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00:00मैं समझती थी कि आपका खुसा ठंडा हो जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा लेकिद आपने तुझे से अभीशा के लिए कलमा भी पढ़ लिया और दफना भी आया हूँ
00:25मरे हुए लोग सिंदा नहीं होते हैं
00:33देखो पज़र मैं पीछे अटने बालों में से नहीं हूँ
00:35तुम मेरी तरफ देखो नदेखो मैं तुम देखने आता हूँ
00:37तुम बहले ही मेरी बातों का जवाब नहोते लिकिन मैं बात करता रहूँगा
00:40काश ये जाएदाद की लड़ाई नहोती तो अभी काका साब हमारे साथ होते हैं
00:45जाएदाद पर की गई जानी दुष्मनी महलों को ऐसे ही धीमक की तरह खा लेती है
00:49मेरा कार मेरा लोग उन सबको खत्रा है उनसे इसलिए उन्हें सज़देना नहसमी है
00:55मैं शादी कर दूँगी तो कम से कम मेरे बाबा मुझसे प्यार तो करेंगे
01:00आसी भी तुमी से भुगावट हमारे प्यार की मेश मुण
01:04ठीक है
01:06मैं शादी कर लीते हूँ और अगर ऐसा है तो ऐसा ही साही
01:10देखो मैं ऐसा होने निक दूँगा
01:15अपनी खुशियों के दर्वाजे अपने हाथों से मत बन कीजिए
01:18कुछ लोग कुछ बने ना बने आपके नहीं बनते
01:20गेम अप शुरू हुई है रालतान
01:22मुझे अमेरिका के पलपल की ख़बर चाहिए
01:24और मैं एक शोड कोई गलती ना हूँ
01:28बस वाचे
01:29जब तक शादी ना हो जाए ना
01:32तो महबत मिलने की उमीद रहती है
01:34तो में अंदाजा भी नहीं है बिटा
01:37पर ये उमीद ही है
01:39जिसने आज तक तुम्हें तुम्हेरे कदमों पे खड़ा रखा है
01:42मैंने शेर से कह दिया है कि वो शादी कर ले
01:46फचर
01:48जब मेरा ही दिल नहीं माना कि तुम्हारी कई हो और शादी हो
01:52वो क्या माना होगा
01:54मैं अपनी उलाग के जाने का माता मना हूँ या तुम्हारे पे ऐसी का
01:58अरे बस कर दो मरजान
01:59अल्ना और और उला दे देगा
02:01कि वैसे भी मैं इतना दूर तुम्हारे लिए तो जा रहा हूं कि तुम्हारे लिए अपने लिए हमारी बनने वाली फैमिली के लिए तुम्हीं तो कहती थी कि मैं कुछ करूँ अब मैं
02:16मैं थत्सक्न झाल जा जाओ वे वे बनने आ लिए रखना कि वे वे ईना रहा हूं कि येजरे लिए दिए शखंता पूर दुम्हारे लिए
02:46प्सकति जूँ कर दो, कि बढ़े ऑने थाम, ठाला गह उत्यूका की थारा, प्सकति अंदो की तो, थारा ओन्यूट फिलुग्छिते जिए, आफ ने कि बुट्टोर प्सक्राइब घ्ड़नुग्चा जीद सुट्टोर पhouने ऊंदो मैं नेगाद संदोर्स में.
