00:00कुछ रिष्टे वक्त से नहीं इरादे से जीते हैं सोपय के आखों से बेहते आसू और खामोश हा एक नहीं शुरुआत बन की जाती है ऐसी शुरुआत जो मौाश्टे के डर से नहीं दिल के होसले से होती है गर आप इस ड्रामसल के हवाले से अपने राकिजाल देना जाते ह
00:30जीदा खामोश और हर बात में माबाप की इज़त को मुकदम रिखने वाली वो इन्वेस्टे में अर्दू अदब के तालबा थी किताबों से महबत करती थी और दिल में चुपी हुई ख़ाइश रिखती कि कभी कोई से लबजों में चाहे बिना शर्द बिना तकाज़े के
01:00एक पुरानी किताब दोनों के नजरे एक साथ पढ़े उन मामूली लम्हा एक खामोश अगास बन गया पिर मुलाकाते हुई पिर किताबों के तबाद ले पिर नजमों में चुपी बात थी और दिल में चुपी जजबाद हसन सुफिया से महबत करने लगा वो उसे न सिरफ
01:30पसंद से शादी कीती सुफिया के लिए अपनी महबत को जबान देना गुना जहसा था और हसन के लिए चुप रहना सजा जब हसन ने रिष्टा बेजा तो सुफिया के वालिद ने बगेर मिले इंकार कर दिया कि हम बेटों को बेचा नहीं करते महबत नहीं सुनते सुपी �
02:00पर एक दिन सूबिया अब एक स्कूल में फ्रेंसिपल बने चुके थी जब एक तालीमी कांफर्स में शरीक हुए थी है तो एक मुकरर की आवास सुनते ही साकत रह जाती है
02:11वो हसन था जो मशूर शायर उस्ताद बन चुका था स्टेज पर कड़े होकर वो अपनी नजम पढ़ता है जिसमें हर लब सोपय के लिए होता है हर सतर इसके खुपामोशी को जवाब देती है सब के सामने वो कहता है कुछ रिष्टे वक्त से नहीं इरादे से जीते है सोपय क
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