00:00कॉलकाता में 34 साल का अंकुर के नए फ्लाट के बगल वाला कमरा हमेशा बंद रहता था
00:06पर रात एक बजे उसके दर्वाजे से कोई हलकी सी खट पटाती थी
00:11एक रात वो तंग आकर देखने गया
00:14दर्वाजा थोड़ा सा खुला था
00:16अंदर अंधेरा
00:18अंकुर ने मुबाइल की फ्लैशलाइट डाली
00:21सामने एक 45 साल का आदमी खड़ा था
00:25बिना हिले डुले
00:26लेकिन उसके पैर नहीं थे
00:28अंकुर ने धीरे से पूछा
00:31कौन?
00:32उस आदमी ने गर्दन टेड़ी करके कहा
00:35मैं तुम्हारे आने का
00:36तीन साल से इंतेजेर कर रहा हूँ
00:38फिर वो अचानक पीछे हड गया
00:41और कमरा अपने आप लौक हो गया
00:44अगली सुबस सोसाइटी वालों ने बताया
00:47उधर तो कोई रहता ही नहीं
00:50वो फ्लैट तो तीन साल पहले से बंद है
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