03:08इसा तो मेरे जीते जी अपने बाइयों से पतीजों से गड़ जोड़ हो जाए
03:20समीर वो ये वली एद हमारा वो इसे बना कर रख़़गा चार रिष्टे होंगे तो है उसके बात करेगा तो दिल भरा रहेगा ना
03:34वरना कली एमेकी उप्टा जाएंगी पकेले बंतों
03:38इतना जलने कुड़ने से तो बेहतर था कि अपनी जिन्दगी के बारे में कुछ सूचती है
03:47अपना घर अपनी अउलाद अपना शोहर आज सब कुछ होता आपके पास
03:55तुम से मिलने को करता है ये बेचानी बेता भी मेरी समझ से बाहर है
04:04अब तुम्हारे बारे मैं सोचता हूँ तुम दिल की धड़कानी तेज हो जाती है
04:09मुझे साफ साफ सुना ही देती है
04:12तुम्हें तो इस बात की भी खबर नहीं कि मैं
04:16तुम्हारे लिए कितना बेकरार
04:19मैं सब तो दिल की यही अस्रत है दूआ
04:36कि तुम से मिल के तुम्हें अपना बनाना है
04:43तुम्हें तुम्हें इनी फीलिंग्स कभी पता नहीं हुग
04:45अगर वो कहते हैं न
04:50कि अगर नियत सची हो तो मकसद हासिल होई जाता है
04:54मैं तुम्हारा इंतिसार करूंगा
05:00गुजरान वाले के एक चोटे से महले में
05:05आमना अपनी मा और दो चोटी बच्चों के साथ रहती थी
05:08वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
05:11और आमना सलाइकर के गर्रका खर्च पूरा करती थी
05:13वो चाहती थी के बाई पर लिखकर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
05:17महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चपन से जानता था
05:22वो एक वरक्षाफ पर काम करता था और सीधा सादन मुजवान था
05:26आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी मगर इसने के भी कुल कर इजार न किया
05:30सिरफ यह चाहता था कि किसी दिन रहाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
05:35एक दिन आमना के रिश्टे के लिए एक अमीर करानी के ललका या
05:39वो लड़का शहर में बेजनेस करता था और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
05:43माने आमना को कहा
05:44बेटी ये रिश्टा हमारे लिए अल्हा का तुफ़ा है
05:47आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खुलूस जगा बना चुक के थे
05:52मगर मा के खागा खुशी किया कि कुछ नभूली रिश्टाते हो गया
05:56इधर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
05:59मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
06:03विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दो के बाँस है
06:10और के लड़के उसे तालुकात रखता है आदिल तलब गया
06:13वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए मगर डरता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहा है
06:19आखिर कार आदिल हीमत के और आमना के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
06:24पहले तो किसी ने एकीन न किया
06:26मगर कुछ दिन बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया रिष्टा पौरन तूट गया
06:31मैंने शर्मिंद की से आमना को कहा
06:33बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहतर जिन्देगी देना चाहा
06:36मगर असल सच तो यह कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
06:40चंद माह बहुत दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
06:44आमना के आंकों में आस हुआ गए
06:46क्योंकि इसे लगा के कभी कभी तूटे रिष्टे असल रिष्ट के रहा हमवार करते हैं
06:51ड्रामसिल के हावले से अपने राइकी साहर लाजमी कमेंट करें
06:54साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
06:57तेंक्स पर वाचिंग अला हाफ़ज
07:16रहने वाले आदिल आमना को बच्पन से जानता था
07:18वो एक वरक्षाफ पर काम करता था और सीधा साधन मुझवान था
07:22आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी मगर इसने कभी कुल कर इज़ार न किया
07:26सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
07:31एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गराने के ललका या
07:35वो ललका शेहर में बेजनेस करता था और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
07:39माने आमना को कहा
07:41बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुफा है
07:43आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खलूस जगा बना चुके थे
07:48मगर मा के खागा खुशी किया कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
07:52इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
07:55मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
08:00विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दो के बाहां से
08:06और के लड़कों से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
08:09वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए मगर डरता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहा है
08:15आखिर कर आदिल हीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
08:21पहले तो किसी ने एकिन न किया
08:22मगर कुछ दिनों बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया रिष्टा पौरन तूट गया
08:27मैंने शर्मिन की से आमना को का बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहतर जिन्दगी देना चाहा
08:32मगर असल सच तो यह है कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
08:37चन्द माह बहुत दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
08:40आमना के आंकों में आस हुआ गए क्योंकि उसे लगा के कभी कभी तूटे रिष्टे असल लिष्ट के रहा हमवार करते हैं
08:47ट्रामसिल के हावले से अपने राइकी साहर लाजमी क्यमन करें
08:50साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
