड़ी थी, नाम था अंधेरी खड़ी, राजीव ने कभी ये नाम नहीं सुना था, बाहर जाग कर देखा, स्टेशन पर कोई बोर्ड नहीं, सिर्फ कोहरा और सन्नाटा, उसी वक्त वही बुजूर्ग औरत धीरे से उठी, और ट्रेन से बाहर उ
01:55लेकिन वहां कोई नहीं था, राजीव बाहर निकलने ही वाला था कि ट्रेन अचानक चल पड़ी, वो औरत वापस चड़ी, लेकिन अब उसकी चाल में कुछ अजीब था, जैसे वो तैरती हुई आई हो, उसके पाव जमीन पर नहीं थे, राजीव अब पूरी तरह से जाग
02:25कि उसने दर्वाजा खोला, अंदर दीवार पर कुछ लिखा था, खून जैसे लाल रंग में, तू भी नहीं बचेगा, राजीव पीछे मुड़ा, कोई नहीं था, उसने तेजी से दर्वाजा बंद किया, और भाग कर अपनी सीट पर आया, लेकिन जैसे ही वो अपनी सीट
02:55बोला, भाई, ये मेरी बुकी हुई सीट है, उस आदमी ने धीरे सिस सिर उठाया, उसकी आखे लाल थी, और चहरा जुलसा हुआ, तू अब मेरा हिस्सा है, ये कहकर वो गायब हो गया, राजीव भाग कर टीटी को ढूनने लगा, कई बोग्यों में जाकर देखा, कोई नह
03:25डबा सुनसान, फिर उसे एक गार्ड मिला, नीली यूनिफॉर्म में, पुराने जमाने की स्टाइल में, राजीव बोला, सर, इस ट्रेन में कुछ अजीव हो रहा है, कोई इनसान गायब हो गया, एक औरत हवा में उड़ रही थी, गार्ड ने कहा, बेटा, तुम किस ट्रे
03:55गार्ड ने गहरी सांस ली, और कहा, ये ट्रेन दस साल पहले पट्री से उतर गई थी, और इसमें बैठे सब लोग मारे गए थे, तुम भी, उसी रात इसी ट्रेन में थे, याद करो, तुम्हारा फोन, तुम्हारा बैग, सब तो उसी हादसे में जल गया था, राजीव च�
04:25से उसकी तरफ एक शीशा बढ़ाया, राजीव ने उसमें देखा, उसका चहरा भी जला हुआ था, उसकी आखे लाल थी, राजीव की सांसे तेज हो गई, वो चीखने लगा, नहीं, ये सपना है, सपना है, अचानक उसने आखे खोली, वो अपने ओफिस के कमरे में था, साम
04:55आजी के दिन भुसावल जाने वाली ट्रेन पट्री से उतर गई थी, माना जाता है कि उस ट्रेन की आत्माएं अब भी रात में उसी ट्रैक पर भटकती है, राजीव की आंखों से आसु बहने लगे, तभी उसका फोन बजा, अनोखा नंबर था, प्लस शुन्य शुन्य श�
05:25कहानिय नहीं होती, कुछ डर आपके साथ सफर करने आते हैं, कभी अगली बार जब ट्रेन में चड़ो, तो ध्यान से देखना, आपके पास जो बैठा है, वो इनसान है भी या नहीं, लाइक, शेर, फॉलो और सब्सक्राइब फो मोर टेरिफाइं स्टोरीज, हम फिर मिलें
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