00:00उत्तर प्रदेश के एक पुराने किले में रात को परचाईया खुद बखुद चलती थी।
00:0629 साल का परियटक घूमते घूमते एक अंधेरे गलियारे में पहुँचा।
00:11अचानक उसे एहसास हुआ कि कोई पीछे खड़ा है।
00:15उसने पलट कर देखा, वहां उसकी ही परचाई थी।
00:19लेकिन अजीब मुस्कान के साथ परियटक का चहरा पीला पड़ गया।
00:24उसने भागने की कोशिश की। लेकिन परचाई उसके आगे-ागे दोडने लगी।
00:29वो दर्वाजे तक पहुँचा और बाहर निकलने ही वाला था, कि दर्वाजा अपने आप बंध हो गया।
00:36उसकी चीक पूरे किले में गूंच गई।
00:39अगले दिन गाइड ने बताया, जो भी उस किले में रात बिताता है, उसकी परचाई वही रह जाती है।
00:46और आज भी वहां मुस्कुराती पर चाईया भटकती है।
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