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08:55गुजरान वाले के एक चोटे से महले में आमना अपनी मा और दो चोटी बच्चों के साथ रहती थी
09:00वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
09:03और आमना सलाई करके गयर का खर्श पूरा करती थी
09:06वो चाहती थी के बाई पर लिक कर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
09:10महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चपन से जानता था
09:14वो एक वरक्षाफ पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
09:18आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी
09:20मगर इसने के भी कुल कर दिजार न किया
09:22सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
09:27एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमेर गराने के ललका आया
09:31वो ललका शेहर में बेजनेस करता था
09:33और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
09:35माने आमना को कहा
09:37बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुफ़ा है
09:40आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी
09:42और खलूस जगा बना चुके थे
09:44मगर मा के खाहा खुशी
09:46क्या कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
09:49इधर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
09:52मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी
09:54बलकि द्वा कि वो खुश रहे
09:56विवर शादी से पहले दी
09:58दिन पहली आदिल को पता चले
10:00कि वो लड़का दरासल दोके बाउस है
10:02और क्या लड़कों से तहलुकात रखता है
10:04आदिल तलब गया
10:05वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए
10:08मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे
10:10कि वो हसत कर रहा है
10:12आखिरकर आदिल नहीमत के
10:14और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया पहले तो किसी ने एकीन न किया
10:18मगर कुछ दिनों बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया रिष्टा पौरन तूट गया
10:24मैंने शर्मिंद की से आमना को कहा बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहतर जिन्देगी देना चाहा
10:29मगर असल सच तो यह है कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
10:33चन्द माह बहुत दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया आमना के आंकों में आस हुआ गए
10:38क्योंकि उसे लगा के कभी कभी तूटे रिष्टे असल लिष्ट के रहा हमवार करते हैं
10:43ड्रामसिल के हावले से अपने राइकी साहर लाजमी कमेंट करें
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10:51गुजरान वाले के एक चोटे से महले में आमना अपनी मा और दो चोटी बच्चों के साथ रहती थी
10:57वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
10:59और आमना सलाई करके गयर का खर्च पूरा करती थी
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11:06महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चमन से जानता था
11:10वो एक वरक्षाफ पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
11:14आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी
11:16मगर इसने के भी कुल कर इजार न किया
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11:23एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गराने के ललका आया
11:27वो ललका शेहर में बेजनेस करता था
11:29और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
11:32माने आमना को कहा
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11:36आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी
11:38और खुलूस जगा बना चुके थे
11:41मगर मा के खुशी क्या कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
11:45इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
11:48मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी
11:50बलकि द्वा कि वो खुश रहे
11:52वीवर शादी से पहले दी
11:54दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दो के बाँस है
11:58और के लड़कों से तालुकात रखता है
12:00आदिल तलब गया
12:01वो चाहता है कि आमना से हकीकत बता है
12:04मगर डरता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहा है
12:08आखिर कार आदिन हीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया पहले तो किसी ने एकिन न किया
12:15मगर कुछ दिनों बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया रिश्टा पौरन तूट गया
12:20मैंने शर्मिंद की से आमना को कहा बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहतर जिन्देगी देना चाहा
12:25मगर असल सच तो यह है कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
12:29चन्द माह बहुत दिल के गर वालों ने आमना के हाथ मांग लिया
12:32आमना के आंकों मैंस हुआ गए क्योंकि इसे लगा के कभी कभी तूटे रिश्टे असल रिश्टो के रहा हमवार करते है
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12:58वो चाहती थी के बाई पर लिक कर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
13:02महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चमन से जानता था
13:07वो एक वरक्षाफ पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
13:10आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी
13:13मगर इसने कभी कोल कर इजार न किया
13:15सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
13:19एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गराने के ललका या
13:24वो ललका शहर में बेजनेस करता था
13:26और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
13:28माने आमना को कहा
13:29बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुफ़ा है
13:32आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी
13:34और खलूस जगा बना चुके थे
13:37मगर मां के खाहा खुशी
13:38क्या कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
13:41इधर आदिल ने ये ख़बर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
13:44मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी
13:46बलकि द्वा कि वो खुश रहे
13:48विवर शादी से पहले दी
13:51दिन पहली आदिल को पता चले
13:53कि वो लड़का दरहसर दो के बाथ है
13:54और के लड़कें से तलुकात रखता है
13:56आदिल तलब गया
13:57वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए
14:00मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे
14:02कि वो हसत कर रहा है
14:05आखिर का आदिल हीमत के और आमने के मा के पास
14:07जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
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14:11मगर कुछ दिनों बाद वही ललका प्राड में
14:14पुलिस के हाथ आ गया रिष्टा पौरण तूट गया
14:16मैंने शर्मिन की से आमना को कहा
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14:21मगर असल सच तो यह है कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
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14:49वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
14:51और आमना सलाइकर के गयर का खर्श पूरा करती थी
14:54वो चाहती थी के बाई पर लिक कर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
14:58महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चमन से जानता था
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15:06आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी
15:09मगर इसने के भी कोल कर दिजार न किया
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15:16एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गराने के ललका या
15:20वो ललका शेहर में बेजनेस करता था
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15:24माने आमना को कहा
15:25बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुछा है
15:28आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी
15:31और खुलूस जगा बना चुके थे
15:33मगर मां के खाहा खुशी
15:34क्या कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
15:37इदर आदिल ने ये ख़बर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
15:40मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी
15:42बलकि द्वा कि वो खुश रहे
15:44वीवर शादी से पहले दी
15:47दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का
15:55बलकि ये तर अदिल करते हो
16:09ही लडका पराड में पलिस के हाता गया
16:11रिष्टा पौराँ टोट गया
16:12मैंने शर्मिन की से आमना को का
16:14बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहते जिन्देगी देना चाहा
16:17मगर असल सच तो यह है कि बेहते निसान ही असल खुशी है
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17:05मगर इसने के भी कोल कर इजार न किया
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17:12एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गराने के ललका आया
17:16वो ललका शेहर में बेजनेस करता था
17:18और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
17:20मांने आमना को कहा
17:21बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुछा है
17:24आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी
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17:29मगर मां के खागा खुशी
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17:49आदिल तलब गया
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17:53मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे कि
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18:17चंद माह बहाद दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
18:21आमना के आंकों में आस हुआ गए
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19:14और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
19:16माने आमना को कहा
19:18बेटी ये रिष्टा हमारे लिए लिए अल्हा का तुछा है
19:20आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी
19:23और खुलूस जगा बना चुके थे
19:25मगर मां के खागा खुशी
19:27क्या कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
19:29इधर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
19:32मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी
19:35बलकि द्वा कि वो खुश रहे
19:37वीवर शादी से पहले दी
19:39दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दो के बाँस है
19:43और के लड़के से तालुकात रखता है
19:45आदिल तलब गया
19:46वो चाहता है कि आमना से खकीकत बताए
19:49मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे कि वो हस्द कर रहा है
19:52आखिर कार आदिन हीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुछ कुल कर बता दिया पहले तो किसी ने एकिन न किया
19:59मगर कुछ दिनों बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया रिश्टा पौरन तूट गया
20:04मैंने शर्मिंद की से आमना को कहा बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहतर जिन्देगी देना चाहा
20:09मगर असल सच तो यह है कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
20:14चन्द माह बहुत दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
20:17आमना के आंकों मैं आस हुआ गए क्योंकि इसे लगा के कभी कभी तूटे रिश्टे असल रिश्टो के रहा हमवार करते हैं
20:24ड्रामसिल के हावले से अपने राइकी साहर लाज़मी क्यमेंट करें
20:27साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
20:47महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्पन से जानता था
20:51वो एक वरक्षाफ पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
20:55आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी मगर इसने के भी कुल कर इज़ार न किया
20:59सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
21:04एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गरानी के ललका आया
21:08वो ललका शेहर में बेजनेस करता था और खानदान वाले पौरण खोश हो गया
21:12अमा ने आमना को कहा बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुफ़ा है
21:17आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खुलूस जगा बना चुके थे
21:21मगर मां के खागा खुशी किया कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
21:26इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
21:29मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
21:33विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दर असल दो के बास है
21:39और के लड़कें से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
21:42वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए
21:45मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहे है
21:49आखिर कर आदिल नहीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
21:54पहले तो किसी ने एकीन न किया
21:55मगर कुछ दिन बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया
21:59रिष्टा पौरण तूट गया
22:01माने शर्मिन की से आमना को का बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहतर जिन्दगी देना चाहा
22:06मगर असल सच तो यह है कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
22:10चन्द माह बहाद दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
22:13आमना के आंकों में आस हुआ गए क्योंकि इसे लगा के कभी
22:16कभी तूटे रिष्टे असल लिष्ट के रहा हमवार करते हैं
22:20ट्रामसिल के हावले से अपने रायकी साहर लाजमी क्यमेंट करें
22:23साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
22:27तेंक्स पर वाचिंग आला हाफिज
22:28गुजरान वाले के एक चोटे से महले में
22:31आमना अपनी मा और दो चूटी बच्चों के साथ रहती थी
22:34वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
22:36और आमना सलाई करके गयर का खर्श पूरा करती थी
22:39वो चाहती थी के बाई पर लिखकर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
22:43महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चमन से जानता था
22:47वो एक वरक्षा पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
22:51आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी मगर इसने के भी कुल कर दिजार न किया
22:56सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
23:00एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गरानी के ललका या
23:04वो ललका शेहर में बेजनेस करता था और खनादान वाले पौरन खोश हो गए
23:09मांने आमना को कहा बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अलाह का तुछा है
23:13आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खुलूस जगा बना चुके थे
23:18मगर मां के खागा खुशी क्या कि कुछ न बोली रिष्टाते हो गया
23:22इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल नहीं दिल में तूट गया
23:25मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
23:29विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दोके बास है
23:35और के लड़कों से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
23:38वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहे है
23:45आखिर कर आदिल नहीं मत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
23:50पहले तो किसी ने एकिन न किया
23:52मगर कुछ दिनों बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया
23:55रिष्टा पौरण तूट गया
23:57माने शर्मिन की से आमना को कहा
23:59बेटी मैंने तुझे हमेशे बहते जिन्देगी देना चाहा
24:02मगर असल सच तो यह कि बेहते निसान ही असल खुशी है
24:06चन्द महाबाद दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
24:09आमना के आंकों में आस हुआ गए
24:11क्योंकि इसे लगा के कभी कभी तूटे रिष्टे असल रिष्टों के रहा हमवार करते है
24:16ट्रामसिल के हावले से अपने रायकी साहर लाज़मी क्यमेंट करें
24:20साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
24:23तेंक्स पर वाचिंग अला हाफिज
24:24गुजरान वाले के एक चोटे से महले में
24:27आमना अपनी मा और दो चूटी बच्चों के साथ रहती थी
24:30वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
24:32और आमना सलाई करके गयर का खर्श पूरा करती थी
24:35वो चाहती थी कि बाई पर लिखकर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
24:39महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चपन से जानता था
24:44वो एक वरक्षाफ पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
24:47आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी मगर इसने के भी कुल कर इजार न किया
24:52सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
24:56एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गरानी के ललका आया
25:01वो ललका शहर में बेजनेस करता था और खानदान वाले पौरण खोश हो गया
25:05अमा ने आमना को कहा बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुफ़ा है
25:09आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खलूस जगा बना चुके थे
25:14मगर मां के खागा खुशी किया कि कुछ न बोली रिष्टाते हो गया
25:18इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
25:21मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
25:25विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दर असल दो के बास है
25:31और के लड़कें से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
25:34वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए
25:38मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहे है
25:41आखिर कर आदिल नहीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
25:46पहले तो किसी ने एकिन न किया
25:48मगर कुछ दिन बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया
25:52रिष्टा पौरण तूट गया
25:53माने शर्मिन की से आमना को का बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहते जिन्दगी देना चाहा
25:58मगर असल सच तो यह है कि बेहते निसान ही असल खुशी है
26:02चन्द माह बाद दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
26:06आमना के आंकों में आस हुआ गए क्योंकि इसे लगा के कभी
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26:12ड्रामसिल के हावले से अपने रायकी साहर लाजमी कमेंट करें
26:16साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
26:19तेंक्स पर वाचिंग आला हाफिज
26:21गुजरान वाले के एक चोटे से महले में
26:23आमना अपनी मा और दो चूटी बच्चों के साथ रहती थी
26:26वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
26:28और आमना सलाई करके गयर का खर्श पूरा करती थी
26:31वो चाहती थी कि बाई पर लिखकर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
26:35महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्पन से जानता था
26:40वो एक वरक्षा पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
26:43आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी मगर इसने के भी कुल कर दिजार न किया
26:48सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
26:53एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गरानी के ललका या
26:57वो ललका शेहर में बेजनेस करता था और खनादान वाले पौरन खोश हो गए
27:01अमा ने आमना को कहा बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अलागा तुफा है
27:05आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खुलूस जगा बना चुके थे
27:10मगर मां के खागा खुशी किया कि कुछ न बोली रिष्टाते हो गया
27:14इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में टूट गया
27:17मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
27:21विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दो के बाँस है
27:28और के लड़कें से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
27:31वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए
27:34मगर डरता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहा है
27:37आखिर कर आदिल नहीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
27:42पहले तो किसी ने एकिन न किया
27:44मगर कुछ दिनों बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया
27:48रिष्टा पौरन तूट गया
27:49माने शर्मिन की से आमना को कहा
27:51बेटी मैंने तुझे हमेशे बहते जिन्देगी देना चाहा
27:54मगर असल सच तो यह कि बेहते निसान ही असल खुशी है
27:58चन्द महाबाद दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
28:02आमना के आंकों में आस हुआ गए
28:03कुछ इसे लगा कर कभी कभी तूटे रिष्टे असल रिष्टों के रहा हमवार करते है
28:08ट्रामसिल के हावले से अपने रायकी साहर लाजमी क्यमन करें
28:12साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
28:15तेंक्स पर वाचिंग आला हाफ़ेज
28:17गुजरान वाले के एक चोटे से महले में
28:19आमना अपनी मा और दो चूटी बच्चों के साथ रहती थी
28:22वालिद की साल पहले वबाद पा चुके थे
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28:44सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
28:49एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गरानी के ललका आया
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28:57मांने आमना को कहा बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुछा है
29:01आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खलूस जगा बना चुके थे
29:06मगर मां के खागा खुशी किया कि कुछ न बोली रिष्टाते हो गया
29:10इदर आदिल ने ये ख़बर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
29:13मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
29:17विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दो के बास है
29:24और के लड़कें से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
29:27वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए
29:30मगर डरता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहा है
29:33आखिर कर आदिल नहीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
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29:44रिष्टा पौरण तूट गया
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29:50मगर असल सच तो यह है कि बेहते निसान ही असल खुशी है
29:54चन्द महाबाद दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
29:58आमना के आंकों में आस हुआ गए कुछ इसे लगा के कभी
30:01कभी तूटे रिष्टे असल लिष्ट के रहा हमवार करते है
30:05ड्रामसिल के हावले से अपने राइकी साहर लाज़मी कमेंट करें
30:08साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
30:11तेंक्स पर वाचिंग आला हाफिज
30:13गुजरान वाले के एक चोटे से महले में
30:15आमना अपनी मा और दो चूटी बच्चों के साथ रहती थी
30:18वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
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30:45एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गरानी के ललका या
30:49वो ललका शेहर में बेजनेस करता था और खनादान वाले पौरन खोश हो गए
30:53अमाने आमना को कहां बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अलागा तुफ़ा है
30:57आमना खामुश रही इसके दिल में आदिल की साथगी और खलूस जगा बना चुके थे
31:02मगर मां के खागा खुशी किया कि कुछ न बोली रिष्टाते हो गया
31:06इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में टूट गया
31:09मिगर इसने आमना को बद्वा नहीं दी बलकि द्वा कि वो खुश रहे
31:14विवर शादी से पहले दी दिन पहली आदिल को पता चले कि वो लड़का दरासल दो के बाहाँ है
31:20और के लड़कें से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
31:23वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए
31:26मगर ड़ता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहा है
31:29आखिर कर आदिल हीमत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
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31:40रिष्टा पौरण तूट गया
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33:03इदर आदिल ने ये खबर सुनी तो दिल ही दिल में तूट गया
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33:31पहले तो किसी ने एकिन न किया
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33:36रिष्टा पौरन तूट गया
33:38माने शर्मिन की से आमना को का बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहते जिन्देगी देना चाहा
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33:47चन्द माह बहुत दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
33:50आमना के आंकों में आस हुआ गए क्योंकि इसे लगा के कभी
33:53कभी तूटे रिष्टे असल लिष्ट के रहा हमवार करते है
33:57ड्रामसिल के हावले से अपने रवाई की साहर लाज़मी क्मेंट करें
34:00साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
34:04तेंक्स पर वाचिंग आला हाफिज
34:05गुजरान वाले के एक चोटे से महले में
34:08आमना अपनी मा और दो चूटी बच्चों के साथ रहती थी
34:11वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
34:13और आमना सलाई करके गयर का खर्श पूरा करती थी
34:16वो चाहती थी के बाई पर लिखकर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
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37:08और के लड़कें से तालुकात रखता है आदिल तलब गया
37:11वो चाहता है कि आमना से हकीकत बताए मगर डरता कि के लोग ये ना समझे कि वो हसत कर रहा है
37:18आखिर कर आदिल नहीं मत के और आमने के मा के पास जाकर सब कुछ कुल कर बता दिया
37:23पहले तो किसी ने एकिन न किया
37:25मगर कुछ दिन बाद वही ललका प्राड में पुलिस के हाथ आ गया रिष्टा पौरण तूट गया
37:30मैंने शर्मिंद की से आमना को का बेटी मैंने तुझे हमेशे बेहतर जिन्दगी देना चाहा
37:35मगर असल सच तो यह कि बेहतर इंसान ही असल खुशी है
37:39चन्द माह बहाद दिल के गरवालों ने आमना के हाथ मांग लिया
37:43आमना के आंकों में आस हुआ गए क्योंकि उसे लगा के कभी कभी तूटे रिष्टे असल लिष्ट के रहा हमवार करते है
37:49ट्रामसिल के हावले से अपने रवाई की साहर लाज़मी क्यमेंट करें
37:53साथ में हमरे यूट्यूब का चैनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
37:56तेंक्स पर वाचिंग अला हाफिज
37:58गुजरान वाले के एक चोटे से महले में आमना अपनी मा और दो चोटी बच्चों के साथ रहती थी
38:03वालिद की साल पहले वपात पा चुके थे
38:05और आमना सलाई करके गयर का खर्श पूरा करती थी
38:08वो चाहते थी के बाई पर लिक कर बेहतर जिन्देगी गुजर सके
38:12महले में ही रहने वाले आदिल आमना को बच्चपन से जानता था
38:17वो एक वरक्षा पर काम करता था और सीधा सादन मुझवान था
38:20आदिल के दिल में आमना के लिए महबत थी
38:23मगर इसने के भी कुल कर दिजार न किया
38:25सिर्फ ये चाहता था कि किसी दिन हालाद बेहतर हो तो इसके हाथ मांगने जा सके
38:30एक दिन आमना के रिष्टे के लिए एक अमीर गराने के ललका या
38:34वो ललका शेहर में बेजनेस करता था
38:36और खनादान वाले पौरण खोश हो गए
38:38माने आमना को कहा
38:39बेटी ये रिष्टा हमारे लिए अल्हा का तुफ़ा है
38:42आमना खामुश रही इसके दिल में आदल की साथगी
38:45और खलूस जगा बना चुके थे
38:47मगर मा के खागा खुशी
38:48क्या कि कुछ नबूली रिष्टाते हो गया
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